LPG Price Hike 2026: LPG महंगी होने की वजह क्या है? तेल कंपनियों का अंडर-रिकवरी घाटा 62 हजार करोड़ पार
सऊदी CP और पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी लागत, सरकार ने LPG सब्सिडी और सप्लाई के लिए उठाए कदम
LPG Price Hike 2026: देश में घरेलू रसोई गैस यानी एलपीजी (LPG) की खुदरा दरों में हालिया बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर सीधा प्रभाव डाला है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की वृद्धि के बाद अब यह 913 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है, जबकि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों के लिए लक्षित सब्सिडी के बाद प्रभावी दर 613 रुपये निर्धारित की गई है। इस मूल्य वृद्धि का मुख्य कारण केवल घरेलू मांग का दबाव नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (सऊदी सीपी) में आया जबर्दस्त उछाल और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव है।
भारत अपनी कुल घरेलू एलपीजी आवश्यकताओं का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। आयात लागत और नियंत्रित घरेलू खुदरा दरों के बीच बढ़ते फासले के चलते सरकारी तेल विपणन कंपनियों—इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—की वित्तीय देनदारी तेजी से बढ़ी है। 31 अगस्त 2026 तक सार्वजनिक क्षेत्र की इन कंपनियों की संचयी अंडर-रिकवरी (वास्तविक लागत और नियंत्रित बिक्री मूल्य का अंतर) 62,000 करोड़ रुपये का विशाल आंकड़ा पार कर चुकी है। इस बहुपक्षीय दबाव को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने घरेलू आपूर्ति को सुदृढ़ करने, वितरण व्यवस्था को व्यवस्थित करने और सब्सिडी के सटीक लक्ष्योन्मुखीकरण के लिए तीन व्यापक रणनीतिक कदम उठाए हैं।
LPG Price Hike 2026: अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी और होर्मुज संकट
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एलपीजी के दीर्घकालिक और हाजिर अनुबंधों के लिए सऊदी अरामको द्वारा मासिक आधार पर तय किया जाने वाला ‘सऊदी सीपी’ (Saudi CP) वैश्विक बेंचमार्क का कार्य करता है। इसके अंतर्गत प्रोपेन और ब्यूटेन की प्रति मीट्रिक टन दरें निर्धारित की जाती हैं, जो एलपीजी के मुख्य हाइड्रोकार्बन घटक हैं। सितंबर 2026 के मूल्य निर्धारण में सऊदी अरामको ने प्रोपेन का भाव 5 डॉलर बढ़ाकर 625 डॉलर प्रति मीट्रिक टन और ब्यूटेन का भाव 20 डॉलर बढ़ाकर 660 डॉलर प्रति मीट्रिक टन कर दिया। सरकारी समीक्षा के अनुसार विगत महीनों में सऊदी सीपी में संचयी रूप से लगभग 41 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है।
इसके अतिरिक्त पश्चिम एशिया में जारी सैन्य और भू-राजनीतिक संघर्षों के कारण समुद्री व्यापारिक गलियारों में जोखिम प्रीमियम बढ़ गया है। भारत के एलपीजी आयात का सबसे बड़ा हिस्सा फारस की खाड़ी और सामरिक रूप से संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य के समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। इस क्षेत्र में जहाजों के आवागमन पर उत्पन्न जोखिम, बढ़ते समुद्री बीमा प्रीमियम और टैंकरों के विलंब ने भारत के लिए एलपीजी कार्गो की लैंडेड लागत को अत्यंत महंगा बना दिया है, जिसका प्रत्यक्ष वित्तीय भार आयातकर्ता कंपनियों की बैलेंस शीट पर पड़ रहा है।
तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी 62,000 करोड़ पार: वित्तीय समीकरणों का संकट
घरेलू उपभोक्ताओं को वैश्विक ऊर्जा मूल्य झटकों से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से भारत सरकार रसोई गैस की खुदरा कीमतों को बाजार शक्तियों के आधार पर दैनिक रूप से नहीं बदलने देती। जब अंतरराष्ट्रीय आयात लागत में तीव्र उछाल आता है और घरेलू बिक्री मूल्य को स्थिर रखा जाता है, तो तेल कंपनियों को प्रति सिलेंडर भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इस अंतर को तकनीकी भाषा में अंडर-रिकवरी कहा जाता है, जो वर्तमान में 62,000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है।
इस अंतर को पाटने के लिए सरकार ने पूर्व में वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान तेल विपणन कंपनियों को 22,000 करोड़ रुपये का एकमुश्त बजटीय अनुदान जारी किया था। इसके उपरांत वित्त वर्ष 2025-26 और 2026-27 के वित्तीय ढांचों के अंतर्गत लगभग 30,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त मुआवजे का प्रावधान किया गया है। किंतु सऊदी सीपी में लगातार बनी तेजी के कारण यह वित्तीय सहायता भी नाकाफी साबित हो रही है। केंद्र सरकार के समक्ष अब मुख्य नीतिगत चुनौती यह है कि इस 62,000 करोड़ रुपये के वित्तीय अंतर का कितना हिस्सा राजकोषीय घाटे से वहन किया जाए, कितना भार तेल कंपनियों की बैलेंस शीट उठाए और कितनी सीमा तक खुदरा दरों में आंशिक समायोजन किया जाए।
कीमतों का गणित: सामान्य उपभोक्ताओं और उज्ज्वला लाभार्थियों की स्थिति
हालिया संशोधन के उपरांत दिल्ली में सामान्य उपभोक्ताओं के लिए घरेलू एलपीजी सिलेंडर 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये हो गया है। दूसरी ओर समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को राहत देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 300 रुपये प्रति सिलेंडर की प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) सब्सिडी को पूर्ववत प्रभावी रखा गया है, जिसके चलते उज्ज्वला परिवारों को सिलेंडर 613 रुपये में ही उपलब्ध कराया जा रहा है।
मंत्रालय के विश्लेषणात्मक आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय सऊदी सीपी में 41 प्रतिशत की भारी वृद्धि होने के बावजूद उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए प्रभावी खरीद मूल्य में इस पूरी अवधि के दौरान कुल 32 प्रतिशत की शुद्ध कमी दर्ज की गई है। हालिया 60 रुपये की मूल्य वृद्धि का उज्ज्वला परिवारों के दैनिक घरेलू खर्च पर औसत प्रभाव 80 पैसे प्रतिदिन से भी कम बैठता है। हालांकि ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी अनुबंध लंबे समय तक 650 डॉलर प्रति मीट्रिक टन से ऊपर बने रहे, तो सरकारी सब्सिडी के वित्तीय आवंटन में और अधिक वृद्धि करनी पड़ेगी।
कदम 1: घरेलू उत्पादन में 25% की वृद्धि और रिफाइनरी धाराओं का एलपीजी में डाइवर्जन
विदेशी आयात पर निर्भरता घटाने और आपूर्ति को निरंतर बनाए रखने के लिए सरकार ने 8 मार्च 2026 को देश की सभी सार्वजनिक व निजी रिफाइनरियों तथा पेट्रोकेमिकल संयंत्रों के लिए एक अनिवार्य परिचालन आदेश जारी किया था। इसके तहत रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने पेट्रोकेमिकल उत्पादन को सीमित कर प्रोपेन, ब्यूटेन, प्रोपिलीन और ब्यूटीन की रासायनिक धाराओं को एलपीजी उत्पादन पूल की ओर डायवर्ट करें।
इस तकनीकी समायोजन के परिणामस्वरूप देश के भीतर घरेलू एलपीजी उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की ठोस वृद्धि दर्ज की गई है। नीतिगत आदेश के तहत इस अतिरिक्त घरेलू उत्पादन को शत-प्रतिशत केवल घरेलू रसोई गैस वितरण के लिए आरक्षित किया गया है। वहीं गैर-घरेलू व वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन में केवल अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और रक्षा प्रतिष्ठानों जैसी अनिवार्य सार्वजनिक सेवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। होटल, रेस्तरां और विनिर्माण इकाइयों की एलपीजी मांग की निष्पक्ष समीक्षा और कोटा तय करने के लिए तीनों बड़ी तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशकों की एक उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी गई है।
कदम 2: जमाखोरी और पैनिक बुकिंग पर रोक, 21 से बढ़ाकर 25 दिन हुआ रिफिल अंतराल
बाजार में आपूर्ति संकट की अफवाहों और अनुचित भंडारण को रोकने के लिए तेल मंत्रालय ने एलपीजी वितरण प्रणाली के परिचालन नियमों को कड़ा कर दिया है। वर्तमान में देश भर में बुकिंग के पश्चात एलपीजी सिलेंडर की औसत डिलीवरी अवधि मात्र ढाई दिन बनी हुई है। इसके बावजूद कुछ क्षेत्रों में कृत्रिम कमी पैदा करने और अत्यधिक स्टॉक जमा करने की प्रवृत्ति देखी गई थी।
इस अवांछित मांग को नियंत्रित करने के लिए दो एलपीजी सिलेंडरों की बुकिंग के बीच के अनिवार्य न्यूनतम समयांतराल को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि कोई भी उपभोक्ता अपना पिछला सिलेंडर प्राप्त करने के 25 दिन पूरे होने से पहले नया रिफिल ऑर्डर बुक नहीं कर सकेगा। इस कदम से डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर सिलेंडरों की कालाबाजारी पर पूर्ण अंकुश लगा है और वास्तविक जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक आपूर्ति चक्र निर्बाध रूप से पहुंच रहा है।
कदम 3: 1 अक्टूबर से अनिवार्य बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण, सब्सिडी की लीकेज पर पूर्ण रोक
सरकारी खजाने से दी जाने वाली सब्सिडी का वास्तविक और पात्र परिवारों तक पारदर्शी हस्तांतरण सुनिश्चित करने के लिए 1 अक्टूबर 2026 से एक बड़ा विधिक व तकनीकी बदलाव लागू किया जा रहा है। सरकार ने सब्सिडी युक्त घरेलू एलपीजी रिफिल के लिए उपभोक्ताओं का बायोमीट्रिक बायो-ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया है।
19 सितंबर 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार देश में कुल 30.51 करोड़ सक्रिय घरेलू एलपीजी कनेक्शन धारक पंजीकृत हैं। इनमें से 27.43 करोड़ यानी लगभग 89.9 प्रतिशत उपभोक्ता अपनी बायोमीट्रिक ई-केवाईसी प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण करा चुके हैं, जबकि लगभग 3.08 करोड़ उपभोक्ताओं का प्रमाणीकरण अभी शेष है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो उपभोक्ता निर्धारित समय सीमा तक बायोमीट्रिक सत्यापन नहीं कराएंगे, उनका कनेक्शन काटा नहीं जाएगा; वे सामान्य व्यावसायिक बाजार दर (बिना सब्सिडी) पर सिलेंडर खरीदना जारी रख सकेंगे, किंतु उनके बैंक खातों में सब्सिडी की राशि जमा नहीं होगी। यह सत्यापन प्रक्रिया उपभोक्ता घर पर डिलीवरी के समय डिलीवरी मैन की बायोमीट्रिक मशीन द्वारा, स्थानीय गैस एजेंसी के शोरूम पर जाकर अथवा तेल कंपनियों के आधिकारिक मोबाइल ऐप पर फेस-ऑथेंटिकेशन के माध्यम से पूरी कर सकते हैं।
LPG Price Hike 2026: निष्कर्ष
घरेलू एलपीजी के मोर्चे पर उत्पन्न यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा संकट, अंतरराष्ट्रीय आयात निर्भरता और घरेलू लोक-कल्याणकारी नीतियों के मध्य एक नाजुक संतुलन का परिचायक है। 62,000 करोड़ रुपये से अधिक की अंडर-रिकवरी के वित्तीय दबाव को झेलते हुए भी सरकार ने घरेलू उत्पादन में 25 प्रतिशत का इजाफा करके और बुकिंग अंतराल को 25 दिन करके आपूर्ति व्यवस्था को टूटने से बचाया है। 1 अक्टूबर से लागू होने वाला अनिवार्य बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण सब्सिडी तंत्र से बिचौलियों और फर्जी कनेक्शनों को समाप्त कर सरकारी राहत को सही लाभार्थियों तक पहुंचाने का एक निर्णायक साधन बनेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार की अस्थिरता के बीच यह समन्वित रणनीति देश में रसोई गैस की निर्बाध उपलब्धता और मूल्य स्थिरता बनाए रखने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हो रही है।
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