बच्चों को घी खिलाना क्यों जरूरी है? डॉक्टर ने बताए इसके शानदार हेल्थ बेनिफिट्स और आयुर्वेदिक महत्व

हड्डियों की मजबूती से लेकर दिमाग तेज करने तक; जानें डॉक्टर संदीप गुप्ता की राय और सही मात्रा।

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Ghee Benefits: आयुर्वेद शास्त्र में घी को शरीर के दोषों को संतुलित करने वाला और ‘ओज’ (ऊर्जा) बढ़ाने वाला माना गया है। आधुनिक विज्ञान भी इस बात की पुष्टि करता है कि घी में मौजूद हेल्दी फैट्स और विटामिन बच्चों के विकास को हर स्तर पर सपोर्ट करते हैं। बढ़ते बच्चों के लिए घी ऊर्जा का सबसे शुद्ध और प्राकृतिक स्रोत है।

Ghee Benefits: बच्चों के शारीरिक विकास और वजन में घी की भूमिका

बढ़ते बच्चों के लिए ‘गुड फैट’ बहुत जरूरी होता है। घी कैलोरी का बेहतरीन स्रोत है जो बिना किसी दुष्प्रभाव के बच्चों का वजन संतुलित रखने में मदद करता है।

  • मजबूत हड्डियां: घी में विटामिन डी और के होता है, जो कैल्शियम के अवशोषण को बढ़ाता है, जिससे हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत होती हैं।

  • ऊर्जा का स्तर: सक्रिय बच्चों के लिए घी ईंधन की तरह काम करता है, जिससे वे खेल-कूद और पढ़ाई के दौरान थकान महसूस नहीं करते।

  • त्वचा का स्वास्थ्य: घी के नियमित सेवन से बच्चों की त्वचा प्राकृतिक रूप से कोमल और चमकदार बनी रहती है।

Ghee Benefits: मानसिक विकास और याददाश्त में सुधार

बचपन में मस्तिष्क का विकास सबसे तेज होता है और घी इसमें ईंधन का काम करता है।

  • ओमेगा-3 फैटी एसिड: घी में मौजूद ओमेगा-3 मस्तिष्क की कोशिकाओं की कार्यक्षमता बढ़ाता है।

  • एकाग्रता (Focus): आयुर्वेद के अनुसार घी ‘मेधा’ (बुद्धि) बढ़ाने वाला है। यह याददाश्त तेज करता है और बच्चों की समझने की क्षमता को निखारता है।

  • तनाव में कमी: यह मस्तिष्क की नसों को पोषण देता है, जिससे बच्चा मानसिक रूप से शांत और सक्रिय रहता है।

Ghee Benefits: मजबूत पाचन तंत्र और कब्ज से राहत

छोटे बच्चों में पाचन संबंधी समस्याएं आम होती हैं। घी आंतों के लिए एक प्राकृतिक लुब्रिकेंट की तरह काम करता है।

  • मेटाबॉलिज्म: यह पाचन अग्नि को प्रज्वलित करता है जिससे भोजन आसानी से पचता है।

  • कब्ज से मुक्ति: घी मल त्याग को आसान बनाता है, जिससे बच्चों को कब्ज की शिकायत नहीं होती।

  • ब्यूटिरिक एसिड: इसमें मौजूद यह एसिड आंतों की अंदरूनी परत को स्वस्थ रखता है।

डॉक्टर संदीप गुप्ता की सलाह: कब और कितना खिलाएं?

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप गुप्ता के अनुसार घी की मात्रा उम्र के हिसाब से तय होनी चाहिए:

  1. 6 से 12 महीने: दिन भर में केवल 1 छोटा चम्मच घी पर्याप्त है।

  2. 1 से 3 साल: प्रतिदिन 5 से 10 मिलीलीटर घी दिया जा सकता है।

  3. शुरुआत कैसे करें: जब बच्चा 6 महीने का हो जाए, तब धीरे-धीरे उसकी दाल या खिचड़ी में कुछ बूंदें डालकर शुरुआत करें।

Ghee Benefits: बच्चों को घी खिलाने के सही तरीके और व्यावहारिक टिप्स

घी को सीधे खिलाने के बजाय भोजन में मिलाकर देना अधिक प्रभावी होता है:

  • दाल और खिचड़ी: बच्चों की दाल, चावल या खिचड़ी में ऊपर से घी मिलाएं।

  • दूध के साथ: रात में गुनगुने दूध में आधा चम्मच घी मिलाकर देने से पाचन बेहतर होता है।

  • घर का शुद्ध घी: हमेशा देशी गाय के दूध से बने घर के शुद्ध घी को प्राथमिकता दें, क्योंकि बाजार के घी में मिलावट की संभावना रहती है।

निष्कर्ष: बेहतर भविष्य के लिए स्वस्थ आहार

निष्कर्षतः, घी बच्चों की डाइट का एक अभिन्न अंग होना चाहिए। यह न केवल स्वाद बढ़ाता है बल्कि उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की नींव भी मजबूत करता है। डॉ. संदीप गुप्ता की सलाह को ध्यान में रखते हुए, आज से ही अपने बच्चे के भोजन में शुद्ध देसी घी शामिल करें।

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