Summer Yoga Tips: भीषण गर्मी में योग करते समय किन बातों का रखें ध्यान? एक्सपर्ट डॉ. नवीन भट्ट ने बताए जरूरी टिप्स, कैसे और कब करें योग ज्यादा फायदेमंद
डॉ. नवीन भट्ट के अनुसार सही समय, आसन और सावधानियां, लिवर और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद
Summer Yoga Tips: भारत के विभिन्न राज्यों में इन दिनों रिकॉर्ड तोड़ भीषण गर्मी और उमस का प्रकोप लगातार जारी है। मैदानी इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाने के कारण आम जनता को कई तरह की गंभीर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस चिलचिलाती धूप और झुलसाने वाले मौसम में नियमित रूप से योगाभ्यास की दिनचर्या को जारी रखना बेहद चुनौतीपूर्ण काम हो जाता है। लेकिन आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सही वैज्ञानिक तरीके और उचित सावधानियों के साथ योग किया जाए, तो इस मौसम में भी शरीर को कई बड़े स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं। सुप्रसिद्ध आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. नवीन भट्ट ने इस विषय पर गहराई से प्रकाश डालते हुए बताया है कि भीषण गर्मी के महीनों में योग करते समय कुछ बेहद जरूरी और अनिवार्य सावधानियां बरतना हर व्यक्ति के लिए बहुत आवश्यक है।
डॉ. नवीन भट्ट के अनुसार, इस मौसम में समय का सही चुनाव करना सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। दोपहर की तेज धूप में योग करने के बजाय सूर्योदय से पहले या शाम को सूर्यास्त के बाद का समय स्वास्थ्य के लिए सबसे ज्यादा गुणकारी और सुरक्षित रहता है। आइए विस्तार से समझने का प्रयास करते हैं कि इस भीषण गर्मी के मौसम में योग करने के असली फायदे क्या हैं, कौन से विशेष आसनों को हमें प्राथमिकता देनी चाहिए और अभ्यास के दौरान किन गलतियों से पूरी तरह बचना जरूरी है।
गर्मी में योग के मुख्य फायदे
गर्मी के अत्यधिक तनावपूर्ण मौसम में सही तरीके से किया गया योगाभ्यास हमारे शरीर के भीतर एक प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम (ठंडक प्रदान करने वाली प्रणाली) की तरह काम करता है। जब हम इस मौसम में विशेष प्राणायाम और हल्के स्ट्रेचिंग वाले आसनों का चुनाव करते हैं, तो वे शरीर के आंतरिक अंगों को शांत करते हैं और पसीने के माध्यम से त्वचा के रोमछिद्रों को खोलकर हानिकारक विषाक्त पदार्थों (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालते हैं। इसके परिणामस्वरूप शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी में भारी इजाफा होता है और गर्मी के कारण होने वाला मानसिक तनाव व चिड़चिड़ापन पूरी तरह दूर हो जाता है।
विशेषज्ञ डॉ. नवीन भट्ट ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति नियमपूर्वक और सावधानी से इस मौसम में योग करता है, तो वह गर्मी के कारण होने वाली क्रॉनिक थकान, सिरदर्द, लू के थपेड़ों और अचानक होने वाले डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के खतरों से खुद को बहुत ही आसानी से सुरक्षित रख सकता है। योग हमारे नर्वस सिस्टम को संतुलित करता है, जिससे रक्तसंचार सुचारू रूप से चलता है।
सही समय का चुनाव और स्थान
भीषण गर्मी के दिनों में योग करने के लिए सुबह 5:00 बजे से लेकर 7:00 बजे तक का समय सबसे ज्यादा आदर्श और सर्वोत्तम माना जाता है, क्योंकि इस समय वातावरण में शुद्ध ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होती है और हवा में एक सुखद ठंडक बनी रहती है। यदि किसी कारणवश आप सुबह अभ्यास नहीं कर पाते हैं, तो शाम को 6:00 बजे के बाद जब धूप पूरी तरह खत्म हो जाए, तब योग किया जा सकता है। दोपहर के समय यानी 12:00 बजे से लेकर 4:00 बजे के बीच किसी भी प्रकार के भारी शारीरिक श्रम या योग से पूरी तरह बचना चाहिए, क्योंकि इस दौरान सौर विकिरण और गर्मी अपने चरम स्तर पर होती है, जो शरीर को बीमार कर सकती है।
स्थान के चुनाव पर बात करते हुए डॉ. भट्ट ने विशेष सलाह दी है कि यदि आप घर के बाहर या छत पर खुले में योग कर रहे हैं, तो हमेशा किसी छायादार और हवादार जगह का ही चयन करें। यदि आप घर के भीतर किसी बंद कमरे में अभ्यास कर रहे हैं, तो ध्यान रखें कि कमरे की खिड़कियां खुली हों ताकि ताजी हवा का आवागमन होता रहे। सीधे तौर पर एयर कंडीशनर (AC) की बेहद ठंडी हवा के ठीक सामने बैठकर योग करने की गलती कभी न करें।
योग के दौरान जरूरी सावधानियां और हाइड्रेशन
इस मौसम में योगाभ्यास करते समय सबसे बड़ा ध्यान अपने शरीर में पानी के संतुलन यानी हाइड्रेशन पर रखना चाहिए। योग शुरू करने से कम से कम आधा घंटा पहले एक से दो गिलास पानी अवश्य पिएं और अभ्यास पूरा होने के पंद्रह मिनट बाद दोबारा पानी या नींबू पानी का सेवन करें, ताकि पसीने के रूप में शरीर से निकले मिनरल्स की भरपाई तुरंत हो सके। योग करते समय हमेशा सूती, ढीले और हल्के रंग के आरामदायक कपड़े ही पहनें जो पसीने को आसानी से सोख सकें और त्वचा को सांस लेने में मदद करें। फर्श की सीधी गर्मी या ठंडक से बचने के लिए एक अच्छी क्वालिटी के मोटे योग मैट का इस्तेमाल अनिवार्य रूप से करें।
अभ्यास के दौरान यदि आपको अचानक किसी भी समय सिर चकराने, अत्यधिक कमजोरी महसूस होने, आंखों के सामने अंधेरा छाने या सांस फूलने जैसी समस्या महसूस हो, तो तुरंत वहीं रुक जाएं और शवासन की मुद्रा में लेटकर आराम करें। गर्मी में अपने शरीर की क्षमता से ज्यादा ज़ोर लगाना या खुद को अत्यधिक थकाना आपके दिल और ब्लड प्रेशर के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकता है।
किन आसनों और प्राणायाम को दें प्राथमिकता
भीषण गर्मी के इस दौर में हमें बहुत ज्यादा भारी, तेज गति वाले और कठिन आसनों को पूरी तरह से टालना चाहिए। इसके स्थान पर शरीर को शीतलता देने वाले और विश्राम प्रदान करने वाले आसनों जैसे कि शवासन, भुजंगासन, बालासन और कटिचक्रासन को अपनी दैनिक डायरी में प्राथमिकता देनी चाहिए। ये सभी आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने के साथ-साथ शरीर के तापमान को सामान्य बनाए रखने में मदद करते हैं।
इसके साथ ही, प्राणायाम के मोर्चे पर सांसों की गति को नियंत्रित करने वाले अभ्यास जैसे अनुलोम-विलोम का धीमे स्वर में अभ्यास करें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस मौसम में ‘शीतली’ और ‘शीतकारी’ प्राणायाम का अभ्यास विशेष रूप से करना चाहिए, जिसमें जीभ को मोड़कर बाहर से ठंडी हवा को अंदर खींचा जाता है। यह प्राणायाम सीधे तौर पर पेट की गर्मी को शांत करता है, छालों की समस्या को दूर करता है और प्यास को नियंत्रित करने में मदद करता है।
निष्कर्ष: आहार का संतुलन और एक्सपर्ट संदेश
योग विज्ञान के नियमों के अनुसार, योगाभ्यास तब तक पूरी तरह फलदायी नहीं हो सकता जब तक कि आपका आहार उसके अनुकूल न हो। भीषण गर्मी के इन महीनों में अपने भोजन में अत्यधिक तेल, मसालों, जंक फूड और भारी खाद्यों को पूरी तरह से त्याग दें। इसके स्थान पर ताजे मौसमी फल जैसे तरबूज, खरबूजा, खीरा, ताजा गाढ़ा दही, छाछ और नारियल पानी को प्रचुर मात्रा में शामिल करें। योग करने के तुरंत बाद कभी भी भारी भोजन न करें, बल्कि कम से कम 45 मिनट के अंतराल के बाद ही कोई सुपाच्य सात्विक आहार लें।
डॉ. नवीन भट्ट का देश की युवा और बुजुर्ग पीढ़ी को यही मुख्य संदेश है कि योग को केवल एक शारीरिक कसरत न समझें, बल्कि इसे अपनी अनुशासित जीवनशैली का एक अनिवार्य हिस्सा बनाएं। बदलती जलवायु और ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में यदि हम पूरी सावधानी, सही वैज्ञानिक तकनीक और शांत मन के साथ योग को अपनाते हैं, तो हम बिना किसी महंगी दवा के इस भीषण गर्मी में भी खुद को पूरी तरह ऊर्जावान, फिट और निरोगी बनाए रख सकते हैं।
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