JPSC PT CID Investigation: JPSC PT परीक्षा में 454 सफल अभ्यर्थियों ने नहीं जमा की OMR कार्बन कॉपी, CID ने संदिग्ध मानकर जांच तेज की
OMR कॉपी नहीं देने वाले 454 अभ्यर्थियों से CID करेगी पूछताछ, गिरफ्तारी की भी आशंका
JPSC PT CID Investigation: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा 2025 को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। प्रारंभिक परीक्षा (PT) में उत्तीर्ण हुए कुल 2,204 अभ्यर्थियों में से 454 अभ्यर्थियों ने अपराध अनुसंधान विभाग (CID) को अपनी ओएमआर (OMR) शीट की कार्बन कॉपी नहीं सौंपी है। सीआईडी ने केवल 1,750 अभ्यर्थियों द्वारा ही ओएमआर शीट जमा किए जाने की पुष्टि की है।
ओएमआर शीट न सौंपने वाले ये 454 अभ्यर्थी अब सीधे तौर पर जांच एजेंसी के रडार पर आ गए हैं। सीआईडी ने इन्हें ‘संदिग्ध’ मानते हुए इनका पूरा डेटा एकत्र करना शुरू कर दिया है और जल्द ही इन्हें समन भेजकर पूछताछ की तैयारी की जा रही है। प्रथम दृष्टया यह आशंका जताई जा रही है कि इन अभ्यर्थियों ने परीक्षा में बड़े पैमाने पर ‘सेटिंग’ और धांधली के जरिए ओएमआर शीट में हेराफेरी करवाकर अपने अंक बढ़ाए हैं, जिसके कारण वे अपनी मूल कार्बन कॉपी उपलब्ध कराने से बच रहे हैं। जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधित अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।
JPSC PT CID Investigation: नोटिस और तय समयसीमा की अनदेखी से बढ़ा संदेह
सीआईडी ने परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और सत्यता की जांच के लिए एक सार्वजनिक सूचना जारी कर सभी सफल अभ्यर्थियों से सहयोग मांगा था। अभ्यर्थियों से 30 जुलाई 2026 से 7 अगस्त 2026 के बीच पेपर-1 और पेपर-2 की ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी का पीडीएफ या स्पष्ट फोटो बनाकर सीआईडी द्वारा जारी व्हाट्सएप नंबर और ईमेल आईडी पर भेजने का अनुरोध किया गया था।
ज्यादातर ईमानदार अभ्यर्थियों ने निर्धारित समयसीमा के भीतर अपने दस्तावेज जमा करा दिए, लेकिन 454 अभ्यर्थियों द्वारा लगातार की गई अनदेखी ने जांच एजेंसी के शक को पुख्ता कर दिया है। सीआईडी अधिकारियों का मानना है कि यदि अभ्यर्थियों के पास ओएमआर की असली और सही कार्बन कॉपी मौजूद होती, तो उसे जमा करने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए थी।
सेटिंग और ओएमआर में हेराफेरी की बड़ी आशंका
यह पूरा घटनाक्रम जेपीएससी मेधा घोटाले से जुड़े व्यापक तार की जांच का हिस्सा है। सीआईडी की शुरुआती जांच के अनुसार, आशंका है कि इन अभ्यर्थियों ने परीक्षा केंद्रों पर ओएमआर शीट खाली छोड़ी थी या बाद में सिस्टम में साठगांठ करके अंकों में बदलाव कराया था। कार्बन कॉपी जमा करने पर आयोग के पास मौजूद मूल ओएमआर और अभ्यर्थी की कॉपी के बीच का अंतर तुरंत पकड़ में आ जाता, इसी डर से दस्तावेज जमा नहीं किए गए हैं।
सीआईडी अब एक-एक अभ्यर्थी का रोल नंबर और रिकॉर्ड खंगाल रही है। धांधली साबित होने पर न सिर्फ अभ्यर्थियों का चयन रद्द किया जाएगा, बल्कि इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम देने वाले गिरोह और प्रशासनिक तंत्र में बैठे उनके मददगारों पर भी सख्त आपराधिक मुकदमा दर्ज होगा।
जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) परीक्षा में भी अनियमितता, साक्ष्य आमंत्रित
जेपीएससी मामले की परतें उघाड़ने के दौरान ही सीआईडी को जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) परीक्षा में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के इनपुट्स मिले हैं। सीआईडी ने इस परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों और आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है।
परीक्षा में धांधली, पेपर लीक या सेटिंग से जुड़ा कोई भी डिजिटल साक्ष्य (जैसे फोटो, ऑडियो, वीडियो या अन्य दस्तावेज) उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखने का भरोसा दिया गया है। राज्य की दो प्रमुख भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खुलासे ने पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
संदिग्ध अभ्यर्थियों पर कसता कानूनी शिकंजा
ओएमआर शीट जमा न करने वाले 454 अभ्यर्थियों के लिए आने वाले दिन बेहद मुश्किल भरे हो सकते हैं। सीआईडी जल्द ही आधिकारिक समन जारी कर इन्हें व्यक्तिगत पूछताछ के लिए तलब करेगी। यदि ये अभ्यर्थी ओएमआर शीट की प्रति न सौंपने का कोई ठोस और कानूनी कारण नहीं बता पाते हैं, तो उनके खिलाफ जालसाजी और धोखाधड़ी की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। मेधा सूची में जगह बनाने के बावजूद इन अभ्यर्थियों पर ब्लैकलिस्ट होने और जेल जाने का खतरा मंडरा रहा है।
JPSC PT CID Investigation: सिस्टम में सुधार और युवाओं के भविष्य का सवाल
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आने वाले भ्रष्टाचार के मामलों से लाखों युवाओं का मनोबल टूट रहा है। सालों तक दिन-रात मेहनत करने वाले मेधावी छात्र सिस्टम में फैली धांधली के कारण पिछड़ जाते हैं। सीआईडी की इस सख्त और पारदर्शी कार्रवाई से यह उम्मीद जगी है कि फर्जीवाड़े के दम पर नौकरी हासिल करने वालों का पर्दाफाश होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भर्ती प्रक्रियाओं में आमूलचूल सुधार, डिजिटल मॉनिटरिंग और अपराधियों पर त्वरित कार्रवाई से ही राज्य की परीक्षा प्रणाली की साख बचाई जा सकती है।
जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के 454 सफल अभ्यर्थियों द्वारा ओएमआर शीट न सौंपने का मामला बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। सीआईडी द्वारा इन्हें संदिग्ध घोषित कर समन जारी करने और कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी से परीक्षा माफिया में हड़कंप मच गया है। जेएसएससी सीजीएल में भी साक्ष्य जुटाए जाने के साथ ही दोनों मामलों में कड़ी कार्रवाई की उम्मीद है, ताकि राज्य के युवाओं का परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल हो सके।
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