Vishvendra Singh Resigns: विश्वेंद्र सिंह ने कांग्रेस से दिया इस्तीफा, डोटासरा पर लगाए गंभीर आरोप

पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने पार्टी छोड़ने का ऐलान किया, डोटासरा की कार्यशैली पर उठाए सवाल

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Vishvendra Singh Resigns: राजस्थान की सियासत में गांधी जयंती के अवसर पर उस वक्त बड़ा मोड़ आ गया जब कांग्रेस के कद्दावर नेता, पूर्व सांसद और पूर्व पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने पार्टी से अपने सभी नाते तोड़ने की घोषणा कर दी। सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किए गए एक भावुक और तीखे त्यागपत्र के जरिए उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

हाल ही में राज्य के शहरी निकायों के परिणामों के बाद से ही विश्वेंद्र सिंह और प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बीच तल्खी चरम पर पहुंच गई थी। पूर्व मंत्री ने पार्टी के भीतर चापलूसी की संस्कृति, जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और नेतृत्व की मनमानी को अपने अलग होने का मुख्य कारण बताया है। पूर्वी राजस्थान में जाट राजनीति और भरतपुर रियासत के प्रभाव वाले अंचल में विश्वेंद्र सिंह के इस कदम से कांग्रेस को अपूरणीय क्षति पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

Vishvendra Singh Resigns: अंतरात्मा और गिरिराज जी की आवाज पर लिया फैसला

विश्वेंद्र सिंह ने अपने त्यागपत्र और आधिकारिक संदेश में स्पष्ट किया है कि उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में हर बड़ा फैसला अपनी अंतरात्मा और अपने आराध्य देव गिरिराज जी महाराज की प्रेरणा से लिया है। उन्होंने लिखा कि पार्टी के भीतर कुछ तथाकथित और स्वयंभू नेताओं द्वारा लगातार दिए जा रहे अपमानजनक बयानों और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियों से उनके निष्ठावान कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश और क्षोभ व्याप्त है।

पूर्व मंत्री ने रेखांकित किया कि वह दशकों से जनसेवा में सक्रिय रहे हैं और उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ी है। उन्होंने कहा कि उनके लिए पद और सत्ता से कहीं अधिक महत्वपूर्ण उनका स्वाभिमान, सिद्धांत और कार्यकर्ताओं का मान-सम्मान है। जब संगठन के शीर्ष स्तर पर निष्ठावान और पुराने साथियों की अवहेलना कर केवल चाटुकारिता को बढ़ावा दिया जाने लगे, तो ऐसे वातावरण में अपनी आवाज को दबाना उनके संस्कारों और सिद्धांतों के पूरी तरह विपरीत था।

निकाय चुनाव के नतीजों से भड़का था विवाद: भरतपुर में सिमटी कांग्रेस

इस राजनीतिक बगावत की तात्कालिक पृष्ठभूमि हाल ही में घोषित हुए राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव परिणाम बने। विशेष रूप से भरतपुर नगर निगम के नतीजों ने पार्टी की आंतरिक कलह को सार्वजनिक चौराहों पर ला खड़ा किया। भरतपुर नगर निगम के कुल 65 वार्डों में हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 20 सीटें हासिल कीं, जबकि 36 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत का परचम लहराया।

वहीं राज्य की सत्ता में मजबूत वापसी का दावा करने वाली कांग्रेस पार्टी मात्र 7 सीटों पर सिमट कर तीसरे स्थान पर खिसक गई। 33 सीटों के जादुई बहुमत के आंकड़े से कांग्रेस का इतना दूर रह जाना स्थानीय स्तर पर भारी असंतोष का कारण बन गया। विश्वेंद्र सिंह ने इन नतीजों के तुरंत बाद मोर्चा खोलते हुए आरोप लगाया था कि पार्टी संगठन ने उन संघर्षशील कार्यकर्ताओं के टिकट काटकर अपने चहेतों को थमा दिए जो कभी पार्टी के कार्यक्रमों में नजर भी नहीं आते थे, जिसके चलते जनता और बागी प्रत्याशियों ने कांग्रेस को पूरी तरह नकार दिया।

गोविंद सिंह डोटासरा से सीधा टकराव और इस्तीफे की मांग

चुनावी दुर्गति के बाद विश्वेंद्र सिंह ने न केवल भरतपुर और डीग के जिला कांग्रेस अध्यक्षों की कार्यशैली पर सवाल दागे, बल्कि सीधे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के खिलाफ सीधा हमला बोल दिया। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर मांग की थी कि निकाय चुनाव में पार्टी की इस ऐतिहासिक पराजय की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए डोटासरा को अविलंब प्रदेश अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे देना चाहिए।

विश्वेंद्र सिंह ने संगठन संचालन में पारदर्शिता के अभाव और कुछ पुरानी भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर भी नेतृत्व को घेरा था। उनका तर्क था कि जब तक शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक पार्टी निचले स्तर पर मजबूत नहीं हो सकती। पूर्व मंत्री के इन तीखे हमलों ने पार्टी की अनुशासनात्मक सीमाओं को हिलाकर रख दिया था और जयपुर से लेकर दिल्ली तक सियासी चर्चाएं तेज हो गई थीं।

डोटासरा का पलटवार: आंतरिक मतभेद से किया था इनकार

विश्वेंद्र सिंह के सार्वजनिक हमलों के जवाब में पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार के मतभेद या गुटबाजी को सिरे से खारिज किया था। डोटासरा ने अपने आधिकारिक बयानों में कहा था कि कांग्रेस पार्टी एकजुट है और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के सहयोग से निरंतर मजबूत हो रही है। उन्होंने इस तरह के असंतोष और आंतरिक कलह की खबरों को भारतीय जनता पार्टी द्वारा फैलाया गया दुष्प्रचार करार दिया था।

डोटासरा का कहना था कि निकाय चुनावों में टिकटों का वितरण स्थानीय समन्वय समिति और सभी वरिष्ठ नेताओं की राय के आधार पर किया गया था। संगठन में किसी भी स्तर पर पक्षपात के आरोपों को आधारहीन बताते हुए उन्होंने संकेत दिया था कि पार्टी का आंतरिक मंच ही ऐसे विषयों पर चर्चा के लिए उचित स्थान है, न कि मीडिया और सार्वजनिक मंच। दोनों नेताओं के इस खुले वाकयुद्ध ने दोनों पक्षों के बीच सुलह के सभी रास्तों को लगभग बंद कर दिया था।

पूर्वी राजस्थान में विश्वेंद्र सिंह का प्रभाव और राजनीतिक कद

विश्वेंद्र सिंह केवल एक पूर्व मंत्री ही नहीं, बल्कि राजस्थान की राजनीति के सबसे प्रभावशाली और वरिष्ठ चेहरों में गिने जाते हैं। भरतपुर राजघराने के महाराजा सूरजमल के वंशज होने के नाते उनका प्रभाव न केवल भरतपुर और डीग, बल्कि अलवर, धौलपुर, करौली और दौसा तक के जाट बाहुल्य और गैर-जाट मतदाताओं पर माना जाता है। वह तीन बार सांसद और कई बार विधायक रह चुके हैं तथा पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों में नागरिक उड्डयन और पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण महकमों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

उनका राजनीतिक इतिहास भी काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। पूर्व में वह भारतीय जनता पार्टी और जनता दल से भी जुड़े रहे हैं और अपने बेबाक व आक्रामक तेवरों के लिए जाने जाते हैं। वर्ष 2020 में राजस्थान कांग्रेस में आए बड़े राजनीतिक संकट के दौरान भी वह असंतुष्ट खेमे के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे थे। ऐसे में उनके पार्टी छोड़ने से पूर्वी राजस्थान में कांग्रेस के उस सामाजिक और राजनीतिक आधार को भारी झटका लगा है, जिसने पिछले कई चुनावों में पार्टी को मजबूत बढ़त दिलाई थी।

क्या भाजपा में जाएंगे विश्वेंद्र सिंह? अटकलों का बाजार गर्म

विश्वेंद्र सिंह के त्यागपत्र के तुरंत बाद यह कयास तेजी से लगाए जाने लगे हैं कि उनका अगला राजनीतिक कदम क्या होगा। राज्य के सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि वह शीघ्र ही भारतीय जनता पार्टी में वापसी कर सकते हैं। चूंकि केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकार है और पूर्वी राजस्थान में भाजपा लंबे समय से एक सर्वमान्य और कद्दावर जाट नेतृत्व की तलाश में रही है, ऐसे में विश्वेंद्र सिंह की संभावित एंट्री दोनों पक्षों के लिए रणनीतिक रूप से मुफीद मानी जा रही है।

हालांकि, खुद विश्वेंद्र सिंह या उनके करीबी सूत्रों ने अभी तक भाजपा या किसी अन्य दल में शामिल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। उनके समर्थकों का कहना है कि पूर्व मंत्री पहले अपने सभी कार्यकर्ताओं, पंच-पटेलों और क्षेत्रीय समर्थकों के साथ एक बड़ी महापंचायत या सम्मेलन करेंगे और जनभावनाओं के आधार पर ही अपने राजनीतिक भविष्य का अंतिम फैसला लेंगे।

निकाय चुनाव के बाद राजस्थान कांग्रेस में बढ़ती अंतर्कलह

विश्वेंद्र सिंह का यह इस्तीफा राजस्थान कांग्रेस में किसी अकेली घटना के रूप में नहीं देखा जा रहा है। हालिया शहरी निकाय चुनाव परिणामों के बाद राजधानी जयपुर, भीलवाड़ा, जोधपुर और कोटा सहित कई जिलों से पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों और पूर्व विधायकों के बीच तीखी बयानबाजी सामने आई है। कई स्थानों पर चुनाव में भीतरघात और टिकट बेचने के खुले आरोप लगाए जा रहे हैं।

विधानसभा चुनाव में हार के बाद से ही कांग्रेस संगठन को नए सिरे से एकजुट करने के प्रयासों में जुटी थी, किंतु निकाय चुनाव के परिणामों ने असंतोष की दबी हुई चिंगारी को हवा दे दी है। विश्वेंद्र सिंह जैसे वरिष्ठ नेता का इस तरह खुलकर बाहर निकलना यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर शीर्ष नेतृत्व और असंतुष्ट गुटों के बीच संवाद पूरी तरह टूट चुका है, जिसे समय रहते न संभाला गया तो अन्य जिलों में भी इस्तीफों का सिलसिला शुरू हो सकता है।

Vishvendra Singh Resigns: पूर्वी राजस्थान में कांग्रेस के सामने अस्तित्व का संकट

विश्वेंद्र सिंह का कांग्रेस से इस्तीफा केवल एक नेता का पार्टी छोड़ना नहीं है, बल्कि यह पूर्वी राजस्थान के पूरे चुनावी समीकरण को नए सिरे से परिभाषित करने वाला घटनाक्रम है। जहां विश्वेंद्र सिंह ने अपने स्वाभिमान और कार्यकर्ताओं के सम्मान की दुहाई देकर एक स्वतंत्र और आक्रामक राह चुन ली है, वहीं कांग्रेस आलाकमान के सामने अब डोटासरा के नेतृत्व का बचाव करने के साथ-साथ भरतपुर क्षेत्र में पार्टी संगठन को बिखरने से बचाने की दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है।

आने वाले दिनों में यदि विश्वेंद्र सिंह अपने हजारों समर्थकों के साथ भाजपा का दामन थामते हैं या कोई स्वतंत्र मोर्चा बनाते हैं, तो यह राजस्थान में कांग्रेस के पारंपरिक जनाधार में एक बहुत बड़ी सेंध साबित होगी। अब समूचे प्रदेश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विश्वेंद्र सिंह अपने अगले कदम का औपचारिक ऐलान कब करते हैं और कांग्रेस हाईकमान इस अप्रत्याशित झटके से कैसे निपटता है।

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