Stock Market Today: गांधी जयंती पर शेयर बाजार बंद, 5 अक्टूबर को खुलेगा NSE-BSE; जानें 1 अक्टूबर का हाल
गांधी जयंती पर NSE-BSE में कारोबार बंद, 1 अक्टूबर को सेंसेक्स 570 और निफ्टी 198 अंक टूटा
Stock Market Today: राष्ट्रीय पर्व महात्मा गांधी जयंती के पावन अवसर पर आज शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में किसी भी प्रकार की नियमित व्यापारिक गतिविधि संचालित नहीं होगी। देश के दोनों प्रमुख एक्सचेंज—बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE)—ट्रेडिंग हॉलिडे के कारण पूरी तरह बंद रहेंगे। शुक्रवार के आधिकारिक अवकाश के बाद शनिवार और रविवार का नियमित साप्ताहिक अवकाश होने के कारण वित्तीय बाजारों में लगातार तीन दिनों का लंबा अवकाश रहेगा। अब दलाल स्ट्रीट पर अगला नियमित कारोबारी सत्र सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को अपने तय समय सुबह 9:15 बजे से पुनः शुरू होगा।
छुट्टी के इस माहौल के बीच निवेशकों और बाजार विश्लेषकों की निगाहें पिछले सत्र यानी 1 अक्टूबर को दर्ज की गई भारी गिरावट और उसके तकनीकी प्रभावों पर टिकी हुई हैं। अवकाश से ठीक पहले गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव और बिकवाली का दौर देखने को मिला था, जिसके चलते प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लगातार चौथे कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुए थे।
Stock Market Today: 2 अक्टूबर को शेयर बाजार में अवकाश
एक्सचेंजों द्वारा जारी आधिकारिक हॉलिडे कैलेंडर के अनुसार, 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय अवकाश घोषित है। इस दौरान इक्विटी कैश सेगमेंट, इक्विटी डेरिवेटिव्स, सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (SLB) और करेंसी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में कोई कामकाज नहीं होगा। इसके अतिरिक्त मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) और नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) पर भी सुबह और शाम दोनों सत्रों का कारोबार पूरी तरह स्थगित रखा गया है।
तीन दिनों के इस लंबे अंतराल के बाद सोमवार, 5 अक्टूबर को बाजार अपनी सामान्य दिनचर्या में लौटेगा। सुबह 9:00 बजे से 9:15 बजे तक 15 मिनट का प्री-ओपनिंग सत्र आयोजित होगा, जिसके बाद 9:15 बजे से नियमित खरीद-फरोख्त आरंभ होकर अपराह्न 3:30 बजे समाप्त होगी। तीन दिनों तक बाजार बंद रहने के कारण निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रमों, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दामों और अमेरिकी बाजार के रुझानों का आकलन करने का पर्याप्त समय मिलेगा।
1 अक्टूबर के सत्र का लेखा-जोखा: सेंसेक्स 570 और निफ्टी 198 अंक टूटा
छुट्टी से पूर्व गुरुवार, 1 अक्टूबर का कारोबारी सत्र भारतीय निवेशकों के लिए काफी निराशाजनक और उथल-पुथल भरा रहा। सुबह बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली शुरू हो गई, जिससे सूचकांक तेजी से गोता लगाने लगे। कारोबार के दौरान एक समय 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,187.41 अंक टूटकर 71,292.88 के अंतर-दिवसीय निचले स्तर तक जा गिरा था। यद्यपि अंतिम कारोबारी घंटे में कुछ चुनिंदा दिग्गज शेयरों में आई शॉर्ट कवरिंग और घरेलू फंड्स की खरीदारी से सूचकांकों ने अपने निचले स्तरों से लगभग 600 अंकों की सम्मानजनक रिकवरी दिखाई, किंतु फिर भी बाजार भारी नुकसान से बच नहीं सका।
दिन के अंत में बीएसई सेंसेक्स 570.59 अंक अथवा 0.79 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71,909.70 के स्तर पर बंद हुआ। इसी प्रकार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक निफ्टी 50 दिन के निचले स्तर 22,217.30 तक लुढ़कने के बाद अंततः 198.50 अंक यानी 0.88 प्रतिशत के नुकसान के साथ 22,421.95 के स्तर पर सिमट गया।
लगातार चौथे दिन बिकवाली: आठवें साप्ताहिक नुकसान की ऐतिहासिक श्रृंखला
गुरुवार को आई गिरावट भारतीय बाजारों के लिए लगातार चौथा ऐसा कारोबारी दिन था जब सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुए। साप्ताहिक आधार पर स्थिति और भी अधिक चिंताजनक नजर आई। इस छोटे कारोबारी सप्ताह में सेंसेक्स में लगभग 2.7 प्रतिशत और निफ्टी में करीब 3 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई।
बाजार के ऐतिहासिक आंकड़ों का विश्लेषण करने वाले विश्लेषकों के अनुसार, प्रमुख सूचकांकों के लिए यह लगातार आठवां ऐसा सप्ताह रहा जिसमें साप्ताहिक आधार पर शुद्ध नुकसान दर्ज हुआ है। हाल के वर्षों में भारतीय इक्विटी बाजार में इतनी लंबी और निरंतर साप्ताहिक गिरावट की श्रृंखला अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है। लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी लगभग 1.5 से 2 प्रतिशत तक टूटे, जिससे बाजार की चौड़ाई (Market Breadth) अत्यधिक कमजोर रही और बिकने वाले शेयरों की संख्या चढ़ने वाले शेयरों के मुकाबले कहीं अधिक रही।
बाजार पर दबाव बनाने वाले प्रमुख वैश्विक और घरेलू कारक
गुरुवार के सत्र में बाजार में आई तेज गिरावट के पीछे किसी एक कारक की भूमिका नहीं थी, बल्कि कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रतिकूल परिस्थितियां एक साथ सक्रिय रहीं। सबसे बड़ा दबाव विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs/FPIs) की निरंतर और आक्रामक बिकवाली से बना हुआ है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में लंबे समय तक कटौती न करने के संकेतों के बीच अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई तेजी ने विदेशी पूंजी को भारतीय इक्विटी से बाहर खींचने का काम किया है।
इसके अलावा मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल के भाव ऊंचे स्तरों पर बने हुए हैं, जिससे भारत के व्यापार घाटे और घरेलू मुद्रास्फीति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। उपलब्ध साप्ताहिक आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों (FPI) ने इस सप्ताह लगभग 33,882 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 33,455 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी कर बाजार को किसी बड़ी अनहोनी या फ्री-फॉल से बचाने में महत्वपूर्ण सहारा दिया।
रुपये की ऐतिहासिक कमजोरी और कच्चे तेल की मार
भारतीय शेयर बाजार के सेंटीमेंट को कमजोर करने में घरेलू मुद्रा का अवमूल्यन सबसे संवेदनशील पहलू साबित हुआ है। 1 अक्टूबर को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 50 पैसे की भारी गिरावट के साथ 96.32 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि पिछले कारोबारी दिन यह 95.82 के स्तर पर था। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में आई निरंतर मजबूती और कच्चे तेल के आयात बिल के भुगतान के लिए डॉलर की बढ़ती मांग ने रुपये को अत्यधिक दबाव में डाल दिया है।
भारत अपनी कुल पेट्रोलियम आवश्यकताओं का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में रुपये के कमजोर होने और कच्चे तेल के महंगे होने का दोहरा प्रभाव आयातित मुद्रास्फीति (Imported Inflation) को बढ़ाता है। इससे कंपनियों की इनपुट लागत बढ़ती है और उनके परिचालन लाभ मार्जिन (Operating Margins) पर प्रतिकूल असर पड़ता है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार की आय वृद्धि (Earnings Growth) के अनुमानों पर दिखाई देने लगा है।
कमजोर बाजार में आईटी शेयरों का सहारा: इंफोसिस और टीसीएस चमके
गुरुवार के निराशाजनक बाजार में इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर अकेला ऐसा मजबूत स्तंभ बनकर उभरा, जिसने सूचकांकों को और नीचे गिरने से रोके रखा। एनएसई का निफ्टी आईटी इंडेक्स लगभग 2 प्रतिशत की शानदार बढ़त के साथ बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में आने वाली गिरावट भारतीय आईटी कंपनियों के लिए सीधे तौर पर वित्तीय लाभ लेकर आती है, क्योंकि इन कंपनियों का 60 से 70 प्रतिशत से अधिक राजस्व अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों से डॉलर में आता है।
सत्र के दौरान दिग्गज आईटी कंपनी इंफोसिस (Infosys) 4.11 प्रतिशत की शानदार तेजी के साथ निफ्टी का टॉप गेनर रहा। इसके साथ ही देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी टीसीएस (TCS) में भी मजबूती दर्ज की गई। आईटी के अलावा बीमा और चुनिंदा बैंकिंग शेयरों जैसे एचडीएफसी लाइफ (HDFC Life), एसबीआई लाइफ (SBI Life) और एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) ने भी विपरीत परिस्थितियों में सकारात्मक प्रदर्शन कर बाजार को नीचे से सहारा प्रदान किया।
Stock Market Today: ऑटो, मेटल और रियल्टी सेक्टर में मची भगदड़
इसके विपरीत ऑटोमोबाइल और मेटल सेक्टर बिकवाली के सबसे बड़े केंद्र साबित हुए। निफ्टी ऑटो इंडेक्स में 3.46 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। सितंबर महीने के ऑटो बिक्री आंकड़ों के सामने आने के बाद बाजार की अपेक्षाएं पूरी न होने के कारण निवेशकों ने ऑटो शेयरों में जमकर मुनाफावसूली की। बजाज ऑटो, मारुति सुजुकी और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में 3 से 5 प्रतिशत तक की भारी गिरावट देखने को मिली।
कमोडिटी और रियल एस्टेट सेक्टर भी इस तेज बिकवाली की चपेट में रहे। निफ्टी मेटल इंडेक्स 2.35 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी 1.61 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 1.46 प्रतिशत का गोता लगाकर बंद हुआ। इसके साथ ही मीडिया, इंफ्रास्ट्रक्चर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टरों में भी मंदड़ियों का दबदबा पूरी तरह कायम रहा, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि गुरुवार की मंदी अर्थव्यवस्था के लगभग सभी बुनियादी क्षेत्रों में फैली हुई थी।
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