UPSC 100 Years History: 1926 में बनी संस्था ने तय किया पब्लिक सर्विस कमीशन से लेकर आईएएस-आईपीएस चयन तक का सफर

UPSC 100 Years History: 1926 में बनी संस्था ने तय किया पब्लिक सर्विस कमीशन से लेकर आईएएस-आईपीएस चयन तक का सफर

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UPSC 100 Years History: देश के लाखों युवाओं को आईएएस और आईपीएस बनने का सपना दिखाने वाले संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी ने 1 अक्टूबर 2026 को अपने 100 साल पूरे कर लिए हैं। यूपीएससी के 100 साल का यह पड़ाव उस संस्था की कहानी याद दिलाता है, जिसकी नींव 1 अक्टूबर 1926 को अंग्रेजी हुकूमत के दौर में रखी गई थी। तब इसे पब्लिक सर्विस कमीशन कहा जाता था।

समय के साथ इसका नाम और स्वरूप बदला। 1937 में यह फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन बना और 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के साथ इसे यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन का मौजूदा नाम मिला। आज यह केंद्र सरकार के बड़े पदों के लिए सिविल सेवा परीक्षा कराने के साथ भर्ती, नियुक्ति नियमों, पदोन्नति और अनुशासन से जुड़े मामलों में भी सलाह देता है।

UPSC 100 Years History: मुखर्जी नगर से गांव तक यूपीएससी का सपना

दिल्ली का मुखर्जी नगर हो या किसी छोटे गांव का साधारण कमरा, रात दो बजे तक जागकर पढ़ रहे युवा की आंखों में अक्सर एक ही नाम होता है, यूपीएससी। लाखों नौजवानों के लिए यह सिर्फ परीक्षा कराने वाली सरकारी संस्था नहीं है। यह एक ऐसा लक्ष्य है, जिसके लिए कई लोग अपनी जवानी के कई साल किताबों को दे देते हैं।

इसी वजह से इस संस्था का सौ साल पूरा करना केवल एक प्रशासनिक पड़ाव नहीं माना जा रहा। यह उन असंख्य अभ्यर्थियों की उम्मीदों से भी जुड़ा है, जो हर साल इसकी परीक्षा की तैयारी में जुटते हैं। हालांकि उपलब्ध जानकारी में अभ्यर्थियों की संख्या या सफलता दर जैसे आंकड़े नहीं दिए गए हैं।

1 अक्टूबर 1926: अंग्रेजों के दौर में पड़ी नींव

इस संस्था की कहानी ठीक एक सदी पहले, 1 अक्टूबर 1926 से शुरू होती है। उस समय देश पर अंग्रेजों का शासन था और प्रशासन में भारतीयों की हिस्सेदारी बहुत कम थी। इसी दौर में भारत में पहली बार पब्लिक सर्विस कमीशन की स्थापना की गई।

इसके पहले चेयरमैन सर रॉस बार्कर बनाए गए। वे यूनाइटेड किंगडम की होम सिविल सर्विस के अनुभवी सदस्य थे। उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि ब्रिटिश हुकूमत में बना यह कमीशन आगे चलकर आजाद भारत की सबसे मजबूत और निष्पक्ष संस्थाओं में गिना जाएगा।

1937 में फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन

शुरुआत में इसे केवल पब्लिक सर्विस कमीशन कहा जाता था। फिर 1937 में अंग्रेजी सरकार ने कुछ बदलाव किए और इसका नाम बदलकर फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन कर दिया गया। यह इस संस्था की पहचान में आया पहला बड़ा बदलाव था।

इन बदलावों के बारे में उपलब्ध जानकारी में इससे ज्यादा ब्योरा नहीं है। यानी 1937 के संशोधनों का स्वरूप क्या था, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। फिर भी इतना साफ है कि संस्था का ढांचा आजादी से पहले ही आकार लेने लगा था।

26 जनवरी 1950: मिला यूपीएससी नाम

असली बदलाव 26 जनवरी 1950 को आया। इसी दिन भारत का संविधान लागू हुआ और देश पूरी तरह गणतंत्र बना। इसी के साथ संस्था को वह स्थायी नाम मिला, जो आज हर सिविल सेवा अभ्यर्थी की जुबान पर रहता है, यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन।

इस तरह एक औपनिवेशिक दौर में बनी संस्था को लोकतांत्रिक भारत की जरूरतों के मुताबिक नया रूप मिला। नाम के साथ-साथ इसकी जिम्मेदारी भी संवैधानिक ढांचे के भीतर तय हुई। यही बदलाव इसे आज की पहचान तक लेकर आया।

सिर्फ परीक्षा नहीं, इतनी हैं जिम्मेदारियां

यूपीएससी का नाम आते ही ज्यादातर लोगों को सिविल सेवा परीक्षा याद आती है। बेशक केंद्र सरकार के अलग-अलग अहम पदों के लिए कठिन परीक्षाएं कराना इसका सबसे बड़ा काम है। लेकिन इसकी भूमिका यहीं खत्म नहीं होती।

संविधान के मुताबिक यह आयोग सरकार को भर्ती के सही तरीकों पर सलाह देता है। साथ ही अफसरों की नियुक्ति के नियम तय करने, उनकी पदोन्नति और अनुशासन से जुड़े जटिल मामलों में मार्गदर्शन देने में भी इसकी अहम भूमिका है।

संविधान के भाग 14 में आयोग की आजादी का ढांचा

संविधान के भाग 14 में अनुच्छेद 315 से 323 तक लोक सेवा आयोग से जुड़े प्रावधान दर्ज हैं। इनमें आयोग के नियमों, उसकी शक्तियों और उसकी स्वतंत्रता की रूपरेखा तय की गई है। इसी संवैधानिक व्यवस्था को संस्था की मजबूती का आधार बताया जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार इसी ढांचे की बदौलत अब तक आयोग की साख और ईमानदारी पर कोई आंच नहीं आई है। हालांकि विभिन्न परीक्षाओं को लेकर समय-समय पर उठे सवालों या विवादों का ब्योरा उपलब्ध जानकारी में नहीं है। इसलिए यहां केवल संवैधानिक ढांचे का उल्लेख किया जा रहा है।

सौ साल का सफर और आगे की राह

सौ साल पूरे होने का यह मौका सिर्फ एक नाम के सफर का जश्न नहीं है। यह उस संस्था के वजूद का उत्सव है, जो 1926 में बनी और समय के साथ खुद को एक लोकतांत्रिक देश के सांचे में ढालती गई। आज यह करोड़ों उम्मीदों का केंद्र बनी हुई है।

आगे इस संस्था की योजनाओं या नए सुधारों को लेकर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। फिलहाल शताब्दी का यह पड़ाव इतिहास को याद करने का अवसर है। उम्मीदवारों के लिए यह इस बात की याद भी है कि उनका सपना एक सदी पुरानी संस्थागत परंपरा से जुड़ा है।

संघ लोक सेवा आयोग ने 1 अक्टूबर 2026 को अपने 100 साल पूरे किए। 1 अक्टूबर 1926 को पब्लिक सर्विस कमीशन के रूप में बनी इस संस्था के पहले चेयरमैन सर रॉस बार्कर थे। 1937 में यह फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन बना और 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने पर इसे यूपीएससी नाम मिला। यह सिविल सेवा परीक्षा के साथ भर्ती, नियुक्ति नियमों, पदोन्नति और अनुशासन पर सलाह देता है। संविधान के अनुच्छेद 315 से 323 इसकी स्वतंत्रता का ढांचा तय करते हैं।

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