Viparita Karani Yoga: ऑफिस से घर लौटने के बाद सिर्फ 5 मिनट करें यह योगासन

ऑफिस की थकान और मानसिक तनाव के बाद विपरीत करणी आसन शरीर को आराम देने और सोने से पहले मन को शांत करने में मदद कर सकता है। जानें सही विधि और सावधानियां।

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Viparita Karani Yoga: दिनभर दफ्तर में कुर्सी पर घंटों बैठे रहने, कंप्यूटर और लैपटॉप स्क्रीन पर निरंतर नजरें गड़ाए रखने और काम की आपाधापी के बीच शाम ढलते-ढलते शरीर भारी थकान और जकड़न से भर जाता है। घर लौटने के बाद भी मस्तिष्क में ईमेल्स, डेडलाइंस और ऑफिस की बातचीत घूमती रहती है, जिससे शरीर आराम की स्थिति में नहीं आ पाता और रात में समय पर सुकून भरी नींद लेना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। इस मानसिक और शारीरिक तनाव से मुक्ति पाने के लिए योग शास्त्र में ‘विपरीत करणी आसन’ यानी ‘लेग्स अप द वॉल पोज’ (Legs-Up-the-Wall Pose) को सबसे सहज और प्रभावी रिलैक्सेशन अभ्यास माना गया है। दीवार के सहारे पीठ के बल लेटकर मात्र पांच से दस मिनट तक किया जाने वाला यह अर्ध-उलटा (माइल्ड इन्वर्जन) आसन तंत्रिका तंत्र को शांत करने और शरीर को गहरी नींद के लिए तैयार करने में अद्भुत भूमिका निभाता है।

Viparita Karani Yoga: क्या है विपरीत करणी आसन और आधुनिक जीवन में क्यों है बेहद खास?

संस्कृत में ‘विपरीत’ का अर्थ उल्टा और ‘करणी’ का अर्थ क्रिया या प्रक्रिया होता है, यानी एक ऐसी मुद्रा जिसमें शरीर की सामान्य गुरुत्वाकर्षण स्थिति को उलट दिया जाता है। इस आसन की सबसे बड़ी विशेषता इसका निष्क्रिय और पूरी तरह समर्थित (पैसिव एंड रेस्टोरेटिव) स्वरूप है। इसमें साधक को शीर्षासन या सर्वांगासन की तरह शरीर का भारी संतुलन बनाने या अत्यधिक शारीरिक ताकत लगाने की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि दीवार का सहारा लेकर पैर ऊपर सीधे टिकाए जाते हैं।

प्रतिष्ठित चिकित्सा केंद्र क्लीवलैंड क्लिनिक के शोध के अनुसार, दिनभर बैठने या खड़े रहने के कारण गुरुत्वाकर्षण बल निचले अंगों में रक्त और लिम्फैटिक तरल पदार्थों को जमा करने लगता है, जिससे टखनों और पिंडलियों में सूजन व भारीपन आ जाता है। जब पैरों को दीवार के सहारे ऊपर उठाया जाता है, तो रक्त का प्रवाह स्वाभाविक रूप से हृदय और मस्तिष्क की ओर लौटने लगता है। यह प्रक्रिया न केवल थकी हुई नसों को राहत देती है बल्कि पूरे शरीर में एक सुखद हल्कापन भी पैदा करती है। हालांकि, इसे अनिद्रा का कोई चमत्कारी इलाज मानने के बजाय एक शांत जीवनशैली का हिस्सा समझना चाहिए।

दफ्तर की थकान मिटाने और तंत्रिका तंत्र को शांत करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया

लगातार काम और तनाव के माहौल में रहने से मानव शरीर का स्वायत्त तंत्रिका तंत्र ‘फाइट ऑर फ्लाइट’ (सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम) मोड में फंसा रहता है, जिससे कोर्टिसोल का स्तर बढ़ा रहता है और हृदय गति तेज बनी रहती है। विपरीत करणी आसन शरीर के पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम (रेस्ट एंड डाइजेस्ट मोड) को तुरंत सक्रिय कर देता है।

पैरों को ऊपर रखकर धीमी और गहरी सांसें लेने से वेगस नर्व (Vagus Nerve) उत्तेजित होती है, जिससे हृदय गति सामान्य होती है और रक्तचाप नियंत्रित होने लगता है। पीठ, कूल्हों और हैमस्ट्रिंग की जकड़ी हुई मांसपेशियों को दीवार के सहारे पूरा खिंचाव मिलता है, जिससे रीढ़ की हड्डी पर दिनभर का बना हुआ दबाव कम हो जाता है। मस्तिष्क की ओर ऑक्सीजन युक्त रक्त का प्रवाह बढ़ने से दिनभर का मानसिक कोलाहल शांत होने लगता है और मन स्वतः ही नींद की ओर अग्रसर होने के लिए तैयार हो जाता है।

विपरीत करणी आसन करने की सही विधि और अभ्यास का तरीका

इस आसन को करने के लिए घर के किसी शांत कोने में दीवार के पास एक योग मैट या नरम कंबल बिछा लें। दीवार के ठीक पास अपनी एक करवट पर बैठ जाएं, जिसमें आपका एक कूल्हा दीवार को छू रहा हो। इसके बाद धीरे से एक तरफ झुकते हुए अपनी पीठ को जमीन पर टिकाएं और उसी गति में दोनों पैरों को दीवार के सहारे ऊपर की ओर सीधा फैला दें। शरीर का निचला हिस्सा (कूल्हे) दीवार के जितना संभव हो उतना करीब होना चाहिए, हालांकि आराम के लिए दीवार से कुछ इंच की दूरी भी रखी जा सकती है। यदि निचली पीठ में तनाव महसूस हो, तो कमर के नीचे एक छोटा तकिया या मुड़ा हुआ तौलिया सहारा देने के लिए लगाया जा सकता है।

अपने दोनों हाथों को शरीर से थोड़ी दूरी पर हथेलियां ऊपर की ओर रखते हुए फैला दें, और कंधों व गर्दन को पूरी तरह ढीला छोड़ दें। अपनी आंखें बंद कर लें और सांसों की प्राकृतिक गति पर ध्यान केंद्रित करें। नाक से धीमी, गहरी सांस अंदर लें और उसी गति से बाहर छोड़ें। शुरुआत में इस स्थिति में तीन से पांच मिनट तक रुकें और शरीर सहज रहने पर इसे दस मिनट तक बढ़ाया जा सकता है। आसन से बाहर आने के लिए कभी भी झटके से न उठें, बल्कि घुटनों को मोड़कर छाती के पास लाएं, धीरे से दाईं ओर करवट लें और कुछ सेकंड रुकने के बाद हाथों का सहारा लेकर आराम से उठकर बैठें।

किन परिस्थितियों में बरतें विशेष सावधानी और डॉक्टरी परामर्श

यद्यपि विपरीत करणी एक अत्यंत कोमल और सुलभ योगासन है, किंतु कुछ विशिष्ट स्वास्थ्य स्थितियों में इसका अभ्यास करने से पहले सावधानी बरतना अनिवार्य है। ग्लूकोमा (काला मोतिया) या आंखों में आंतरिक दबाव (इंट्राओकुलर प्रेशर) से पीड़ित व्यक्तियों को इस मुद्रा से पूरी तरह बचना चाहिए, क्योंकि उल्टी स्थिति में आंखों की नसों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा, अनियंत्रित उच्च रक्तचाप (हाई बीपी), हृदय संबंधी गंभीर विकार, हर्निया और गंभीर एसिड रिफ्लक्स (GERD) की स्थिति में भी पैरों को बहुत अधिक समय तक ऊपर नहीं रखना चाहिए।

गर्भावस्था के अंतिम महीनों में बिना विशेषज्ञ की निगरानी के पीठ के बल सपाट लेटने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे गर्भाशय का भार मुख्य नसों पर पड़ सकता है। गंभीर साइटिका, रीढ़ की हड्डी में स्लिप डिस्क या हाल ही में हुई किसी भी प्रकार की सर्जरी के मरीजों को डॉक्टर या योग्य योग प्रशिक्षक की अनुमति के बिना यह अभ्यास नहीं करना चाहिए। यदि आसन करते समय किसी भी क्षण चक्कर आना, सांस फूलना या तीव्र दर्द महसूस हो, तो तुरंत सामान्य स्थिति में लौट आना चाहिए।

Viparita Karani Yoga: गहरी और सुकून भरी नींद के लिए संपूर्ण दिनचर्या का समन्वय

विपरीत करणी का लाभ तब और कई गुना बढ़ जाता है जब इसके साथ स्लीप हाइजीन (सोने के स्वस्थ नियमों) का ईमानदारी से पालन किया जाए। शाम के समय अत्यधिक चाय, कॉफी या निकोटिन के सेवन से बचना चाहिए ताकि कैफीन आपकी नींद के चक्र को बाधित न करे। बिस्तर पर जाने से कम से कम पैंतालीस मिनट पहले मोबाइल फोन, टीवी और लैपटॉप की नीली रोशनी (ब्लू लाइट) से दूरी बना लेना मेलाटोनिन हार्मोन के स्राव को सुगम बनाता है।

कमरे के तापमान को सामान्य और वातावरण को पूरी तरह शांत रखें। ऑफिस से लौटने के बाद पांच मिनट का यह योगाभ्यास, उसके बाद हल्का सुपाच्य भोजन और रात में दस मिनट का हल्का ध्यान आपको एक गहरी, निर्बाध और तरोताजा करने वाली नींद की ओर ले जाएगा। यदि उचित जीवनशैली के बाद भी कई हफ्तों तक अनिद्रा बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय किसी योग्य चिकित्सक से जांच कराना आवश्यक है।

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