Vedanta Oil Investment: राजस्थान में तेल उत्पादन बढ़ाएगी वेदांता, ₹2,000 करोड़ का निवेश

मंगला, भाग्यम और ऐश्वर्या फील्ड में EOR तकनीक से उत्पादन बढ़ाने की तैयारी

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Vedanta Oil Investment: भारत की ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू कच्चे तेल के उत्पादन को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में वेदांता समूह ने बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। वेदांता लिमिटेड की ऑयल एंड गैस इकाई (केयर्न ऑयल एंड गैस) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान राजस्थान के बाड़मेर बेसिन में लगभग 200 मिलियन डॉलर यानी करीब 2,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम पूंजीगत व्यय (Capex) करने का खाका तैयार किया है। इस विशाल निवेश का प्राथमिक उद्देश्य राजस्थान के उत्तरी हिस्से में स्थित परिपक्व तेल क्षेत्रों में स्वाभाविक रूप से आ रही उत्पादन गिरावट को रोकना और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से धरती के भीतर फंसे तेल को बाहर निकालना है।

कंपनी की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के केंद्र में बाड़मेर स्थित प्रसिद्ध ‘एमबीए’ यानी मंगला, भाग्यम और ऐश्वर्या ऑयल फील्ड्स हैं। कंपनी उन्नत रिकवरी तकनीकों, पॉलिमर और अल्कलाइन-सर्फेक्टेंट-पॉलिमर (ASP) इंजेक्शन के जरिए इन पुराने क्षेत्रों की उत्पादक उम्र को कई वर्षों तक बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है।

Vedanta Oil Investment: उत्पादन 1.5 लाख बैरल प्रतिदिन ले जाने का लक्ष्य

वेदांता के राजस्थान निवेश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वर्ष 2004 में खोजा गया मंगला ऑयल फील्ड है, जिसने भारत को वैश्विक ऑनशोर तेल मानचित्र पर स्थापित किया था। दो दशकों से अधिक समय से निरंतर उत्पादन देने के बाद इस क्षेत्र के तेल भंडारों में स्वाभाविक दबाव कम हुआ है। वर्तमान में मंगला फील्ड से लगभग 80,000 बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का उत्पादन हो रहा है।

कंपनी ने इस नए निवेश के दम पर मंगला फील्ड के दैनिक उत्पादन को दोगुना करते हुए 1,50,000 (1.5 लाख) बैरल प्रतिदिन के पार पहुंचाने का साहसिक लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए कंपनी पुराने कुओं में री-एंट्री, नए इन्फिल कुओं की खुदाई और दुनिया की सबसे बड़ी रासायनिक ईओआर (Enhanced Oil Recovery) प्रणालियों के विस्तार को प्राथमिकता दे रही है।

भाग्यम और ऐश्वर्या फील्ड्स में भी होगा आधुनिक तकनीकों का विस्तार

राजस्थान ब्लॉक के दो अन्य प्रमुख क्षेत्र—भाग्यम और ऐश्वर्या—भी इस 2,000 करोड़ रुपये की योजना का अभिन्न अंग हैं। इन क्षेत्रों में गाढ़े कच्चे तेल (Heavy Crude) को निकालने के लिए पारंपरिक तरीके अब पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं। कंपनी इन क्षेत्रों में जल और रासायनिक प्रवाह की आधुनिक विधियां लागू कर रही है ताकि भूमिगत चट्टानों में फंसा तेल आसानी से सतह पर आ सके।

तेल और गैस उद्योग के विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी तेल क्षेत्र के परिपक्व होने पर उसमें वार्षिक रूप से 1 से 3 प्रतिशत की स्वाभाविक गिरावट दर्ज की जाती है। यदि समय रहते नई तकनीकों का निवेश न किया जाए तो यह गिरावट 8 से 10 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। वेदांता का यह निवेश कुओं के प्रदर्शन को अनुकूलित कर इस प्राकृतिक गिरावट को बेअसर करने की ठोस रणनीति है।

ईओआर तकनीक का जादू: रिकवरी रेट 41% से बढ़ाकर 60% करने का विजन

पारंपरिक तेल निष्कर्षण विधियों (Primary and Secondary Recovery) के माध्यम से किसी भी भूमिगत भंडार से कुल उपलब्ध तेल का मात्र 25 से 30 प्रतिशत हिस्सा ही बाहर निकाला जा सकता है। शेष 70 प्रतिशत तेल चट्टानों के बारीक छिद्रों में फंसा रह जाता है। वेदांता ऑयल एंड गैस ने बाड़मेर में दुनिया की सबसे बड़ी पॉलिमर फ्लडिंग परियोजना का सफलतापूर्वक संचालन किया है, जिससे इसकी रिकवरी दर पहले ही 41 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

अब कंपनी अल्कलाइन-सर्फेक्टेंट-पॉलिमर (ASP) फ्लडिंग तकनीक का बड़े पैमाने पर विस्तार कर रही है। यह तकनीक चट्टानों के छिद्रों से तेल को अलग करने के लिए सर्फेक्टेंट और पॉलिमर के रासायनिक घोल का उपयोग करती है। कंपनी का लक्ष्य मंगला और आसपास के क्षेत्रों से अंतिम तेल रिकवरी दर को बढ़ाकर 60 प्रतिशत तक ले जाना है। यदि यह तकनीकी प्रयास पूरी तरह सफल रहता है, तो यह वैश्विक पेट्रोलियम उद्योग में किसी भी ऑनशोर परिपक्व फील्ड के लिए एक नया विश्व रिकॉर्ड साबित होगा।

भारत की ऊर्जा खपत और उत्पादन का भारी अंतर: घरेलू आपूर्ति की चुनौती

वेदांता ऑयल एंड गैस के अंतरिम सीईओ और होल टाइम डायरेक्टर जिम जॉनी गैस्ट ने इस रणनीतिक निवेश की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए रेखांकित किया कि भारत का घरेलू कच्चा तेल उत्पादन पिछले कई वर्षों से लगभग 0.87 से 0.99 मिलियन बैरल ऑयल इक्विवेलेंट प्रतिदिन के सीमित दायरे में स्थिर बना हुआ है। इसके विपरीत, देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और औद्योगीकरण के चलते तेल की दैनिक खपत बढ़कर लगभग 5.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन के विशाल स्तर पर पहुंच चुकी है।

इस भारी असंतुलन के कारण भारत को अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विदेशों से आयात करना पड़ता है, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव रहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश को ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करने के लिए केवल नई और अनिश्चित खोजों के भरोसे नहीं बैठा जा सकता, बल्कि जिन क्षेत्रों में भंडार सिद्ध हो चुके हैं, वहां से हर एक बूंद तेल निकालने के लिए आक्रामक पूंजी निवेश करना पहली राष्ट्रीय प्राथमिकता होनी चाहिए।

वेदांता के कुल उत्पादन में राजस्थान का 81% दबदबा

चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) के वित्तीय और परिचालन आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि वेदांता के ऊर्जा कारोबार की जीवनरेखा राजस्थान ही है। पहली तिमाही के दौरान कंपनी का औसत सकल संचालित उत्पादन 77,700 बैरल ऑयल इक्विवेलेंट प्रतिदिन रहा, जिसमें से अकेले राजस्थान ब्लॉक का योगदान 63,100 बैरल प्रतिदिन दर्ज किया गया।

यह आंकड़ा प्रमाणित करता है कि वेदांता के कुल तेल एवं गैस उत्पादन में राजस्थान की हिस्सेदारी लगभग 81 प्रतिशत है। इसी मजबूत उत्पादन और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों के चलते केयर्न ऑयल एंड गैस ने जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर 9 प्रतिशत की राजस्व वृद्धि दर्ज करते हुए 2,507 करोड़ रुपये का कारोबार किया। यही सुदृढ़ वित्तीय स्थिति कंपनी को बाड़मेर में लगातार जोखिम उठाने और नया पूंजीगत व्यय करने की आंतरिक शक्ति प्रदान करती है।

कामेश्वरी-ग्रेबेन में नई गैस खोज और पूर्वोत्तर में विस्तार

वेदांता अपनी रणनीति को केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं रख रही है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ते भारत के कदमों के साथ तालमेल बिठाते हुए प्राकृतिक गैस की खोज को भी गति दे रही है। कंपनी ने बाड़मेर ब्लॉक के अंतर्गत कामेश्वरी-ग्रेबेन (Kameshwari-Graben) क्षेत्र में स्थित ‘काम बीसीपी-1एसटी’ (Kaam BCP-1ST) खोज कुएं से महत्वपूर्ण प्राकृतिक गैस भंडार मिलने की पुष्टि की है। इस गैस खोज का विस्तृत वाणिज्यिक और तकनीकी मूल्यांकन जारी है।

राजस्थान के साथ-साथ वेदांता देश के पूर्वोत्तर राज्यों (असम और त्रिपुरा) को अपने गैस कारोबार के नए क्षेत्रीय केंद्र के रूप में विकसित कर रही है। कंपनी का दीर्घकालिक विजन देश के पूर्वी और पश्चिमी छोरों पर तेल और गैस का एक ऐसा संतुलित पोर्टफोलियो तैयार करना है, जो आगामी दशकों तक राष्ट्रीय ग्रिड को निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित कर सके।

राजस्थान में समूह का ₹1 लाख करोड़ का महा-संकल्प

वेदांता समूह के लिए राजस्थान एक राज्य मात्र न होकर उसका सबसे बड़ा औद्योगिक आधार है। वर्ष 2024 में समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने राजस्थान में विभिन्न क्षेत्रों के अंतर्गत एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के संचयी निवेश की घोषणा की थी। इस महा-योजना में जहां हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (HZL) की स्मेल्टिंग और माइनिंग क्षमता का विस्तार शामिल है, वहीं केयर्न ऑयल एंड गैस के उत्पादन में बढ़ोतरी और 10,000 मेगावाट क्षमता की हरित ऊर्जा (सौर एवं पवन) परियोजनाओं की स्थापना भी जुड़ी हुई है।

बाड़मेर में प्रस्तावित 2,000 करोड़ रुपये का यह तेल निवेश उसी 1 लाख करोड़ रुपये की व्यापक औद्योगिक प्रतिबद्धता का व्यावहारिक क्रियान्वयन है। तेल क्षेत्रों में रिग्स की तैनाती, रासायनिक संयंत्रों के निर्माण, पाइपलाइन विस्तार और इंजीनियरिंग सेवाओं के चलते पश्चिमी राजस्थान में हजारों कुशल व अर्ध-कुशल स्थानीय युवाओं के लिए अप्रत्यक्ष रोजगार और व्यापारिक अवसर पैदा हो रहे हैं।

Vedanta Oil Investment: परिपक्व फील्ड्स में नई तकनीक से ऊर्जा सुरक्षा का मार्ग

बाड़मेर के रेगिस्तान में वेदांता का 2,000 करोड़ रुपये का नया निवेश यह साबित करता है कि परिपक्व और पुराने हो रहे तेल क्षेत्रों को भी सही तकनीक और पूंजी के संयोजन से नई जिंदगी दी जा सकती है। वैश्विक स्तर पर जब कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां ऑनशोर परियोजनाओं से हाथ खींच रही हैं, तब वेदांता का मंगला, भाग्यम और ऐश्वर्या पर यह भरोसा भारतीय हाइड्रोकार्बन सेक्टर में निजी क्षेत्र की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

हालांकि, 60 प्रतिशत रिकवरी दर और 1.5 लाख बैरल प्रतिदिन के लक्ष्य को हासिल करना तकनीकी और भूगर्भीय दृष्टि से एक कठिन चुनौती होगी, किंतु यदि आधुनिक रसायन विज्ञान और डिजिटल ऑयलफील्ड तकनीकों का यह मेल सफल रहता है, तो यह न केवल वेदांता के बहीखातों को मजबूत करेगा, बल्कि आयात पर भारत की निर्भरता को घटाकर देश को आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में एक नया संबल भी प्रदान करेगा।

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