VB-G RAM G Scheme: वीबी-जी राम जी योजना के पहले महीने में ग्रामीण रोजगार में 50% की गिरावट, जुलाई में सिर्फ 7.67 करोड़ मानव दिवस का रोजगार सृजन

नई योजना के पहले महीने में रोजगार सृजन 50% घटा, जुलाई में 7.67 करोड़ मानव दिवस

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VB-G RAM G Scheme: केंद्र सरकार द्वारा 1 जुलाई 2026 से लागू की गई नई ग्रामीण रोजगार योजना ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण’ (VB-G RAM G) के पहले ही महीने में रोजगार सृजन के स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में इस योजना के अंतर्गत केवल 7.67 करोड़ मानव दिवस (Person Days) का रोजगार सृजित हुआ। इसके विपरीत, ठीक एक साल पहले जुलाई 2025 में पूर्ववर्ती मनरेगा (MGNREGA) के तहत 15.33 करोड़ मानव दिवस काम दिया गया था। इस प्रकार, सालाना आधार पर ग्रामीण रोजगार के अवसरों में लगभग 50 प्रतिशत की सीधी कमी देखी गई है।

यह गिरावट ऐसे समय में सामने आई है जब केंद्र सरकार ने करीब दो दशक पुरानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को प्रतिस्थापित कर नई योजना लागू की है। नई व्यवस्था में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों के कानूनी रोजगार की गारंटी दी गई है, जो मनरेगा के 100 दिनों के प्रावधान से 25 दिन अधिक है। इसके बावजूद, योजना के क्रियान्वयन के पहले महीने की तस्वीर काफी चिंताजनक नजर आ रही है।

VB-G RAM G Scheme: मानव दिवस और लाभार्थी परिवारों की संख्या में रिकॉर्ड गिरावट

योजना के आधिकारिक डैशबोर्ड के अनुसार, जुलाई महीने में कुल 7.67 करोड़ मानव दिवस सृजित किए गए, जबकि लाभार्थी परिवारों के आंकड़ों में भी 51.45 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई है। इस वर्ष जुलाई में केवल 68.94 लाख परिवारों ने योजना के तहत काम प्राप्त किया, जबकि जुलाई 2025 में मनरेगा से लाभान्वित होने वाले परिवारों की संख्या 1.42 करोड़ थी।

यह स्थिति पिछले पांच वर्षों के न्यूनतम स्तर को दर्शाती है। यदि पिछले चार वर्षों के जुलाई औसत (1.72 करोड़ परिवार) से तुलना की जाए, तो इस बार काम मांगने वाले परिवारों की औसत संख्या घटकर 40 प्रतिशत से भी कम रह गई है। इसी तरह, इस जुलाई में सृजित हुए कुल मानव दिवस पिछले चार वर्षों के जुलाई औसत (21.56 करोड़ मानव दिवस) का मात्र 35 प्रतिशत ही दर्ज किए गए हैं।

मंत्रालय का स्पष्टीकरण: रिकॉर्ड बजट और सुचारू डिजिटल ट्रांजिशन

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इन आंकड़ों पर अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया है कि 1 जुलाई 2026 से पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में ‘वीबी-जी राम जी’ अधिनियम को सफलतापूर्वक लागू कर दिया गया है। मंत्रालय के अनुसार, पुरानी योजना से नई व्यवस्था में बदलाव पूरी तरह रुकावट-रहित और अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित रहा है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस कार्यक्रम हेतु 95,692 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बजट आवंटित किया है, जो अब तक का सबसे बड़ा बजटीय प्रावधान है।

मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का दावा है कि योजना के तहत काम की मांग करने वाले 98 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। आंतरिक आंकलनों के अनुसार, प्रथम माह में लगभग 9 करोड़ मानव दिवस सृजित हुए हैं। वर्तमान में 1.33 करोड़ से अधिक पंजीकृत मजदूरों को 9 लाख से अधिक सक्रिय कार्यस्थलों पर काम दिया जा रहा है। इसके साथ ही, एनएमएस (NMS) के जरिए फेशियल रिकग्निशन आधारित उपस्थिति दर्ज की जा रही है। कुल सृजित मानव दिवसों में महिलाओं की भागीदारी लगभग 63 प्रतिशत रही है, जो न्यूनतम वैधानिक सीमा से काफी अधिक है।

मानसून की अनिश्चितता और कृषि मौसम का प्रभाव

मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, देश के 741 जिलों में से लगभग 50 प्रतिशत जिलों में 1 जून से 3 अगस्त के बीच सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। आमतौर पर कमजोर मानसून के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में अकुशल श्रमिकों के लिए रोजगार गारंटी योजनाएं जीवन रेखा का कार्य करती हैं। हालांकि, केंद्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक खरीफ फसलों की बुवाई का दायरा 894.22 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि (920.72 लाख हेक्टेयर) से कम है।

रोजगार सृजन में आई इस कमी का एक बड़ा कारण नई योजना के वे नियम हो सकते हैं जिनके तहत कृषि के व्यस्त मौसम (बुवाई और कटाई) के दौरान वर्ष में अधिकतम 60 दिनों तक योजना के तहत कार्यों को स्थगित रखने का प्रावधान है। राज्य सरकारें अपनी स्थानीय मौसमी और कृषि परिस्थितियों के अनुसार इन अवधियों को अधिसूचित कर रही हैं। बुवाई के मौसम में काम स्थगित रहने से भी जुलाई माह के रोजगार आंकड़ों पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

VB-G RAM G Scheme: तकनीकी बदलाव, शुरुआती चुनौतियां और आगे का परिदृश्य

वीबी-जी राम जी योजना में बायोमेट्रिक हाजिरी, जीपीएस मैपिंग और डिजिटल निगरानी जैसे कई कड़े तकनीकी मानक जोड़े गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि योजना के शुरुआती चरण में प्रशासनिक तालमेल की कमी, नए सॉफ्टवेयर को अपनाने में आ रही तकनीकी अड़चनें और जमीनी स्तर पर व्यापक जागरूकता का अभाव भी रोजगार सृजन की रफ्तार धीमी होने के प्रमुख कारण हो सकते हैं।

हालांकि, सरकार का दावा है कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लगातार क्षेत्रीय दौरे किए जा रहे हैं और राज्यों के साथ निरंतर समीक्षा बैठकों के जरिए कमियों को दूर किया जा रहा है। आने वाले महीनों में जब मानसून का असर कम होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि गतिविधियां सामान्य होंगी, तब इस योजना के वास्तविक प्रदर्शन और दीर्घकालिक प्रभावों का सटीक आकलन हो सकेगा। फिलहाल, क्रियान्वयन के पहले महीने के आंकड़े नीति निर्माताओं के लिए जमीनी स्तर पर सुधार करने का स्पष्ट संकेत दे रहे हैं।

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