UP Rain Havoc: उत्तर प्रदेश में बारिश-तूफान से 56 लोगों की मौत, 46 घायल; सीतापुर में सबसे ज्यादा जनहानि
सीतापुर में 7 मौतें, 1,021 मकान क्षतिग्रस्त; 56 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
UP Rain Havoc: उत्तर प्रदेश में मौसम के बदले मिजाज और बीते 60 घंटों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश, तेज आंधी और आकाशीय बिजली (वज्रपात) ने समूचे राज्य में भारी तबाही मचाई है। अवध, रुहेलखंड और पूर्वांचल के अधिकांश जनपदों में अप्रत्याशित वर्षा के चलते जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा रविवार को जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्राकृतिक आपदा से जुड़ी विभिन्न घटनाओं में अब तक 56 नागरिकों की असामयिक मृत्यु हो चुकी है, जबकि 46 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके अतिरिक्त 107 मवेशियों की अकाल मौत हुई है और 1,000 से अधिक रिहायशी मकान पूरी तरह या आंशिक रूप से ढह गए हैं। इस भीषण प्राकृतिक विभीषिका में सर्वाधिक जनहानि सीतापुर जिले में दर्ज की गई है, जहां मकान गिरने और बिजली की चपेट में आने से 7 लोगों की मौत हो गई।
प्रदेश के कुल 75 जिलों में से 56 जिलों में सामान्य से कई गुना अधिक बारिश दर्ज की गई है। अत्यधिक जलभराव, कच्ची दीवारों के ढहने, पेड़ों और बिजली के खंभों के उखड़ने से शहरों से लेकर सुदूर ग्रामीण अंचलों तक हाहाकार मचा हुआ है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन और प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों को 24 घंटे फील्ड में डटे रहने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया है कि फसलों के व्यापक नुकसान का तत्काल सर्वेक्षण कर किसानों को मुआवजा वितरित किया जाए और पीड़ितों तक हरसंभव वित्तीय व चिकित्सीय सहायता अविलंब पहुंचाई जाए।
UP Rain Havoc: मध्य और पूर्वी यूपी में सबसे ज्यादा तबाही
राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक के उपरांत विस्तृत आंकड़े साझा करते हुए बताया कि अतिवृष्टि और चक्रवाती तूफान के चलते 56 मौतों की पुष्टि हुई है। जिलेवार विवरण के अनुसार सीतापुर में सर्वाधिक 7 लोगों की दुखद मृत्यु हुई। इसके अलावा तराई के लखीमपुर खीरी में 5, बहराइच में 5 और बलरामपुर में 5 लोगों ने अपनी जान गंवाई। वहीं धार्मिक नगरी अयोध्या में 4 और मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र गोरखपुर में 4 नागरिकों की मौत दर्ज की गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि मध्य उत्तर प्रदेश और घाघरा-राप्ती बेसिन से जुड़े तराई के जिले इस आपदा से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
घायलों के आंकड़े भी प्रशासनिक चिंता को बढ़ा रहे हैं। अब तक कुल 46 लोग विभिन्न दुर्घटनाओं में घायल हुए हैं, जिनमें हरदोई में 7, मैनपुरी में 5, श्रावस्ती में 5, बाराबंकी में 5 तथा सीतापुर व लखीमपुर खीरी में 3-3 लोग शामिल हैं। जिलाधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं कि सभी घायलों को नजदीकी मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में भर्ती कराकर उच्चस्तरीय व निःशुल्क चिकित्सीय उपचार सुनिश्चित किया जाए।
1,021 मकान जमींदोज: हरदोई में 272 घर तबाह, फसलें जलमग्न
तूफानी हवाओं और अनवरत जलप्रपात के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे मकानों और छप्परों को अपार क्षति पहुंची है। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश भर में कुल 1,021 मकान क्षतिग्रस्त होकर मलबे में तब्दील हो गए हैं। आवास क्षति के मामले में हरदोई जनपद सबसे आगे रहा, जहां सर्वाधिक 272 मकान क्षतिग्रस्त हुए। इसके अतिरिक्त सीतापुर में 108, चंदौली में 75, औरैया में 60, गोंडा में 54, हमीरपुर में 51, शाहजहांपुर में 47 और बहराइच में 44 मकान ढहने की पुष्टि हुई है। सैकड़ों परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए हैं, जिनके लिए प्रशासन द्वारा अस्थाई राहत शिविरों और तिरपालों का वितरण कराया जा रहा है।
खरीफ की मुख्य फसलों, विशेषकर खेतों में पककर तैयार खड़ी धान, मक्का, बाजरा, तिलहन और सब्जियों की खेती को इस बेमौसम अतिवृष्टि ने भारी नुकसान पहुंचाया है। खेतों में 2 से 3 फीट तक पानी भर जाने से फसलें बिछ गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीमों को निर्देश दिया है कि बिना किसी शिथिलता के स्थलीय निरीक्षण कर क्षति का डिजिटल आकलन पूरा किया जाए। शासन ने स्पष्ट किया है कि जिन परिवारों के मकान पूरी तरह नष्ट हुए हैं, उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना और राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) के तहत तत्काल वित्तीय सहायता राशि अंतरित की जाए।
प्रशासनिक तंत्र अलर्ट पर: हेल्पलाइन नंबर 1070 चौबीसों घंटे सक्रिय
आपदा की भयावहता को देखते हुए राहत आयुक्त ने समस्त जिलाधिकारियों, मुख्य विकास अधिकारियों (CDO) और पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राहत एवं बचाव अभियानों की गहन समीक्षा की। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जलभराव वाले इलाकों का व्यक्तिगत दौरा करें और राहत सामग्री—जैसे सूखे राशन के पैकेट, शुद्ध पेयजल और जीवनरक्षक दवाइयां—का वितरण सुनिश्चित करें। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की नौकाओं को बाढ़ प्रभावित निचली बस्तियों में तैनात किया गया है ताकि फंसे हुए ग्रामीणों को सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर ले जाया जा सके।
राज्य सरकार ने आम नागरिकों की तत्काल सहायता के लिए राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष का आपातकालीन टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1070 चौबीसों घंटे चालू कर दिया है। किसी भी अप्रिय स्थिति, जलभराव या मलबे में दबने की सूचना इस नंबर पर तत्काल दी जा सकती है। प्रशासन ने नागरिकों को सख्त हिदायत दी है कि वे जलभराव वाले मार्गों, उफनती नदियों, नालों और जर्जर पुलियाओं के समीप कतई न जाएं तथा सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी निष्ठा से पालन करें।
यातायात और बिजली आपूर्ति प्रभावित: युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य
विगत 60 घंटों की अनवरत बारिश ने राजधानी लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी और बरेली सहित कई महानगरों के शहरी बुनियादी ढांचे की पोल खोल दी है। सड़कों पर जलजमाव के कारण भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही, वहीं सैकड़ों प्रमुख संपर्क मार्गों पर भारी-भरकम पेड़ों के गिरने से आवागमन घंटों बाधित रहा। कई जनपदों में हाई-टेंशन बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हो जाने से सैकड़ों गांवों में विद्युत आपूर्ति ठप हो गई, जिसे बहाल करने के लिए ऊर्जा विभाग के कर्मचारी दिन-रात जुटे हुए हैं।
प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर चेतावनी बिंदु के करीब पहुंच गया है, जिसके चलते कछारी इलाकों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को कहा गया है। नगर निगमों और जिला पंचायतों द्वारा जल निकासी के लिए अतिरिक्त पंपिंग सेट लगाए गए हैं ताकि प्रमुख सार्वजनिक स्थलों, अस्पतालों और रिहायशी कॉलोनियों से पानी तेजी से निकाला जा सके।
UP Rain Havoc: सतर्कता और समन्वय से ही टलेगा संकट
उत्तर प्रदेश पर मौसम का यह कहर इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि मानसून की विदाई वेला में होने वाली मौसमी हलचलें अत्यंत विनाशकारी रूप ले सकती हैं। 56 निर्दोष जिंदगियों की क्षति और सैकड़ों परिवारों का बेघर होना राज्य के लिए एक अपूरणीय मानवीय आघात है।
यद्यपि राज्य सरकार और जिला प्रशासन युद्धस्तर पर राहत पहुंचाने और घायलों का उपचार करने में जुटा है, किंतु नागरिकों का सजग रहना भी उतना ही अनिवार्य है। आगामी दिनों में मौसम विभाग के पूर्वानुमानों पर नजर रखते हुए जर्जर ढांचों से दूर रहें, बिजली के तारों व खंभों के संपर्क में न आएं और किसी भी प्रकार की आपातकालीन आवश्यकता पड़ने पर सीधे प्रशासन के हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क स्थापित करें।
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