UNESCO World Heritage: यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हुए 25 नए स्थल, भारत के प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ को भी मिला स्थान

UNESCO World Heritage: UNESCO की विश्व धरोहर सूची में 25 नए स्थल शामिल हुए हैं, जिसमें भारत के वाराणसी स्थित सारनाथ को भी जगह मिली है।

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UNESCO World Heritage: दुनिया भर के सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर प्रेमियों के लिए एक बेहद गर्व और उत्साह से भरी खबर सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन यानी यूनेस्को ने अपनी प्रतिष्ठित विश्व धरोहर सूची में पच्चीस नए स्थलों को शामिल करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में आयोजित विश्व धरोहर समिति के अड़तालीसवें सत्र के दौरान यह बड़ा निर्णय लिया गया, जिसमें दुनिया भर की कई अनमोल धरोहरों को वैश्विक मान्यता प्रदान की गई है। इस बहुप्रतीक्षित सूची में भारत के भी एक अत्यंत प्रसिद्ध और ऐतिहासिक स्थल को शामिल किया गया है, जिससे देश भर में खुशी की लहर दौड़ गई है। इस नई सूची के जारी होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन सभी स्थलों के संरक्षण और संवर्द्धन के प्रयासों को एक नया आयाम मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

UNESCO World Heritage: दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित हुआ यूनेस्को का 48वां सत्र

दक्षिण कोरिया के ऐतिहासिक शहर बुसान में उन्नीस से उनतीस जुलाई के बीच विश्व धरोहर समिति के अड़तालीसवें सत्र का भव्य आयोजन किया गया था। इस उच्च स्तरीय बैठक में दुनिया भर से आए प्रतिनिधियों ने विभिन्न देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों के नामांकन पर विस्तार से चर्चा की। आपसी संवाद और पूर्ण सहमति के आधार पर समिति ने वैश्विक धरोहरों की सूची में पच्चीस नए स्थलों को जोड़ने पर अपनी मुहर लगाई। इस सत्र के दौरान ईरान के प्रसिद्ध आलमूत महल और उसके संबंधित किलों के अलावा जॉर्डन के अकाबा समुद्री संरक्षित क्षेत्र जैसे महत्वपूर्ण स्थलों को भी इस प्रतिष्ठित सूची में स्थान दिया गया, जो पूरी दुनिया की ऐतिहासिक विविधता को दर्शाता है।

भारत के प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ को मिली वैश्विक मान्यता

इस बहुराष्ट्रीय सूची में भारत की ओर से उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ को शामिल किया गया है, जिसे पच्चीस जुलाई को आधिकारिक रूप से यह गौरव प्राप्त हुआ। सारनाथ वह पवित्र भूमि है जहाँ महात्मा बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था, जिसे धर्मचक्र प्रवर्तन के नाम से भी जाना जाता है। इस ऐतिहासिक स्थल के यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने से भारत की सांस्कृतिक विरासत को एक बार फिर वैश्विक पटल पर सर्वोच्च सम्मान मिला है। इसके साथ ही जापान की पुरानी राजधानियों असुका और फुजिवारा, उज्बेकिस्तान के ताशकंद मॉडर्निस्ट आर्किटेक्चर तथा यूनान के माउंट ओलंपस के बड़े हिस्सों को भी इस प्रतिष्ठित सूची में जगह दी गई है।

वैश्विक स्तर पर कुल धरोहरों की संख्या और वर्गीकरण की स्थिति

यूनेस्को द्वारा अट्ठाइस जुलाई को जारी किए गए आधिकारिक बयान के अनुसार इन पच्चीस नए स्थलों के जुड़ जाने के बाद अब पूरी दुनिया में विश्व धरोहर सूची में शामिल कुल स्थलों की संख्या बढ़कर एक हजार दो सौ तिहत्तर हो गई है। ये सभी अनमोल स्थल दुनिया के कुल एक सौ तिहत्तर देशों में फैले हुए हैं, जिन्हें अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च संरक्षण और प्रशासनिक सहायता का लाभ मिलेगा। इस बार चुनी गई सूची में उन्नीस सांस्कृतिक, पाँच प्राकृतिक और एक मिश्रित स्थल को शामिल किया गया है। इन स्थलों को वैश्विक पहचान मिलने से न केवल उनके संरक्षण के कार्य में तेजी आएगी, बल्कि उन देशों में पर्यटन गतिविधियों को भी अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

UNESCO World Heritage: अफ्रीका के तीन देशों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

यूनेस्को के इस सत्र को अफ्रीका महाद्वीप के तीन देशों कोमोरोस, साओ टोमे एवं प्रिंसिपे तथा दक्षिण सूडान के लिए बेहद खास और ऐतिहासिक करार दिया गया है। इन तीनों देशों के किसी न किसी स्थल को पहली बार यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान मिला है, जो इस संगठन की वैश्विक पहुंच और संतुलन को और अधिक व्यापक बनाता है। संगठन ने यह भी घोषणा की है कि विश्व धरोहर समिति का अगला यानी उनचासवां सत्र अगले साल यानी वर्ष दो हजार सत्तास में तुर्किये के ऐतिहासिक शहर इस्तांबुल में आयोजित किया जाएगा। इन लगातार प्रयासों से यह स्पष्ट होता है कि यूनेस्को दुनिया के हर कोने की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को सहेजने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

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