UK Heatwave: ब्रिटेन में भीषण गर्मी के बीच पानी में डूबने से कई मौतें, जानिए क्या है ‘कोल्ड वॉटर शॉक’ जो अचानक ले रहा है लोगों की जान
UK Heatwave: यूके में भीषण गर्मी के बीच बड़ा हादसा
UK Heatwave: यूनाइटेड किंगडम (UK) से इस वक्त स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी एक बेहद डराने वाली खबर सामने आ रही है। यूके में इन दिनों रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और भीषण हीटवेव का कहर जारी है, जिससे राहत पाने के लिए लोग तेजी से स्थानीय नदियों, झीलों और तालाबों का रुख कर रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से, चिलचिलाती धूप और गर्मी से बचने की यही कोशिश कई परिवारों के लिए जिंदगी भर का मातम बन गई है। इस हीटवेव के दौरान बर्फीले पानी में उतरने के कारण कई घातक हादसे हुए हैं, जिनमें कम से कम 7 युवाओं समेत कई लोगों की डूबने से असमय मौत हो गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और रेस्क्यू टीमों ने खुलासा किया है कि इन मौतों के पीछे की सबसे बड़ी वजह ‘कोल्ड वॉटर शॉक’ (Cold Water Shock) है। बाहर की भीषण गर्मी के बाद अचानक अत्यधिक ठंडे पानी के संपर्क में आने से शरीर का पूरा सिस्टम फेल हो जाता है, जो पल भर में जानलेवा साबित हो रहा है।
UK Heatwave: महज 12 साल के बच्चे सहित बुजुर्गों ने भी गंवाई जान, रेस्क्यू टीमें अलर्ट पर
यूके में मौसम का मिजाज बदलते ही लोग बिना सोचे-समझे वाटर बॉडीज में छलांग लगा रहे हैं, जिससे अनजाने में पानी में डूबने (Accidental Drownings) के मामलों में अचानक एक भयानक उछाल आया है। इस हीटवेव के दौरान जान गंवाने वालों में सबसे छोटा बच्चा महज 12 साल का जूनियर स्लेटर था, जिसकी मंगलवार दोपहर लंकाशायर की एक नदी में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई।
इसके अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में हुए हादसों में एक 60 वर्षीय बुजुर्ग और एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने भी पानी के भीतर अपनी जान गंवाई है। इन बैक-टू-बैक दर्दनाक घटनाओं ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। इसे देखते हुए ‘रॉयल लाइफ सेविंग सोसायटी’ ने पूरे देश में एक आपातकालीन चेतावनी (Emergency Alert) जारी कर दी है और लोगों से बेहद सावधान रहने की अपील की है।
बाहर भयंकर गर्मी, तो पानी के अंदर बर्फीली ठंड, यही है सबसे बड़ा धोखा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लोग अक्सर बाहर चल रही गर्म हवाओं और ऊंचे तापमान को देखकर पानी के तापमान का गलत अंदाजा लगा लेते हैं, जो उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी और आखिरी भूल साबित होती है। भले ही बाहर हवा का तापमान बहुत ज्यादा और झुलसाने वाला हो, लेकिन इसके बावजूद नदियों, गहरी झीलों और समुद्र के पानी का अंदरूनी तापमान अभी भी बहुत कम और बर्फीला होता है।
जब कोई व्यक्ति बाहर की चिलचिलाती गर्मी से तपे हुए शरीर के साथ अचानक इस अत्यधिक ठंडे पानी के भीतर उतरता है या सीधे छलांग लगाता है, तो उसका नर्वस सिस्टम इस अचानक आए बड़े बदलाव को बर्दाश्त नहीं कर पाता है। थर्मल शॉक के कारण शरीर पूरी तरह फ्रीज हो जाता है, जिसे मेडिकल साइंस की भाषा में ‘कोल्ड वॉटर शॉक’ कहा जाता है।
मेडिकल साइंस की नजर से समझें: आखिरकार कैसे जान ले लेता है ‘कोल्ड वॉटर शॉक’?
जैसे ही कोई इंसान अचानक ठंडे पानी के संपर्क में आता है, तो त्वचा के तापमान में अचानक आई भारी गिरावट के कारण शरीर के भीतर एक अनियंत्रित ‘गैस्प रिस्पांस’ (सांस फूलने की प्रक्रिया) सक्रिय हो जाता है। इस स्थिति में इंसान गंभीर पैनिक (घबराहट) का शिकार हो जाता है और तेजी से हांपने लगता है। हांपने के चक्कर में जैसे ही वह पानी के अंदर सांस खींचने की कोशिश करता है, अनजाने में बड़ी मात्रा में पानी उसके मुंह और फेफड़ों के अंदर चला जाता है, जिससे दम घुटने लगता है।
इसके अलावा, अचानक अत्यधिक ठंड के संपर्क में आने से शरीर की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं और ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) अचानक बहुत ऊंचे स्तर पर पहुंच जाता है। इससे दिल पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। इस कड़कड़ाती ठंड के कारण अच्छे से अच्छे पेशेवर तैराक की मांसपेशियां भी पल भर में पूरी तरह सुन्न और पंगु हो जाती हैं, जिससे वह चाहकर भी हाथ-पैर नहीं चला पाता और डूबने लगता है।
UK Heatwave: मुसीबत में जान बचाएगा रेस्क्यू टीम का यह नियम: ‘फ्लोट टू लिव’ (Float to Live)
इस जानलेवा स्थिति से निपटने और लोगों की जिंदगी सुरक्षित रखने के लिए ‘रॉयल नेशनल लाइफबोट इंस्टीट्यूशन’ (RNLI) ने एक बेहद खास और जीवन रक्षक हेल्थ गाइडलाइन जारी की है। रेस्क्यू एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि आप पानी में उतरने के बाद किसी भी तरह की मुसीबत में फंस जाएं, या आपको महसूस हो कि आपका शरीर सुन्न हो रहा है, तो सबसे पहला और सबसे जरूरी नियम यह है कि आप बिल्कुल भी पैनिक न करें।
जान बचाने का अचूक तरीका: घबराहट में जबरदस्ती हाथ-पैर मारना आपकी बची-कुची ऊर्जा को भी तेजी से खत्म कर देता है और डूबने की रफ्तार को बढ़ा देता है। ऐसे समय में ‘फ्लोट टू लिव’ के नियम का पालन करें। पानी में डूबने से बचने के लिए सीधे अपनी पीठ के बल पानी की सतह पर लेट जाएं, जैसे आप बिस्तर पर सीधे सोते हैं। अपने सिर को थोड़ा पीछे की तरफ झुकाएं ताकि आपके कान पानी के अंदर रहें, अपनी छाती को ऊपर की ओर उठाएं और फेफड़ों में हवा भरकर धीरे-धीरे और लंबी सांसें लें। कुछ ही मिनटों में जब आपके शरीर का तापमान सामान्य हो जाए और सांसें पूरी तरह काबू में आ जाएं, तब धीरे-धीरे तैरकर किनारे आएं या मदद के लिए जोर से आवाज लगाएं।
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