AMCA Project India: भारत बनाएगा अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान, सरकार के फैसले से बढ़ी हलचल

AMCA Project India: भारत बनाएगा अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान

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AMCA Project India: भारत के रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को लेकर एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव देखने को मिल रहा है। रक्षा मंत्रालय ने देश के सबसे बड़े और सबसे महत्वाकांक्षी स्वदेशी डिफेंस प्रोग्राम ‘एडवांस्ड Medium कॉम्बैट एयरक्राफ्ट’ (AMCA) को रफ्तार देने के लिए निजी क्षेत्र (प्राइवेट सेक्टर) की ओर रुख किया है। भारत सरकार ने देश के पहले पांचवीं पीढ़ी (5th Generation) के स्टील्थ लड़ाकू विमान के प्रोटोटाइप तैयार करने के लिए ₹15,000 करोड़ का भारी-भरकम टेंडर जारी किया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सरकार ने इस बार सरकारी एयरोस्पेस कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को किनारे रखते हुए टाटा, एलएंडटी और भारत फोर्ज जैसी देश की दिग्गज प्राइवेट कंपनियों पर भरोसा जताया है। इस मेगा प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य भारतीय वायुसेना को चीन के J-20 जैसे घातक विमानों का मुकाबला करने के लिए कूटनीतिक रूप से तैयार करना है।

AMCA Project India: क्या है AMCA प्रोजेक्ट और भारतीय वायुसेना के लिए यह क्यों है गेमचेंजर?

एएमसीए (AMCA) यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट, भारत का अपना पूरी तरह से स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट तैयार करने की एक बेहद खास परियोजना है। यह दो इंजनों वाला एक मल्टी-रोल लड़ाकू विमान होगा, जिसे दुश्मन के इलाके में गहरे हवाई हमलों (Deep Penetration) और देश की वायु रक्षा प्रणाली को अचूक बनाने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया जा रहा है।

वर्तमान समय में दुनिया के गिने-चुने देशों के पास ही पांचवीं पीढ़ी के विमान बनाने की तकनीक मौजूद है। पड़ोसी देश चीन लगातार अपनी वायुसेना में 5th जनरेशन के J-20 विमानों को शामिल कर रहा है। ऐसे में भारत को अपनी हवाई सीमाओं की संप्रभुता बनाए रखने और भविष्य के आधुनिक युद्धों में बढ़त हासिल करने के लिए एएमसीए की सख्त जरूरत है। यह विमान भारतीय वायुसेना की रीढ़ की हड्डी बनने जा रहा है।

क्यों खास होते हैं पांचवीं पीढ़ी के विमान? जानिए इनके 5 जादुई फीचर्स

चौथी या 4.5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों (जैसे सुखोई-30 एमकेआई या राफेल) की तुलना में पांचवीं पीढ़ी के विमान तकनीक और डिजाइन के मामले में बहुत आगे होते हैं। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि एएमसीए में कौन सी आधुनिक तकनीकें इस्तेमाल होने जा रही हैं:

  • रडार की पकड़ से बाहर (Stealth Design): इन विमानों में ‘S-शेप’ के एयर इनटेक बनाए जाते हैं, ताकि इंजन के पंखे रडार की तरंगों से पूरी तरह छिप सकें। इसके अलावा विमान की बाहरी परत पर विशेष रडार एब्जॉर्बेंट मटीरियल (RAM) का लेप होता है, जो दुश्मन के रडार की किरणों को सोख लेता है। इससे यह रडार स्क्रीन पर एक छोटी चिड़िया जैसा दिखता है।

  • छिपा हुआ वेपन बे (Internal Weapon Bay): पारंपरिक लड़ाकू विमानों में मिसाइलें और बम उनके पंखों के नीचे लटके होते हैं, जो रडार पर साफ दिखाई देते हैं। एएमसीए में सभी घातक हथियार विमान के अंदर बने एक गुप्त चेंबर में छिपे होंगे, जिसके दरवाजे सिर्फ मिसाइल दागने के समय कुछ सेकंड के लिए खुलेंगे।

  • बिना आफ्टरबर्नर के सुपरसोनिक स्पीड (Supercruise): पुराने विमानों को ध्वनि की गति से तेज उड़ने के लिए ‘आफ्टरबर्नर’ का सहारा लेना पड़ता है, जिससे बहुत ज्यादा ईंधन खर्च होता है और विमान का तापमान बढ़ जाता है। एएमसीए अपने उन्नत जीई-एफ414 इंजन के दम पर बिना आफ्टरबर्नर के ही लंबे समय तक सुपरसोनिक स्पीड से उड़ने में सक्षम होगा।

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेंसर फ्यूजन: एएमसीए में अत्याधुनिक एईएसए (AESA) रडार और एआई (AI) तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। कंप्यूटर खुद युद्धक्षेत्र के सारे डेटा को प्रोसेस करके पायलट को एक ही बड़ी स्क्रीन पर 360-डिग्री का सटीक नजारा देगा, जिससे फैसले लेना आसान हो जाएगा।

  • नेटवर्क सेंट्रिक वारफेयर: यह विमान हवा में उड़ते हुए अन्य ड्रोन्स, सैटेलाइट और जमीनी रडार के साथ रीयल-टाइम डेटा शेयर कर सकता है। इसकी रणनीति ‘पहले देखो और पहले मारो’ की है, यानी दुश्मन के देखने से बहुत पहले ही यह उसे ट्रैक करके स्टैंड-ऑफ (सुरक्षित) दूरी से ही तबाह कर देगा।

HAL को किनारे कर टाटा, L&T और भारत फोर्ज पर क्यों जताया भरोसा?

रक्षा मंत्रालय ने इस ₹15,000 करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए देश की तीन बड़ी निजी कंपनियों के कंसोर्टियम (समूह) से आवेदन मांगे हैं। इस रेस में लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ; भारत फोर्ज ने BEML के साथ साझेदारी की है; और तीसरी बड़ी दावेदार टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स (TASL) है।

HAL को न चुनने की असली वजह: सरकारी कंपनी एचएएल (HAL) के पास इस समय तेजस मार्क-1ए जैसे भारी-भरकम ऑर्डर्स का बैकलॉग है, जिसे वह समय पर पूरा करने के लिए संघर्ष कर रही है। इसके बाद कंपनी को तेजस मार्क-2 पर भी काम करना है। प्रशासनिक लेटलतीफी और वर्कलोड को देखते हुए सरकार को डर था कि अगर एएमसीए भी एचएएल को दिया गया, तो विमानों की डिलीवरी 2035 से भी आगे बढ़ जाएगी। निजी कंपनियां सामान खरीदने और फैसले लेने में स्वतंत्र होती हैं, जिससे निर्माण की कमान समय सीमा के भीतर पूरी हो सकेगी।

क्या टाटा ग्रुप के पास है इस रेस में कोई विशेष बढ़त?

इस टेंडर को जीतने की रेस में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स का पलड़ा थोड़ा भारी माना जा रहा है। इसकी मुख्य वजह यह है कि टाटा के पास देश में सैन्य विमान निर्माण की फैसिलिटी स्थापित करने का पहले से ही शानदार व्यावहारिक अनुभव मौजूद है।

टाटा ने वैश्विक विमान निर्माता कंपनी एयरबस के साथ मिलकर गुजरात के वडोदरा में सी-295 (C-295) सैन्य परिवहन विमान बनाने की एक बहुत बड़ी और अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी तैयार की है। निजी क्षेत्र में इस स्तर का इंफ्रास्ट्रक्चर और अनुभव रखने के कारण टाटा को इस रेस में अन्य दावेदारों पर एक कूटनीतिक बढ़त मिलती हुई दिखाई दे रही है।

AMCA Project India: टेंडर जीतने वाली कंपनी को क्या करना होगा और क्या है इसकी टाइमलाइन?

रक्षा मंत्रालय के कड़े नियमों के मुताबिक, जो भी निजी कंपनी इस ग्लोबल टेंडर को जीतेगी, उसे चयन के ठीक तीन महीने के भीतर एक बिल्कुल नई कंपनी (SPV) का गठन करना होगा। इस नई कंपनी का पूरा मालिकाना हक और कंट्रोल सिर्फ भारतीय प्रमोटर्स के पास ही रहेगा और इसमें नियमों से बाहर किसी भी प्रकार की विदेशी हिस्सेदारी रखने की सख्त मनाही होगी।

यह नई कंपनी भारत सरकार की ‘एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी’ (ADA) के साथ मिलकर एएमसीए के शुरुआती पांच प्रोटोटाइप तैयार करेगी। कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के बाद 30 महीने के भीतर विमान की पहली उड़ान सुनिश्चित की जानी है। उम्मीद जताई जा रही है कि विमान का पहला प्रोटोटाइप साल 2029 तक बनकर पूरी तरह तैयार हो जाएगा। इसके बाद 84 महीनों के भीतर 1,800 टेस्ट उड़ानों का कड़ा परीक्षण कार्यक्रम पूरा करना होगा, जिसके बाद साल 2035 से भारतीय वायुसेना अपने बेड़े में इसकी 7 स्क्वाड्रन को शामिल करना शुरू कर देगी। अगले 4 से 5 महीनों में इस टेंडर के विजेता के नाम का अंतिम फैसला हो जाएगा।

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