घंटों बैठकर काम करने की आदत बन रही जानलेवा, युवाओं में तेजी से बढ़ रहा डीप वेन थ्रोम्बोसिस का खतरा, जानें इसके लक्षण, कारण और आसान बचाव उपाय

लंबे समय तक बैठने से बढ़ता है DVT का जोखिम, समय पर पहचान और बचाव बेहद जरूरी

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DVT risk: एक पल के लिए सोचिए कि आज आप कितने घंटे लगातार बैठे रहे। अगर जवाब चार से अधिक है तो यह खबर आपके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आधुनिक कामकाजी जीवनशैली जहां सुबह से रात तक कुर्सी पर बैठकर लैपटॉप चलाना नया सामान्य बन गया है वहां एक खतरनाक बीमारी चुपचाप पांव पसार रही है जिसका नाम है डीप वेन थ्रोम्बोसिस।

DVT risk: डीप वेन थ्रोम्बोसिस क्या है और यह कैसे होता है?

डीप वेन थ्रोम्बोसिस यानी DVT एक ऐसी चिकित्सीय स्थिति है जिसमें शरीर की गहरी नसों में रक्त का थक्का बन जाता है। यह थक्का अक्सर पैरों की नसों में बनता है लेकिन कभी कभी जांघ, पेट या बांह की नसों में भी हो सकता है।

जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठा या लेटा रहता है तो रक्त प्रवाह धीमा पड़ जाता है। इस धीमे प्रवाह के कारण रक्त जमने लगता है और थक्का बन जाता है। यही थक्का यदि नस में बड़ा हो जाए और टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाए तो यह पल्मोनरी एम्बोलिज्म नामक जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है।

DVT risk: युवाओं में DVT का खतरा क्यों बढ़ रहा है?

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार DVT पहले केवल बुजुर्गों और लंबी उड़ान करने वाले यात्रियों में आम माना जाता था। लेकिन अब यह बीमारी 25 से 40 वर्ष के युवाओं में भी तेजी से देखी जा रही है।

इसकी सबसे बड़ी वजह है आईटी और डेस्क जॉब संस्कृति जिसमें लोग रोजाना 8 से 10 घंटे कुर्सी पर बिताते हैं। ऑफिस से घर आने के बाद थकान के कारण शारीरिक गतिविधि और भी कम हो जाती है। इसके अलावा मोटापा, धूम्रपान और कम पानी पीना भी DVT के जोखिम को बढ़ाते हैं।

DVT risk: DVT के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

DVT के लक्षण शुरुआत में बेहद हल्के होते हैं जिन्हें लोग अक्सर थकान या मांसपेशियों में खिंचाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इनमें पैर या पिंडली में दर्द और भारीपन का एहसास सबसे आम है।

प्रभावित हिस्से में सूजन, गर्माहट और लालिमा भी DVT के संकेत हो सकते हैं। यदि थक्का टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाए तो सांस लेने में कठिनाई, छाती में दर्द और तेज धड़कन जैसे गंभीर लक्षण उभर सकते हैं जो तत्काल चिकित्सा की मांग करते हैं।

DVT risk: किन लोगों को DVT का सबसे अधिक खतरा है?

वरिष्ठ फिजिशियन और संवहनी रोग विशेषज्ञों के अनुसार कुछ लोग DVT के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं। लंबे समय तक बैठे रहने वाले डेस्क वर्कर, दीर्घ हवाई यात्रा करने वाले यात्री और लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने वाले मरीज इस जोखिम में सबसे आगे हैं।

इसके अलावा जिन लोगों के परिवार में DVT का इतिहास है, जो अधिक वजन वाले हैं, जो धूम्रपान करते हैं या जिन महिलाओं को गर्भनिरोधक गोलियां लेनी पड़ती हैं उनमें भी DVT का जोखिम सामान्य से अधिक होता है। गर्भावस्था के दौरान भी यह खतरा बढ़ जाता है।

DVT risk: DVT से बचाव के लिए क्या करना चाहिए?

DVT की रोकथाम के लिए सबसे पहली और जरूरी बात है शारीरिक गतिविधि। हर एक से डेढ़ घंटे में कुर्सी से उठकर कुछ मिनट चलना चाहिए। यह छोटी सी आदत रक्त प्रवाह को सुचारू रखती है।

पर्याप्त पानी पीना भी बेहद जरूरी है क्योंकि निर्जलीकरण रक्त को गाढ़ा बनाता है जिससे थक्का बनने की संभावना बढ़ती है। नियमित व्यायाम, स्वस्थ वजन बनाए रखना और धूम्रपान छोड़ना भी DVT के जोखिम को काफी हद तक कम करते हैं। जो लोग लंबी उड़ान पर जाते हैं उन्हें कम्प्रेशन स्टॉकिंग पहनने और बीच बीच में उठकर चलने की सलाह दी जाती है।

DVT risk: क्या DVT का इलाज संभव है और क्या करें जब लक्षण दिखें?

DVT पूरी तरह से उपचार योग्य है यदि इसे समय पर पहचान लिया जाए। चिकित्सक आमतौर पर रक्त पतला करने वाली दवाएं यानी एंटीकोएगुलेंट लिखते हैं जो थक्के को और बड़ा होने से रोकती हैं और धीरे धीरे उसे घुलने में मदद करती हैं।

जैसे ही पैर में असामान्य सूजन, दर्द या गर्माहट महसूस हो तो स्वयं निदान करने की कोशिश किए बिना तत्काल डॉक्टर से मिलना चाहिए। रक्त परीक्षण और अल्ट्रासाउंड के जरिए DVT की पुष्टि होती है और उसके अनुसार उपचार शुरू किया जाता है।

निष्कर्ष

डीप वेन थ्रोम्बोसिस एक ऐसी बीमारी है जो चुपचाप आती है और यदि ध्यान न दिया जाए तो जानलेवा बन सकती है। आधुनिक कामकाजी जीवनशैली ने इसे युवाओं के लिए एक वास्तविक खतरा बना दिया है।

लेकिन अच्छी बात यह है कि कुछ सरल आदतें अपनाकर इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। हर घंटे उठना, चलना, पानी पीना और नियमित व्यायाम करना इतने छोटे कदम हैं जो आपकी जान बचा सकते हैं। अपने शरीर के संकेतों को गंभीरता से लें और किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श करें।

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