Period Diet Tips: पीरियड्स में चाय-कॉफी पीना कितना सुरक्षित, जानें सही मात्रा
Period Diet Tips: पीरियड्स में चाय और कॉफी पीना सही है या नहीं? जानें कैफीन की सुरक्षित मात्रा, सावधानियां और दर्द कम करने वाले घरेलू पेय। एक्सपर्ट राय के साथ पूरी जानकारी।
Period Diet Tips: मासिक धर्म के दिनों में खान-पान को लेकर महिलाओं के मन में कई सवाल रहते हैं। कुछ को भूख कम लगती है, तो कुछ को ज्यादा क्रेविंग होती है। दर्द, ऐंठन, थकान और मूड में बदलाव भी आम हैं। इन्हीं दिनों में चाय या कॉफी का कप कई महिलाओं को राहत देता है, इसलिए वे बार-बार इसे पी लेती हैं। सवाल यह है कि पीरियड्स में चाय-कॉफी पीना सही है या इसमें मौजूद कैफीन लक्षण बढ़ा सकता है। हेल्थ एंड वेलनेस एक्सपर्ट डॉक्टर सोनू खोखर के अनुसार इन दिनों चाय-कॉफी पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं है। आमतौर पर एक-दो कप पीना नुकसान नहीं करता, लेकिन हर महिला की कैफीन के प्रति संवेदनशीलता अलग होती है। मात्रा और शरीर की प्रतिक्रिया दोनों पर ध्यान देना जरूरी है।
Period Diet Tips: पीरियड्स में चाय-कॉफी पूरी तरह बंद करनी चाहिए क्या
पीरियड्स के दौरान पेट दर्द, सिरदर्द और थकान महिलाओं को परेशान करते हैं। ऐसे में गर्म चाय या कॉफी कई बार आराम का अहसास देती है। डॉक्टर सोनू खोखर का कहना है कि इन दिनों चाय और कॉफी को एकदम बंद करने की जरूरत नहीं होती। सामान्य तौर पर दिन में एक या दो कप पीना अधिकतर महिलाओं के लिए ठीक रहता है। असल फर्क व्यक्तिगत संवेदनशीलता से पड़ता है। कुछ महिलाओं को ज्यादा कैफीन के बाद बेचैनी, नींद में दिक्कत, घबराहट या पेट संबंधी परेशानी हो सकती है। इसलिए सबके लिए एक ही मात्रा तय करना सही नहीं माना जाता। शरीर कैसा महसूस करे, उसी के हिसाब से फैसला करना बेहतर है।
कैफीन की मात्रा कब नुकसानदेह हो सकती है
नुकसान अक्सर मात्रा बढ़ने पर दिखता है, न कि एक हल्के कप से। बहुत स्ट्रॉन्ग चाय या कॉफी बार-बार पीने से कुछ महिलाओं में ऐंठन, गैस या जलन बढ़ सकती है। अगर कॉफी के बाद पेट में जलन या भारीपन लगे तो उसे रोक देना चाहिए। दिनभर में कुल कैफीन पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि चाय, कॉफी और कुछ पैकेज्ड पेय सब मिलाकर मात्रा बढ़ा देते हैं। नींद पहले से खराब हो या चिंता ज्यादा हो तो कैफीन और कम रखना समझदारी है। हर महिला को अपनी प्रतिक्रिया देखकर सीमा तय करनी चाहिए, न कि दूसरों की आदत पर चलना चाहिए।
पीते समय किन बातों का ख्याल रखें
चाय-कॉफी छोड़ने की जगह सावधानी बरतना ज्यादा व्यावहारिक है। बहुत गाढ़ी चाय न बनाएं और खाली पेट ज्यादा कैफीन से बचें। अगर पेट में गैस या जलन हो तो कॉफी टाल दें। इन दिनों पानी की कमी से थकान और सिरदर्द बढ़ सकते हैं, इसलिए गुनगुना पानी नियमित पिएं। अदरक वाली हल्की चाय कुछ महिलाओं को राहत दे सकती है, बशर्ते वह बहुत तेज न हो। कैफीन के साथ चीनी की अधिक मात्रा भी ऊर्जा में उतार-चढ़ाव ला सकती है। छोटे अंतराल पर पानी पीते रहना और भोजन संतुलित रखना लक्षणों को संभालने में मदद करता है।
दर्द और थकान में कौन से पेय राहत दे सकते हैं
कुछ पारंपरिक पेय पीरियड्स के दिनों में आराम देने वाले माने जाते हैं। हल्दी वाला दूध दर्द कम करने के लिए कई घरों में पिया जाता है। दालचीनी, अदरक और मेथी की हल्की चाय भी कुछ महिलाओं को फायदेमंद लगती है। अजवाइन और गुड़ का पानी भी घरों में प्रचलित विकल्प है। ये पेय हर किसी पर एक जैसा असर नहीं करते, लेकिन हाइड्रेशन बनाए रखने और गर्माहट देने में मदद कर सकते हैं। किसी भी घरेलू नुस्खे को दवा की तरह न लें। अगर दर्द बहुत तेज हो, रक्तस्राव असामान्य हो या कमजोरी ज्यादा बढ़े तो चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।
Period Diet Tips: कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए
मासिक धर्म के हर असामान्य संकेत पर ध्यान देना चाहिए। अगर दर्द सामान्य से कहीं अधिक हो, चक्र में अचानक बदलाव आए, चक्कर या अत्यधिक थकान रहे तो जांच कराना सही रहता है। कैफीन से बेचैनी, अनिद्रा या पेट की जलन बढ़े तो मात्रा घटाएं या कुछ दिन के लिए रोकें। इन दिनों पोषण से भरपूर भोजन भी उतना ही जरूरी है जितना पेय का चुनाव। आयरन, तरल पदार्थ और हल्के गरम भोजन से कमजोरी कुछ हद तक संभलती है। स्व-दवा या अत्यधिक काढ़े पर निर्भर रहना ठीक नहीं। शरीर की प्रतिक्रिया सबसे पहला संकेत है, उसी के अनुसार आदत बदलनी चाहिए।
पीरियड्स में चाय-कॉफी पूरी तरह मना नहीं है, लेकिन सीमा जरूरी है। एक-दो हल्के कप आमतौर पर ठीक माने जाते हैं, जबकि ज्यादा स्ट्रॉन्ग और बार-बार सेवन कुछ महिलाओं में लक्षण बढ़ा सकता है। अदरक वाली हल्की चाय, पर्याप्त पानी और संतुलित भोजन ज्यादा मददगार रहते हैं। हर शरीर अलग प्रतिक्रिया देता है, इसलिए अपनी संवेदनशीलता देखकर मात्रा तय करें। तेज दर्द या असामान्य बदलाव पर डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सुरक्षित रास्ता है।
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