BRICS Summit 2026: दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, 11 देश, एजेंडा और ताकत

BRICS Summit 2026: दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, 11 देश, एजेंडा और ताकत

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BRICS Summit 2026: 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स का 18वां शिखर सम्मेलन होना है। समूह को दो दशक पूरे हो चुके हैं और पहली बार 11 सदस्य देश एक मंच पर पूरी तस्वीर बदलने की चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार अध्यक्ष हैं। भारत चौथी बार कमान संभाल रहा है। ब्रिक्स का पूरा नाम ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से बना था। 2024-25 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जुड़े। जनवरी 2025 में इंडोनेशिया पूर्ण सदस्य बना। दस साझेदार देश भी दायरे में हैं। समूह दुनिया की करीब 47 प्रतिशत आबादी और वैश्विक जीडीपी का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा समेटता है। सम्मेलन तय करेगा कि यह केवल मंच रहेगा या उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मजबूत आवाज बनेगा।

BRICS Summit 2026: ब्रिक्स के सदस्य और साझेदार देश कौन हैं

पूर्ण सदस्य अब ग्यारह हैं। मूल पांच के साथ मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई और इंडोनेशिया शामिल हैं। साझेदार देशों में बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम गिने जाते हैं। ये पूर्ण सदस्य नहीं, फिर भी समूह की चर्चा में रहते हैं। आबादी और अर्थव्यवस्था के आकार के कारण इसे बड़ी ताकत कहा जा रहा है। विस्तार के बाद स्वर एक रखना कठिन भी है, क्योंकि सदस्य देशों के हित अलग-अलग हैं। दिल्ली बैठक इसी एकजुटता की परीक्षा बनेगी। साझेदार दर्जा सहयोग बढ़ाता है, वोट या पूर्ण अधिकार नहीं देता।

दिल्ली में किन नेताओं के आने की चर्चा है

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भागीदारी क्रेमलिन ने पुष्टि की है। यह एक वर्ष में उनकी दूसरी भारत यात्रा होगी। मीडिया और सूत्रों के अनुसार चीन के शी जिनपिंग करीब चार सौ अधिकारियों के साथ आ सकते हैं। यह सात वर्ष में उनकी संभावित पहली भारत यात्रा बताई जा रही है। दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इंडोनेशिया, ईरान, इथियोपिया के शीर्ष नेताओं के आने की संभावना जताई गई है। बेलारूस, कजाकिस्तान, मलेशिया और थाईलैंड के नेताओं का भी जिक्र है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के आने की संभावना बताई गई। ब्राजील के लूला घरेलू चुनाव के कारण नहीं आ रहे, विदेश मंत्री प्रतिनिधित्व करेंगे। यूएई से अबू धाबी के क्राउन प्रिंस आने वाले हैं। सऊदी स्तर अभी स्पष्ट नहीं। कई नाम पुष्टि की प्रतीक्षा में हैं।

2026 एजेंडा में किन विषयों पर बात होगी

इस वर्ष की थीम मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता रखी गई है। व्यापार में स्थानीय मुद्रा और सीमा पार भुगतान मजबूत करने की चर्चा प्रमुख है। छोटे-मझोले उद्योगों को बढ़ावा देने की बात भी एजेंडे में है। न्यू डेवलपमेंट बैंक की पूंजी और स्थानीय मुद्रा में ऋण क्षमता बढ़ाने पर जोर रहेगा। हरित वित्त के नए रास्ते खोलने का प्रस्ताव है। ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु लचीलापन और डिजिटल सार्वजनिक ढांचा भी विषय हैं। आईएमएफ कोटा सुधार तथा सुरक्षा परिषद में उभरती अर्थव्यवस्थाओं को जगह देने की पुरानी मांग दोहराई जा सकती है। सबसे अधिक नजर मोदी-पुतिन और संभावित मोदी-शी द्विपक्षीय मुलाकातों पर रहेगी। गलवान तनाव के बाद चीन दौरा रिश्ते सुधारने का संकेत माना जा रहा है।

ब्रिक्स और जी-7 की तुलना कैसे समझें

जी-7 अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, फ्रांस, इटली और जापान का समूह है। इसके पास पुराना वित्तीय तंत्र, आईएमएफ, विश्व बैंक और स्विफ्ट जैसी व्यवस्थाओं में बड़ी भूमिका है। ब्रिक्स के पास आबादी, संसाधन और बढ़ती अर्थव्यवस्था है। विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली बैठक बताएगी कि विस्तारित समूह व्यापार, वित्त और सुरक्षा पर एक स्वर में बोल सकता है या नहीं। इसे जी-7 का विकल्प कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि आंतरिक मतभेद भी हैं। फिर भी आबादी और जीडीपी के हिस्से के कारण वैश्विक मंच पर इसकी सुनवाई बढ़ी है। दोनों मंच अलग इतिहास और शक्ति रखते हैं। तुलना ताकत की होड़ से ज्यादा व्यवस्था सुधार की मांग पर टिकती है।

BRICS Summit 2026: न्यू डेवलपमेंट बैंक और ग्लोबल साउथ की भूमिका

न्यू डेवलपमेंट बैंक की स्थापना 2014 में ब्राजील सम्मेलन में हुई। इसे ब्रिक्स बैंक भी कहा जाता है। उद्देश्य विकासशील देशों को बुनियादी ढांचे और सतत विकास के लिए फंड देना है, पश्चिमी शर्तों के बिना विकल्प देना इसका दावा है। यह विश्व बैंक का पूर्ण विकल्प नहीं बना, लेकिन दूसरा रास्ता जरूर देता है। ग्लोबल साउथ यानी एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और मध्य पूर्व की उभरती अर्थव्यवस्थाओं को समूह ने संगठित आवाज दी है। भारत अपनी अध्यक्षता में मानवता पहले का विजन रख रहा है और इन प्राथमिकताओं को केंद्र में लाना चाहता है। पूंजी बढ़ाने और स्थानीय मुद्रा ऋण का विस्तार हुआ तो बैंक की हैसियत और बढ़ेगी।

दिल्ली का 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 11 सदस्यों को भारत मंडपम में ला रहा है। समूह करीब आधी आबादी और 40 प्रतिशत जीडीपी समेटता है। पुतिन की पुष्टि हो चुकी है, शी समेत अन्य नेताओं की उपस्थिति अभी मिश्रित संकेत देती है। एजेंडा व्यापार, स्थानीय मुद्रा, एनडीबी, ऊर्जा और वैश्विक संस्थान सुधार पर टिका है। द्विपक्षीय मुलाकातें उतनी ही अहम होंगी जितना साझा घोषणा पत्र। विस्तार के बाद एक स्वर निकालना सबसे बड़ी परीक्षा है। सम्मेलन ब्लॉक की तस्वीर तय करेगा, नतीजे घोषणाओं की ठोस प्रगति पर दिखेंगे।

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