Tamil Nadu Land Grab Case: दिव्यांग की 9.7 एकड़ जमीन के मामले में DMK विधायक समेत 6 पर केस
तेनकासी में 9.7 एकड़ पैतृक जमीन के कथित फर्जी हस्तांतरण मामले में FIR दर्ज
Tamil Nadu Land Grab Case: तमिलनाडु के दक्षिणी जिले तेनकासी में जमीन पर कथित अवैध कब्जे और धोखाधड़ी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। एक दिव्यांग व्यक्ति की लगभग 9.7 एकड़ पुश्तैनी जमीन को फर्जीवाड़े और पद के दुरुपयोग के जरिए हड़पने के गंभीर आरोपों के तहत सत्ताधारी दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के स्थानीय विधायक टीएम राजेंद्रन सहित कुल छह लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता का सीधा आरोप है कि राजस्व विभाग और निबंधन कार्यालय के भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से कानूनी उत्तराधिकारियों की सहमति और वैध दस्तावेजों के बिना जमीन का स्वामित्व बदल दिया गया। तेनकासी जिला अपराध शाखा (District Crime Branch) ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की तकनीकी और दस्तावेजी जांच तेज कर दी है।
Tamil Nadu Land Grab Case: डीएमके विधायक टीएम राजेंद्रन, उनके भाई और अधिकारियों पर प्राथमिकी
तेनकासी जिले की जिला अपराध शाखा ने कडैयानल्लूर विधानसभा क्षेत्र से डीएमके विधायक टीएम राजेंद्रन, उनके भाई चेल्लादुरई और राजस्व प्रशासन से जुड़े चार प्रमुख सरकारी अधिकारियों को नामजद करते हुए यह कानूनी कार्रवाई की है। आरोपित अधिकारियों की सूची में घटना के समय तैनात रहे तत्कालीन सब-रजिस्ट्रार, संबंधित ग्राम प्रशासनिक अधिकारी (VAO), क्षेत्रीय जोनल उप-तहसीलदार और भूमि सर्वेक्षण विभाग की एक महिला अधिकारी शामिल हैं।
पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार इन सभी ने एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत मूल भूमि रिकॉर्ड और खसरा विवरणों के साथ छेड़छाड़ की। राजस्व अधिकारियों ने कथित तौर पर स्थलीय सत्यापन किए बिना और असली वारिसों की गैर-मौजूदगी में नामांतरण (पट्टा ट्रांसफर) की प्रक्रिया को हरी झंडी दी। जांच एजेंसी अब उस संपूर्ण फाइल रिकॉर्ड को जब्त करने की प्रक्रिया में है जिसके माध्यम से वर्ष 2008 से लेकर 2019 के दौरान यह संदिग्ध नामांतरण किया गया था।
क्या है 9.7 एकड़ पैतृक भूमि विवाद की वास्तविक पृष्ठभूमि?
यह विवाद कोयंबटूर जिले के अक्कामलाई क्षेत्र के रहने वाले मुरुगैया नामक एक दिव्यांग व्यक्ति द्वारा उजागर किया गया है। मुरुगैया के अनुसार तेनकासी जिले के शंकरनकोविल तालुक स्थित तिरुमलापुरम गांव में उनके परिवार की 9.7 एकड़ उपजाऊ पैतृक कृषि भूमि स्थित है, जो राजस्व अभिलेखों में उनके स्वर्गीय पिता और चाचा के संयुक्त नाम पर दर्ज थी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनके पिता के देहांत के पश्चात जब परिवार के सदस्य आजीविका के सिलसिले में कोयंबटूर में रह रहे थे, तब राजनीतिक रसूख का उपयोग कर इस जमीन को अवैध तरीके से हस्तांतरित करा लिया गया। न तो परिवार से कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लिया गया और न ही कानूनी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate) की मांग की गई। इतना ही नहीं, मुरुगैया का यह भी दावा है कि इस विस्तृत भूखंड का गैर-कानूनी तरीके से आवासीय लेआउट तैयार किया गया और कृषि भूमि को आवासीय प्लॉटों में विभाजित कर तीसरे पक्षों को भारी मुनाफे पर बेच दिया गया।
सालों तक थानों के चक्कर और चुनावी हलफनामे में संपत्ति का दावा
पीड़ित मुरुगैया का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से अपनी पैतृक संपत्ति को वापस पाने के लिए स्थानीय पुलिस, तहसीलदार कार्यालय और जिला कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रहे थे, लेकिन विधायक के राजनीतिक प्रभाव के कारण उनकी लिखित शिकायतों को दबा दिया जाता था।
शिकायतकर्ता ने एक अन्य गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि विधायक टीएम राजेंद्रन ने विधानसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग को सौंपे गए अपने आधिकारिक संपत्ति शपथ पत्र में भी इसी विवादित जमीन के कुछ हिस्सों को अपनी वैध अचल संपत्ति के रूप में प्रदर्शित किया है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि चुनावी हलफनामे से जुड़े दावों की प्रामाणिकता और राजस्व रिकॉर्ड के कानूनी मिलान के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
कलेक्ट्रेट गेट पर मंत्री की गाड़ी रोककर दिव्यांग परिवार ने लगाई थी गुहार
प्रशासनिक स्तर पर इस मामले में वर्षों से बरती जा रही शिथिलता के खिलाफ हाल ही में मुरुगैया और उनके परिजनों ने अप्रत्याशित कदम उठाया था। तेनकासी जिले के आधिकारिक दौरे पर पहुंचे तमिलनाडु सरकार के मंत्री राजीव जब जिला कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश कर रहे थे, तभी मुरुगैया और उनके परिजनों ने मंत्री के काफिले के सामने आकर उनकी गाड़ी रोक दी और न्याय की गुहार लगाई।
अचानक हुए इस घटनाक्रम से सुरक्षा अधिकारियों में हड़कंप मच गया था। मंत्री ने वाहन से उतरकर पीड़ित परिवार की व्यथा सुनी और मामले के त्वरित निपटारे के लिए मौके पर मौजूद वरिष्ठ जिला अधिकारियों को निष्पक्ष जांच के सख्त निर्देश दिए। मंत्री के सीधे हस्तक्षेप के बाद ही जिला अपराध शाखा ने हरकत में आते हुए विधायक और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ धारा 420 (धोखाधड़ी), 120बी (आपराधिक साजिश) और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत औपचारिक प्राथमिकी दर्ज की।
Tamil Nadu Land Grab Case: दस्तावेजी फोरेंसिक और निष्पक्ष कानूनी जांच की चुनौती
इस संवेदनशील मामले में अब पुलिस जांच एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है। अपराध शाखा की टीम को वर्ष 2008 से 2019 तक के सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के मूल बिक्री पत्रों, अंगूठे के निशानों, हस्ताक्षरों और तत्कालीन राजस्व कर्मचारियों की टिप्पणियों की गहन फोरेंसिक जांच करनी होगी।
जांच अधिकारियों के सामने यह साबित करना मुख्य चुनौती होगी कि क्या जमीन की खरीद-फरोख्त में वास्तविक मालिकों के स्थान पर किसी फर्जी व्यक्ति को खड़ा किया गया था। इस मामले ने तमिलनाडु की राजनीति में सत्ता पक्ष के नेताओं द्वारा भूमि अधिग्रहण और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग को लेकर विपक्षी दलों को भी एक नया राजनीतिक मुद्दा थमा दिया है।
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