Meerut Blue Drum Case: मेरठ नीला ड्रम केस में मुस्कान-साहिल को फांसी, सौरभ की हत्या कर सीमेंट में छिपाया था शव
Meerut Blue Drum Case: मेरठ नीला ड्रम केस में मुस्कान-साहिल को फांसी, सौरभ की हत्या कर सीमेंट में छिपाया था शव
Meerut Blue Drum Case: मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला अदालत ने साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। दोनों ने सौरभ की हत्या कर शव को सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपा दिया था। मामले का खुलासा मार्च में हुआ था। बुधवार को जिला जज अरविंद कुमार मिश्र की अदालत ने यह फैसला सुनाया। यह केस पूरे मेरठ में चर्चा का विषय बना रहा। लोगों ने घटना को लेकर कई सवाल उठाए थे।
दोनों को 30 सितंबर को हत्या के मामले में दोषी करार दिया गया था। सजा सुनाने से पहले अदालत ने दोनों के स्वास्थ्य और जेल की दिनचर्या के बारे में जानकारी ली। पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये जिला कारागार से हुई। अदालत ने साक्ष्यों को देखते हुए फैसला लिया। परिवार लंबे समय से न्याय का इंतजार कर रहा था।
Meerut Blue Drum Case: मेरठ नीला ड्रम केस में क्या फैसला आया
मेरठ के नीला ड्रम केस में जिला अदालत ने साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी को फांसी की सजा सुनाई। जिला जज अरविंद कुमार मिश्र ने बुधवार को यह फैसला दिया। दोनों दोषी करार दिए जाने के बाद सजा पर सुनवाई हुई। अदालत ने पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर मृत्युदंड दिया।
सौरभ की मां रेणू और भाई बबलू ने अदालत से मृत्युदंड की मांग की थी। जिला शासकीय अधिवक्ता केके चौबे ने भी यही मांग की। परिवार ने कहा था कि फैसला न मानने पर हाईकोर्ट जाएंगे। कोर्ट ने उनकी मांग को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया। पेशी के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे।
सौरभ की हत्या कैसे हुई
ब्रह्मपुरी के इंद्रानगर निवासी सौरभ राजपूत ने वर्ष 2016 में गौरीपुरा निवासी मुस्कान रस्तोगी से प्रेम विवाह किया था। वर्ष 2019 में पारिवारिक विवाद के बाद दोनों अलग हो गए। उसी साल मुस्कान ने बेटी पीहू को जन्म दिया। बेटी वर्तमान में अपने नाना-नानी के पास रहती है।
मुस्कान की मुलाकात अपने स्कूल के सहपाठी और इंद्रानगर निवासी साहिल शुक्ला से हुई। सौरभ के विदेश जाने के बाद दोनों करीब आ गए। सौरभ के लौटने के बाद 24 फरवरी 2025 को हत्या की साजिश रची गई। तीन मार्च की रात सौरभ की हत्या कर शव के टुकड़े कर दिए गए। उन्हें सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपा दिया गया। यह घटना काफी योजनाबद्ध तरीके से की गई।
हत्या के बाद क्या हुआ
हत्या के बाद साहिल और मुस्कान हिमाचल घूमने चले गए। 17 मार्च को लौटने के बाद 18 मार्च को हत्याकांड का पर्दाफाश हुआ। पुलिस ने 19 मार्च को दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। उनकी निशानदेही पर ड्रम से सौरभ का शव बरामद किया गया।
पुलिस ने विवेचना पूरी कर आरोपपत्र दाखिल किया था। मुकदमे के ट्रायल के बाद 30 सितंबर को जिला जज अरविंद कुमार मिश्र की अदालत ने साहिल और मुस्कान को हत्या के मामले में दोषी करार दिया। बुधवार को सजा सुनाई गई। जांच में कई साक्ष्य जुटाए गए थे।
Meerut Blue Drum Case: परिवार की मांग क्या थी
सौरभ की मां रेणू और भाई बबलू ने दोनों दोषियों को मृत्युदंड देने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि यदि उनकी मांग के अनुरूप फैसला नहीं आया तो वे हाईकोर्ट में अपील करेंगे। डीजीसी केके चौबे ने पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर दोनों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी।
अदालत ने सजा पर सुनवाई करते हुए दोनों को फांसी की सजा सुनाई। पेशी जिला कारागार से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हुई। सजा सुनाने से पहले दोनों के स्वास्थ्य और जेल की दिनचर्या के बारे में जानकारी ली गई। परिवार ने फैसले पर संतोष जताया।
यह मामला मेरठ में काफी चर्चा में रहा। नीले ड्रम में शव छिपाने की घटना ने लोगों को झकझोर दिया। अदालत के फैसले से परिवार को न्याय मिला है। आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। दोनों पक्षों के वकीलों ने अपने-अपने तर्क रखे। साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने फैसला किया। इस केस ने पूरे इलाके में सनसनी फैलाई थी। मेरठ के नीला ड्रम केस ने दिखाया कि सबूतों के आधार पर अदालत सख्त फैसला ले सकती है। सौरभ राजपूत की हत्या की घटना लोगों की यादों में रहेगी। परिवार अब आगे की कानूनी लड़ाई के लिए तैयार है। घटना ने कई सवाल खड़े किए थे लेकिन अदालत ने अपना फैसला साक्ष्यों पर आधारित किया।
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