Tamil Nadu Gold Ring Scheme 2026: नवजात बच्चों को मिलेगी 1 ग्राम सोने की अंगूठी, जानें पात्रता और बजट

सरकारी अस्पताल में जन्मे पात्र बच्चों को 22 कैरेट की 1 ग्राम सोने की अंगूठी मिलेगी

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Tamil Nadu Gold Ring Scheme 2026: तमिलनाडु सरकार ने राज्य में संस्थागत प्रसव को शत-प्रतिशत सुनिश्चित करने और नवजात शिशुओं व माताओं के कल्याण के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक सामाजिक सुरक्षा योजना का औपचारिक शुभारंभ किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों, जिला मुख्यालय अस्पतालों और ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) में जन्म लेने वाले प्रत्येक पात्र नवजात शिशु को 22 कैरेट सोने की एक ग्राम की अंगूठी उपहार स्वरूप भेंट की जाएगी। मुख्यमंत्री ने सोमवार, 28 सितंबर 2026 को मदुरै में आयोजित एक भव्य राजकीय समारोह में नवजात माताओं को पहली खेप की स्वर्ण अंगूठियां सौंपकर इस योजना की शुरुआत की।

इस कल्याणकारी पहल को आधिकारिक रूप से ‘थाईमामन थंगा मोथिरम थिट्टम’ (Thaaimaman Thanga Mothiram Thittam) नाम दिया गया है, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘मातृ चाचा स्वर्ण अंगूठी योजना’ है। तमिल संस्कृति में नवजात शिशु के जन्म पर मामा (मातृ पक्ष) द्वारा सोने का आभूषण भेंट करने की सदियों पुरानी समृद्ध परंपरा रही है। राज्य सरकार ने इसी सांस्कृतिक संवेदना और मातृत्व सम्मान को प्रशासनिक नीति में पिरोते हुए इस योजना का स्वरूप तैयार किया है।

Tamil Nadu Gold Ring Scheme 2026: 22 जून 2026 से लागू होगी योजना

यद्यपि योजना का औपचारिक उद्घाटन 28 सितंबर को संपन्न हुआ है, किंतु राज्य सरकार ने इसे 22 जून 2026 की दोपहर 12 बजे से पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू करने का ऐतिहासिक नीतिगत निर्णय लिया है। इसका प्रत्यक्ष लाभ उन हजारों परिवारों को मिलेगा जिनके बच्चों का जन्म 22 जून से 27 सितंबर 2026 के मध्य राज्य के सरकारी अस्पतालों में हुआ था।

प्रशासनिक स्तर पर ऐसे सभी बच्चों का विस्तृत डिजिटल रिकॉर्ड स्वास्थ्य विभाग के डेटाबेस से संकलित कर लिया गया है। 22 जून के बाद जन्मे बच्चों के परिवारों को योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा, बल्कि उनके लिए जिला स्तर पर विशेष स्वास्थ्य हब केंद्र और नोडल वितरण शिविर स्थापित किए गए हैं, जहां से माता-पिता अपने आवश्यक सत्यापन दस्तावेज प्रस्तुत कर अंगूठी प्राप्त कर सकेंगे।

₹755.83 करोड़ का वार्षिक बजट: 4.41 लाख नवजात होंगे लाभान्वित

तमिलनाडु में प्रतिवर्ष लगभग 7.8 लाख बच्चों का जन्म होता है, जिनमें से 4.2 लाख से अधिक प्रसव सीधे सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली के अंतर्गत संपन्न होते हैं। इस विशाल परिमाण को ध्यान में रखते हुए राज्य मंत्रिमंडल ने योजना के निर्बाध संचालन हेतु 755.83 करोड़ रुपये के वार्षिक बजटीय आवंटन को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है।

सरकारी आपूर्ति प्रणाली के तहत प्रथम चरण में 1.28 लाख से अधिक स्वर्ण अंगूठियों की खरीद प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में कुल 4,41,667 अंगूठियों के वितरण का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक अंगूठी 22 कैरेट हॉलमार्क सोने से निर्मित है और उसका वजन ठीक 1 ग्राम निर्धारित किया गया है। किसी भी प्रकार की हेराफेरी या गबन को रोकने के लिए प्रत्येक अंगूठी पर लेजर तकनीक से एक विशिष्ट पहचान संख्या (Unique Serial Number) अंकित की गई है और उसे छेड़छाड़-रोधी सीलबंद सुरक्षा पैकेजिंग में वितरित किया जा रहा है।

योजना की मुख्य पात्रता शर्तें: किन्हें मिलेगा लाभ और कौन होंगे बाहर?

योजना का लाभ केवल वास्तविक और जरूरतमंद मूल निवासियों तक पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने स्पष्ट पात्रता मानक निर्धारित किए हैं। पहली और अनिवार्य शर्त यह है कि प्रसव अनिवार्य रूप से तमिलनाडु सरकार द्वारा संचालित अस्पताल अथवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ही संपन्न हुआ हो। निजी अस्पतालों, गैर-सरकारी नर्सिंग होम अथवा घर पर हुए प्रसव के मामलों को इस योजना के दायरे से पूर्णतः बाहर रखा गया है।

इसके अतिरिक्त, प्रसूता का तमिलनाडु का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है। गर्भावस्था के दौरान महिला का स्वास्थ्य विभाग के ‘पिकमी’ (PICME – Pregnancy and Infant Cohort Monitoring and Evaluation) सॉफ्टवेयर पर पूर्व पंजीकरण होना आवश्यक है और उसके पास वैध प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य पहचान पत्र (RCH ID) होना चाहिए। सत्यापन हेतु माता-पिता का निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र अथवा अन्य अधिकृत सरकारी पहचान दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा। यदि कोई शिशु निजी अस्पताल में जन्मा हो और बाद में किसी जटिलता के कारण सरकारी अस्पताल में रेफर किया गया हो, तो वह इस लाभ के लिए पात्र नहीं माना जाएगा।

संतान संख्या और लिंग का कोई बंधन नहीं: सभी बच्चों को समान अधिकार

इस योजना का एक अत्यंत प्रगतिशील और समावेशी पहलू यह है कि इसमें संतान के जन्म क्रम (बर्थ ऑर्डर) को लेकर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। परिवार में जन्म लेने वाला शिशु चाहे पहली संतान हो, दूसरी हो या तीसरी, यदि प्रसव सरकारी अस्पताल में हुआ है तो वह 1 ग्राम सोने की अंगूठी पाने का पूर्ण हकदार होगा।

इसके साथ ही, योजना में किसी भी प्रकार का लैंगिक भेदभाव नहीं रखा गया है। नवजात शिशु बालक हो या बालिका, दोनों को समान रूप से यह उपहार प्रदान किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस नीति से कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीतियों के विरुद्ध सकारात्मक सामाजिक संदेश जाएगा और नवजात कन्याओं के जन्म का परिवार में उल्लासपूर्वक स्वागत सुनिश्चित होगा।

वितरण की सुगम प्रक्रिया: डिस्चार्ज के समय ही हाथों-हाथ मिलेगी अंगूठी

28 सितंबर 2026 के बाद सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने वाली पात्र माताओं के लिए वितरण प्रक्रिया को अत्यंत पारदर्शी और झंझट-मुक्त बनाया गया है। प्रसव के उपरांत जब जच्चा-बच्चा पूर्णतः स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज होंगे, उसी समय अस्पताल प्रशासन द्वारा डिस्चार्ज स्लिप और जननी सुरक्षा किट के साथ सीलबंद स्वर्ण अंगूठी परिजनों को सौंप दी जाएगी।

इस व्यवस्था से निर्धन परिवारों को सरकारी दफ्तरों या स्वास्थ्य केंद्रों के अनावश्यक चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी। अस्पताल के नोडल चिकित्सा अधिकारी को संबंधित आरसीएच आईडी (RCH ID) और अंगूठी के सीरियल नंबर को राज्य के केंद्रीय स्वास्थ्य पोर्टल पर रियल-टाइम आधार पर लिंक करना अनिवार्य किया गया है, जिससे वितरण का शत-प्रतिशत डिजिटल ऑडिट सुनिश्चित हो सकेगा।

Tamil Nadu Gold Ring Scheme 2026: संस्थागत प्रसव और मातृ-शिशु स्वास्थ्य को नया संबल

तमिलनाडु सरकार की ‘थाईमामन थंगा मोथिरम थिट्टम’ केवल एक लोकलुभावन उपहार योजना नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने और मातृ मृत्यु दर (MMR) व शिशु मृत्यु दर (IMR) को न्यूनतम स्तर पर लाने का एक दूरगामी रणनीतिक प्रयास है। बहुमूल्य स्वर्ण उपहार का आकर्षण ग्रामीण व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को निजी क्लीनिकों के महंगे खर्च से बचाकर प्रशिक्षित सरकारी डॉक्टरों की देखरेख में सुरक्षित प्रसव कराने के लिए प्रेरित करेगा।

तमिलनाडु पहले से ही देश में स्वास्थ्य सूचकांकों के मामले में अग्रणी राज्यों में गिना जाता है। सांस्कृतिक परंपराओं और आधुनिक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं का यह अनूठा संगम निसंदेह अन्य राज्यों के लिए भी एक अनुकरणीय मॉडल साबित हो सकता है।

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