Student Protest: छात्र आंदोलन की आंधी में उजड़ा कनॉट प्लेस का कारोबार, बिक्री में 70 फीसदी तक की भारी गिरावट से व्यापारी परेशान

Student Protest: छात्र आंदोलन की आंधी में उजड़ा कनॉट प्लेस का कारोबार

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Student Protest: देश की राजधानी दिल्ली का दिल कहे जाने वाला और हमेशा गुलजार रहने वाला कनॉट प्लेस बाजार इन दिनों एक बेहद गहरे आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। सड़कों पर गूंजते छात्र आंदोलन के नारों और सुरक्षा के कड़े पहरे के बीच यहां के व्यापारियों की कमर टूट चुकी है। आलम यह है कि जो बाजार खरीदारों की चहल-पहल से आबाद रहता था, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है और कारोबारियों का व्यापार साठ से सत्तर फीसदी तक नीचे लुढ़क गया है। इस अप्रत्याशित मंदी ने दुकानदारों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, क्योंकि साल के इस अहम समय में वार्षिक सेल का सीजन चल रहा होता है, जो उनकी आमदनी का सबसे बड़ा जरिया माना जाता है।

Student Protest: एनडीटीए के आंकड़े बयां कर रहे हैं बर्बादी की दास्तान

न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन यानी एनडीटीए के अध्यक्ष अतुल भार्गव ने मौजूदा हालात पर गहरी चिंता जताते हुए कारोबार में आई भारी गिरावट का पूरा ब्योरा साझा किया है। उनके अनुसार, आंदोलन के पहले दिन बाजार का कुल व्यापार सामान्य दिनों के मुकाबले महज बीस से पच्चीस प्रतिशत के बीच ही सिमट कर रह गया था। हालांकि अगले दो दिनों में स्थिति में थोड़ा सुधार होने की कोशिश हुई और बिक्री बढ़कर पैंतीस से चालीस फीसदी तक पहुंची, लेकिन इसे किसी भी लिहाज से संतोषजनक नहीं कहा जा सकता। सामान्य दिनों की तुलना में सीधे तौर पर पैंसठ से सत्तर फीसदी की यह भारी गिरावट व्यापारियों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। दुकानदारों का कहना है कि यह वह समय होता है जब वे सालभर के मुनाफे की उम्मीद लगाते हैं, लेकिन इस बार हालात ने उनके सारे गणित बिगाड़ दिए हैं।

सुरक्षा के मद्देनजर समय से पहले गिराने पड़े शटर

कनॉट प्लेस में खरीदारी का असली दौर शाम पांच बजे के बाद शुरू होता है और रात साढ़े आठ बजे तक यहां ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ती है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से चल रहे उथल-पुथल भरे माहौल के कारण तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन ने शहर की मौजूदा स्थिति और ग्राहकों तथा दुकान पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बुधवार को ही यह निर्देश जारी कर दिया था कि सभी दुकानें शाम साढ़े छह बजे तक हर हाल में बंद कर दी जाएं। जब मुख्य कारोबार के घंटों में ही बाजार के ताले लग जाएंगे, तो व्यापार का चौपट होना लाजिमी है। दुकानदारों को भारी मन से सूरज ढलने से पहले ही अपने शोरूमों के शटर गिराने पड़े।

Student Protest: मेट्रो स्टेशन बंद होने से बढ़ी कर्मचारियों और खरीदारों की मुश्किलें

इस पूरे संकट को और अधिक गंभीर बनाने का काम किया है सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में आए व्यवधान ने। छात्र प्रदर्शनों के चलते सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच दिल्ली मेट्रो के सोलह से सत्रह स्टेशनों को अचानक अस्थायी रूप से बंद करना पड़ गया था। इस एक फैसले ने शहर की रफ्तार पर जैसे ब्रेक लगा दिया। बाहर से आने वाले ग्राहक कनॉट प्लेस तक पहुंचने में असमर्थ हो गए, तो वहीं दुकानों और शोरूमों में नौकरी करने वाले कर्मचारियों के सामने घर लौटने का गंभीर संकट खड़ा हो गया। शाम के वक्त जब मुख्य बाजार से ग्राहकों की आवाजाही शुरू होती है, उसी वक्त परिवहन ठप होने से हालात बेकाबू होने लगे, जिसके बाद व्यापारियों के पास अपनी दुकानों को समय से पहले बंद करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था।

Student Protest: व्यापार से बढ़कर है इंसान की सुरक्षा

मंदी की इस मार के बीच भी कनॉट प्लेस के व्यापारियों ने व्यावसायिक नुकसान को दरकिनार करते हुए इंसानियत और सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा है। एनडीटीए के प्रमुख अतुल भार्गव ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि धन और व्यापार का नुकसान तो फिर भी पूरा किया जा सकता है, लेकिन किसी भी कर्मचारी या ग्राहक की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उनका मानना है कि जब तक आसपास का माहौल पूरी तरह शांत और सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक कुछ घंटे दुकान खुली रखने से कोई बड़ा फायदा मिलने वाला नहीं है। व्यापारी वर्ग इस बात की उम्मीद लगाए बैठा है कि जल्द ही शहर के हालात सामान्य होंगे और प्रशासनिक स्तर पर ऐसा माहौल बनेगा कि कनॉट प्लेस की खोई हुई रौनक एक बार फिर लौट सकेगी, ताकि वे अपने काम को दोबारा पटरी पर ला सकें।

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