बेंगलुरु में खाली प्लॉटों पर कचरा जमा करने वालों पर सख्त कार्रवाई, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की चेतावनी—साफ न करने पर जब्त हो सकती है संपत्ति
15 अगस्त तक सफाई करें, नहीं तो जुर्माना, खर्च वसूली और संपत्ति जब्ती का नोटिस मिल सकता है
D.K. Shivakumar: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में लंबे समय से खाली पड़े प्लॉटों पर जमा कचरे, झाड़ियों और कंस्ट्रक्शन मलबे (C&D Waste) की विकराल होती समस्या पर राज्य सरकार और ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। शहर को साफ-सुथरा और बीमारियों से मुक्त बनाने के उद्देश्य से ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी ने पूरे अगस्त महीने तक चलने वाले विशेष ‘कूड़े से आजादी’ अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और बेंगलुरु विकास मामलों के प्रभारी डीके शिवकुमार ने संपत्ति मालिकों को सीधी और अंतिम चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि मालिकों ने अपने खाली पड़े प्लॉटों की सफाई नहीं कराई, तो नगर निगम न केवल सफाई का खर्च वसूल करेगा, बल्कि पांच साल या उससे अधिक समय से लावारिस छोड़ी गई संपत्तियों का आवंटन रद्द कर उन्हें वापस लेने के लिए नोटिस जारी किया जाएगा।
‘कूड़े से आजादी’ अभियान और 1616 ब्लैकस्पॉट्स का लक्ष्य
आईटी सिटी बेंगलुरु में खाली पड़ी निजी जमीनों और सार्वजनिक सड़कों के किनारे गैर-कानूनी तरीके से कंस्ट्रक्शन मलबा और तोड़-फोड़ का कचरा फेंकना एक बड़ी नागरिक समस्या बन चुका है। इससे न केवल शहर का सौंदर्य प्रभावित होता है, बल्कि मानसून के दौरान गंभीर स्वास्थ्य खतरे भी पैदा होते हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए शुरू किए गए ‘कूड़े से आजादी’ अभियान के तहत ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी ने शहर भर में ऐसे 1,616 डंपिंग साइट्स (ब्लैकस्पॉट्स) की पहचान की है, जहां से लगभग 22,730 मीट्रिक टन कचरा हटाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इस बृहद अभियान को सफल बनाने के लिए पांचों नगर निगमों के साथ-साथ बेंगलुरु सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड (BSWML), बेंगलुरु वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड (BWSSB), बेस्कॉम (BESCOM), बीएमआरसीएल (BMRCL), भारतीय रेलवे, के-राइड (K-RIDE), राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), बीडीए (BDA) और केआईएडीबी (KIADB) जैसी 10 से अधिक प्रमुख सरकारी एजेंसियों को एक साथ मैदान में उतारा गया है।
15 अगस्त तक की कड़ी समय सीमा और अधिकारियों का रुख
सरकार ने सभी खाली प्लॉट मालिकों को अपने प्लॉट की सफाई कराने और बाउंड्री वॉल बनाने के लिए 15 अगस्त तक का समय दिया है। बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि लंबे समय तक खाली पड़े प्लॉटों पर पड़े मलबे में जंगली खरपतवार और झाड़ियां उग आती हैं, जो मच्छरों, चूहों और जहरीले सांपों के पनपने का अड्डा बन जाती हैं। बाद में आसपास के लोग भी वहां घरेलू कचरा फेंकना शुरू कर देते हैं, जिससे पूरा मोहल्ला संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ जाता है।
अगस्त महीने के दौरान मुख्य रूप से कंस्ट्रक्शन मलबे और भारी कचरे को हटाने पर केंद्रित अभियान चलाया जा रहा है, जिसके बाद घरेलू गीले और सूखे कचरे के पृथक्करण (Segregation) के लिए अलग से दूसरा चरण शुरू किया जाएगा। 15 अगस्त तक सफाई न होने की स्थिति में नागरिक निकाय खुद जेसीबी और टिपरों की मदद से मलबा साफ करेगा और उस पर आने वाला पूरा प्रशासनिक खर्च संबंधित संपत्ति मालिक के प्रॉपर्टी टैक्स (Property Tax) में जोड़कर वसूला जाएगा।
उपमुख्यमंत्री का कड़ा संदेश: पांच साल से खाली प्लॉटों पर हो सकती है जब्ती की कार्रवाई
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने नागरिक जिम्मेदारी और प्रशासनिक सख्ती के बीच संतुलन रेखा खींचते हुए कहा कि सार्वजनिक सड़कों और नालों की सफाई रखना सरकार और नगर निगम का दायित्व है, लेकिन अपनी निजी जमीन और संपत्ति को स्वच्छ रखना प्रत्येक नागरिक का प्राथमिक कर्तव्य है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि शहर में कई लोग केवल रियल एस्टेट निवेश के उद्देश्य से प्लॉट खरीदकर वर्षों तक उन्हें लावारिस छोड़ देते हैं, जिससे पूरे पड़ोस को परेशानी उठानी पड़ती है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने प्लॉट खरीदने के पांच साल बाद भी वहां निर्माण कार्य शुरू नहीं किया है और न ही उसकी देखभाल की है, तो बीडीए (BDA) और संबंधित अथॉरिटी कानूनी प्रक्रियाओं के तहत ऐसी संपत्तियों का आवंटन रद्द करने या उन्हें वापस अधिग्रहित (Reacquire) करने की दिशा में नोटिस जारी करेगी। सरकार का यह रुख उन भू-माफियाओं और निवेशकों के लिए एक कड़ा संदेश है जो खाली जमीनों को डंपिंग यार्ड बनने दे रहे हैं।
D.K. Shivakumar: कठोर दंड और भारी जुर्माने का कानूनी प्रावधान
अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी ने जुर्माने की दरों को भी बेहद सख्त कर दिया है। खाली प्लॉट पर मलबा फेंकने या सफाई न रखने के मामले में पहली बार नियम तोड़ने पर 25,000 रुपये का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति या ठेकेदार बार-बार सार्वजनिक या निजी स्थानों पर कंस्ट्रक्शन मलबा फेंकते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर 50,000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक का दंड लगाया जाएगा और वाहन भी जब्त किए जा सकते हैं।
शहर भर से कचरा उठाने और उसे तय प्रोसेसिंग साइट्स तक पहुंचाने के लिए 70 से अधिक विशेष हैवी टिपर तैनात किए गए हैं। एकत्र किए गए मलबे को शहर के बाहरी इलाकों जैसे याराप्पनाहल्ली, मारेनाहल्ली, वेंकटपुरा, विट्टासंद्रा और कल्लूबालु में चिन्हित डंपिंग और रीसाइक्लिंग यार्ड्स तक सुरक्षित तरीके से पहुंचाया जा रहा है।
विपक्ष का समर्थन: दलीय राजनीति से ऊपर शहर की स्वच्छता
इस स्वच्छता अभियान (D.K. Shivakumar) की सबसे खास बात यह रही कि इसे राजनीतिक मतभेदों से परे जाकर व्यापक समर्थन मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और बेंगलुरु दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या ने मुख्यमंत्री के इस अभियान का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने बेंगलुरु के सभी नागरिकों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशंस (RWAs) और युवाओं से इस मुहिम में सक्रियता से भाग लेने का आह्वान किया।
सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा कि जब वे देश के अन्य स्वच्छ शहरों का दौरा करते हैं और फिर बेंगलुरु के रास्तों पर पड़े मलबे व गड्ढों को देखते हैं, तो उन्हें बेहद दुख होता है। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु को उसका पुराना ‘गार्डन सिटी’ का दर्जा वापस दिलाने के लिए हर नागरिक को अपनी सड़क और अपने प्लॉट की जिम्मेदारी खुद उठानी होगी। विपक्षी सांसद के इस सकारात्मक रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि शहर का विकास और सफाई दलीय राजनीति का विषय नहीं है।
स्वास्थ्य जोखिम, पर्यावरण और भविष्य की दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि खाली पड़े डंपिंग प्लॉट केवल आंखों को बुरे नहीं लगते, बल्कि वे डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों के मुख्य केंद्र होते हैं। मानसून के मौसम में इन खाली प्लॉटों में भरा ठहरा हुआ पानी और मलबा भूजल को भी प्रदूषित करता है।
ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी का यह ‘कूड़े से आजादी’ अभियान बेंगलुरु के शहरी प्रशासन में एक नया मोड़ साबित हो सकता है। सख्त जुर्माने, संपत्ति वापसी की चेतावनी, कई विभागों के बीच समन्वय और नागरिकों की भागीदारी के बल पर बेंगलुरु को एक बार फिर स्वच्छ, सुरक्षित और हरित महानगर बनाने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
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