Street Vendor Success Story: गोलगप्पे वाले की 4.5 लाख की कमाई ने IIT ग्रेजुएट्स को चौंकाया, घर के बाहर खड़ी है Scorpio

Street Vendor Success Story: गोलगप्पे वाले की कमाई और स्कॉर्पियो की कहानी ने आईआईटी ग्रेजुएट्स को हैरान किया, जिससे छोटे कारोबार की आमदनी पर चर्चा शुरू हुई।

0

Street Vendor Success Story: देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों यानी IIT से पढ़ाई करने वाले युवाओं को अक्सर ऊंचे पैकेज वाली नौकरियों का हकदार माना जाता है लेकिन हाल ही में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने इन बुद्धिमान युवाओं के होश उड़ा दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे सड़क किनारे गोलगप्पे बेचने वाले एक व्यक्ति की कमाई और जीवनशैली ने कॉर्पोरेट जगत के दिग्गजों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। यह कहानी केवल एक रेहड़ी पटरी वाले की नहीं है बल्कि एक सफल उद्यमी की है जिसने अपनी मेहनत के दम पर एक बड़ा साम्राज्य खड़ा कर लिया है। IIT गुवाहाटी की एक पूर्व छात्रा ने जब इस वेंडर से उसकी आय के बारे में बात की तो वहां मौजूद सभी लोग अपनी कॉर्पोरेट नौकरी की तुलना में इस छोटे से दिखने वाले काम के मुनाफे को देखकर हैरान रह गए।

Street Vendor Success Story: एक ठेले से लाखों का शुद्ध मुनाफा

वैष्णवी श्रीवास्तव जो IIT गुवाहाटी की ग्रेजुएट हैं उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक गोलगप्पे वाले का साक्षात्कार लिया और उनके इस अनुभव ने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है। वीडियो में बताया गया है कि यह वेंडर हर महीने एक ही ठेले से लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाता है जो कि किसी भी मध्यम स्तर के कॉर्पोरेट कर्मचारी की सैलरी से काफी अधिक है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह राशि उसकी कुल बिक्री नहीं है बल्कि कच्चा माल और अन्य खर्च निकालने के बाद बचने वाली उसकी अपनी कमाई है। इस वेंडर के काम करने का तरीका भी काफी व्यवस्थित है क्योंकि वह शाम को 4 बजे अपनी दुकान लगाता है और रात 10 बजे तक अपना काम समेटकर घर चला जाता है।

चार आउटलेट्स और साढ़े चार लाख की मासिक आय

इस स्ट्रीट वेंडर की सफलता की कहानी यहीं पर समाप्त नहीं होती क्योंकि उसकी व्यावसायिक सूझबूझ ने उसे शहर के अन्य हिस्सों में भी पैर पसारने का मौका दिया है। बातचीत के दौरान यह खुलासा हुआ कि वह केवल एक ठेला नहीं चलाता बल्कि शहर के विभिन्न स्थानों पर उसके कुल चार आउटलेट्स संचालित होते हैं। अगर इन चारों ठेलों से होने वाले मुनाफे को जोड़ दिया जाए तो इस गोलगप्पे वाले की कुल मासिक आय साढ़े चार लाख रुपये से भी ज्यादा बैठती है। यह आंकड़ा सुनकर वीडियो में मौजूद IIT दिल्ली, IIT कानपुर और IIT हैदराबाद के ग्रेजुएट्स काफी असहज महसूस करने लगे क्योंकि उनकी सालाना पैकेज की तुलना में यह वेंडर कहीं अधिक कमा रहा था।

Street Vendor Success Story: खुद का घर और लग्जरी कार का मालिक

आमतौर पर लोगों की धारणा होती है कि सड़क किनारे काम करने वाले लोग आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं लेकिन इस वेंडर ने उस सोच को पूरी तरह से बदल दिया है। वैष्णवी ने वीडियो में जानकारी दी कि यह गोलगप्पे वाला किसी किराए के कमरे में नहीं रहता है बल्कि उसका अपना खुद का आलीशान घर है। इतना ही नहीं उसके घर के दरवाजे पर महिंद्रा स्कोर्पियो जैसी दमदार गाड़ी खड़ी रहती है जिसे वह अपनी मेहनत की कमाई से मेंटेन करता है। इस लाइफस्टाइल को देखकर IIT ग्रेजुएट्स ने मजाकिया लहजे में कहा कि उन्हें अपनी पढ़ाई और नौकरी पर अब शर्मिंदगी महसूस हो रही है क्योंकि एक छोटा सा दिखने वाला बिजनेस उन्हें कड़ी टक्कर दे रहा है।

जमीनी हकीकत और शारीरिक मेहनत का पक्ष

हालांकि इस कहानी का एक दूसरा पहलू भी है जिसे सोशल मीडिया यूजर्स ने प्रमुखता से उठाया है और IIT ग्रेजुएट्स को वास्तविकता का आईना दिखाया है। कुछ लोगों ने टिप्पणी की है कि भले ही वेंडर ठेले पर केवल 6 घंटे खड़ा रहता है लेकिन उस बिक्री के लिए उसे घर पर कई घंटों तक तैयारी करनी पड़ती है। पानी तैयार करना, मटर उबालना और पूरियां बनाने में लगने वाला समय और मेहनत अक्सर लोगों की नजरों से ओझल रह जाती है। इसके अलावा एक कॉर्पोरेट कर्मचारी जहां ऑफिस में एसी और आरामदायक कुर्सी पर बैठकर काम करता है वहीं यह वेंडर धूल, प्रदूषण, भीषण गर्मी और कड़ाके की ठंड में सड़क पर खड़ा रहकर अपना गुजारा करता है।

Street Vendor Success Story: क्या है पूरा मामला

अंत में यह बहस पैसे और प्रतिष्ठा के बीच आकर टिक जाती है क्योंकि कई लोगों का मानना है कि केवल कमाई से सफलता को नहीं मापा जा सकता है। IIT की डिग्री प्राप्त करने के लिए की गई मेहनत और उसके बाद मिलने वाला सम्मान एक अलग ही स्तर का होता है जिसे किसी भी राशि से नहीं खरीदा जा सकता। फिर भी इस गोलगप्पे वाले की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो किसी भी काम को छोटा समझते हैं और यह साबित करती है कि यदि सही रणनीति और मेहनत के साथ कोई भी काम किया जाए तो उसमें अपार संभावनाएं छिपी होती हैं। यह पूरा वाकया वर्तमान समय में स्वरोजगार और उद्यमशीलता के बढ़ते महत्व को रेखांकित करता है।

Read More Here

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.