Vantara Jamnagar: 18 महीने की हथिनी माया को मिला नया जीवन, वंतारा में चल रहा गंभीर बीमारियों का इलाज

Vantara Jamnagar: गंभीर बीमारियों से जूझ रही 18 महीने की हथिनी माया का जामनगर के वंतारा में इलाज चल रहा है और उसकी देखभाल के लिए विशेषज्ञ जुटे हैं।

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Vantara Jamnagar: गुजरात के जामनगर स्थित प्रसिद्ध वंतारा में इन दिनों अठारह महीने की एक छोटी हथिनी माया का विशेष उपचार चल रहा है जो जन्म के बाद से ही लगातार संघर्षों का सामना कर रही है। केरल में जन्म के तुरंत बाद माया का झुंड उसे नदी के पास अकेला छोड़ गया था जिसके कारण वह अपनी मां से बिछड़ गई थी और गंभीर रूप से कमजोर हो गई थी। वन विभाग के अधिकारियों ने शुरुआती दौर में उसकी पूरी देखभाल की और लगभग डेढ़ साल तक उसे सुरक्षित रखा। वर्तमान में उसकी हड्डियां इतनी कमजोर हो चुकी हैं कि वह अपने पैरों पर खड़ी भी नहीं हो पा रही है और एक गंभीर बीमारी से जूझ रही है। उसकी बिगड़ती हुई स्थिति को देखते हुए और बेहतर चिकित्सा की उम्मीद में छह नवंबर को उसे विशेष विमान से एयरलिफ्ट करके गुजरात लाया गया है। यह पूरी व्यवस्था अनंत अंबानी के वंतारा द्वारा केरल के मुख्य वन्यजीव वार्डन के आदेश के बाद की गई है ताकि इस बेजुबान जानवर को नया जीवन मिल सके।

Vantara Jamnagar: जन्म के समय से ही शुरू हुआ था माया का कड़ा संघर्ष

केरल के मलयाट्टूर डिवीजन के काप्रिक्कड़ इलाके में उन्नीस अप्रैल को मिली यह हथिनी अपनी मां का पहला दूध तक नहीं पी सकी थी क्योंकि वह अत्यधिक कमजोरी की स्थिति में थी। वन विभाग की टीम ने उसे तुरंत बचाकर अभयारण्य पहुंचाया जहां पशु चिकित्सक डॉ. बिनॉय सी बाबू और उनकी टीम ने उसकी जिम्मेदारी संभाली। उसे दिन-रात लगातार दूध और आवश्यक पोषण दिया गया जिससे वह धीरे-धीरे अपने देखभाल करने वालों के साथ घुल-मिल गई। विशेष रूप से निखिल बाबू के साथ उसका बहुत गहरा और खास लगाव हो गया था जो उसकी हर जरूरत का पूरा ध्यान रखते थे। शुरुआती कुछ महीनों तक सब कुछ ठीक चल रहा था और वन विभाग की देखरेख में उसका शारीरिक विकास भी हो रहा था लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

जुलाई में लगी चोट और फिर गंभीर होती चली गई बीमारी

बीते वर्ष जुलाई महीने में खेलते समय माया अचानक फिसल गई और उसके कंधे में गंभीर चोट लग गई थी जिसे शुरुआत में एक सामान्य चोट माना गया था। हालांकि समय के साथ उसकी हालत सुधरने के बजाय लगातार बिगड़ती चली गई और उसकी हड्डियां अंदर से बहुत ज्यादा कमजोर होने लगीं। अक्टूबर महीने तक आते-आते उसके आगे के दोनों पैरों में फ्रैक्चर हो गया जिसके कारण उसका चलना-फिरना पूरी तरह बंद हो गया। इन शारीरिक समस्याओं के अलावा उसे सीने में संक्रमण और लगातार लेटने के कारण शरीर पर दबाव के घाव भी हो गए। इस दयनीय स्थिति के कारण वह अपने पैरों पर खड़ी होने में पूरी तरह असमर्थ हो गई और उसे मुख्य रूप से लिक्विड डाइट पर रखा जाने लगा।

Vantara Jamnagar: मेडिकल बोर्ड की इच्छामृत्यु की सलाह के बाद हुआ बड़ा फैसला

अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में माया की असहनीय तकलीफ और लगातार गिरती सेहत को देखते हुए एक मेडिकल बोर्ड ने उसे इच्छामृत्यु देने की सिफारिश कर दी थी। हालांकि केरल के मुख्य वन्यजीव वार्डन डॉ. पीं पुगाझेंडी ने इस संवेदनशील मामले में अन्य बड़े विशेषज्ञों से भी सलाह लेने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। हाथियों के विशेषज्ञ पशु चिकित्सक डॉ. कुशल कोंवर शर्मा ने आशंका जताई कि माया को पैराथायरॉइड ग्रंथि से जुड़ी कोई गंभीर बीमारी हो सकती है जिसका सीधा असर हड्डियों पर पड़ता है। इसके बाद उन्होंने इसके इलाज की अन्य संभावनाओं को तलाशने की सलाह दी जिस पर सहमति बनते हुए उसे गुजरात भेजने का रास्ता साफ हुआ। छह नवंबर को विशेष चिकित्सा निगरानी और जीवन रक्षक उपकरणों के साथ उसे हवाई मार्ग से जामनगर पहुंचाया गया जिसमें उसका परिचित देखभालकर्ता निखिल बाबू भी साथ था।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में चल रहा है इलाज और आगे की योजना

वंतारा में पहुंचने के बाद माया को देश के बेहतरीन विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है जहाँ उसे आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं दी जा रही हैं। यहाँ उसे दर्द से राहत दिलाने वाली दवाएं, जरूरी मेडिकल जांच और सुरक्षित तरीके से उठाने-ले जाने के लिए खास उपकरणों का लाभ मिल रहा है। वंतारा के सीईओ विवान करानी का कहना है कि माया ने अपनी जिंदगी के हर दिन के लिए कड़ा संघर्ष किया है और अब उनकी टीम उसके लिए पूरी ताकत से संघर्ष करेगी। केरल वन विभाग भी लगातार उसके स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए है और यदि माया की सेहत में इतना सुधार होता है कि वह सुरक्षित रह सके तो उसे वापस केरल के अभयारण्य में भेजने की योजना है।

Vantara Jamnagar: क्या माया की जिंदगी बचाने में कामयाब होंगे डॉक्टर

वर्तमान में डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती माया की कमजोर हड्डियों और इस गुप्त बीमारी की असली वजह का पता लगाने की है। हालांकि उसकी रिकवरी को लेकर अभी कुछ भी निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता है लेकिन वंतारा में मिलने वाले विश्वस्तरीय इलाज से उसके ठीक होने की उम्मीद अभी भी पूरी तरह कायम है।

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