Gold Silver Dhanteras Sales: धनतेरस पर भाव गिरने से चमका बाजार, उमड़ी खरीदारों की भीड़

Gold Silver Dhanteras Sales: धनतेरस पर सोने और चांदी के भाव में गिरावट से बाजारों में खरीदारों की भीड़ बढ़ी और ज्वेलरी कारोबार में रौनक दिखी।

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Gold Silver Dhanteras Sales: इस साल धनतेरस के पावन अवसर पर सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट ने ग्राहकों के लिए खरीदारी करना काफी आसान बना दिया, जिससे देश भर के सर्राफा बाजारों में खरीदारों का तांता लग गया। अखिल भारतीय रत्न एवं आभूषण घरेलू परिषद के शुरुआती अनुमान के मुताबिक इस बार धनतेरस के दिन सोने का कुल कारोबार लगभग साठ हजार करोड़ रुपये तक रहने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। पिछले कुछ महीनों में कीमती धातुओं के दामों में नरमी आने से बाजार की धारणा बेहद सकारात्मक हुई है और आम लोगों ने दुकानों का रुख किया है। ग्राहक अपनी जरूरत और बजट के मुताबिक हल्के वजन के सामान के साथ अठारह कैरेट के आभूषणों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे बाजार में लगातार चहल-पहल बनी हुई है। आभूषण कारोबारियों का यह भी मानना है कि इस बार त्योहारी सीजन में बिक्री के आंकड़े पिछले साल की तुलना में काफी बेहतर स्थिति में पहुंच गए हैं। पिछले साल की तुलना में इस बार ग्राहकों की आवाजाही में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे पूरे देश के व्यापारी वर्ग में भारी उत्साह का माहौल है।

Gold Silver Dhanteras Sales: कीमतों में नरमी से बढ़ी ग्राहकों की दिलचस्पी

कीमती धातुओं के बाजार पर नजर डालें तो पिछले चार से छह महीनों के दौरान सोने और चांदी के भाव में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को चौबीस कैरेट सोने का भाव कर सहित एक लाख छियालीस हजार तीन सौ रुपये प्रति दस ग्राम दर्ज किया गया, जो इस साल उनतीस जनवरी को देखे गए रिकॉर्ड स्तर से लगभग बीस प्रतिशत कम है। हालांकि पिछले साल धनतेरस पर सोने का भाव एक लाख बत्तीस हजार चार सौ रुपये था। इसी तरह चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट आई है और यह इस साल जनवरी के उच्चतम स्तर से काफी नीचे आ चुकी है, हालांकि यह पिछले साल के मुकाबले अब भी अधिक है। दामों में इस नरमी की वजह से त्योहारी खरीदारी को एक बेहद मजबूत अतिरिक्त बढ़ावा मिला है और लोग खुलकर खरीदारी कर रहे हैं।

छोटे शहरों से लेकर महानगरों तक शानदार मांग

देश के विभिन्न हिस्सों से आ रही रिपोर्ट बताती है कि केवल बड़े महानगरों में ही नहीं बल्कि छोटे शहरों में भी सोने और चांदी की मांग में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। जयपुर, देहरादून, सूरत, बेलगावी, आरा और रायपुर जैसे छोटे शहरों में ग्राहकों ने दुकानों पर पहुंचकर बढ़-चढ़कर खरीदारी की है। आभूषण कारोबारियों का कहना है कि पश्चिम और उत्तर भारत के बाजारों में व्यापारिक गतिविधियां सबसे ज्यादा सक्रिय रहीं। इसके अलावा पहले से मिली हुई बुकिंग ने भी बाजार की स्थिति को और अधिक मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है। ग्राहकों की बढ़ती संख्या के कारण तमाम बड़े ब्रांड्स और स्थानीय दुकानदारों दोनों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही है।

Gold Silver Dhanteras Sales: चांदी और हल्के आभूषणों की विशेष चमक

इस बार के धनतेरस पर सोने के साथ-साथ चांदी की मांग में भी अभूतपूर्व तेजी देखने को मिली है, जिससे सर्राफा कारोबार को एक नया आयाम मिला है। उद्योग संघ के अनुसार इस बार चांदी की बिक्री के मूल्य में तीस प्रतिशत और मात्रा में दस प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। ग्राहकों की प्राथमिकताओं में बदलाव भी साफ तौर पर देखा जा रहा है जहां लोग बड़े आकार के गहनों के बजाय पेंडेंट, चूड़ियां, चेन और छोटे सिक्के खरीदने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। जानकारों का कहना है कि लोग अलग-अलग कीमतों पर किस्तों के माध्यम से भी कीमती धातुओं में निवेश कर रहे हैं, जिससे बाजार का दायरा लगातार व्यापक होता जा रहा है।

वैकल्पिक माध्यमों और निवेश के नए रुझान

पारंपरिक आभूषणों की खरीद के साथ-साथ इस बार आधुनिक और वैकल्पिक वित्तीय माध्यमों के जरिए भी सोने में निवेश को बढ़ावा मिला है। विश्व स्वर्ण परिषद के अधिकारियों का मानना है कि दुकानों पर ग्राहकों की भारी भीड़ के अलावा लोगों ने एक्सचेंज ट्रेडेड फंड और डिजिटल गोल्ड जैसे विकल्पों में भी खुलकर पैसा लगाया है। शादी-ब्याह के सीजन की मांग और पुराने सोने के बदले नए आभूषण बनवाने के चलन ने भी इस बार के बाजार को बहुत मजबूत समर्थन दिया है। इस प्रकार धनतेरस के इस पावन पर्व पर कुल मिलाकर देश का सर्राफा बाजार उम्मीदों से कहीं बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहा है।

Gold Silver Dhanteras Sales: आगे कैसा रहेगा बाजार का रुख?

व्यापारिक संगठनों और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में भी शादियों का सीजन होने के कारण सोने और चांदी की मांग में तेजी का यह सिलसिला इसी तरह लगातार जारी रह सकता है। ग्राहकों के रुख को देखते हुए यह साफ है कि कीमती धातुओं के प्रति भारतीय उपभोक्ताओं का पारंपरिक और आधुनिक दोनों रूपों में लगाव पूरी तरह बरकरार है।

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