पटाखों से डरता है आपका Pet Dog? दिवाली पर ऐसे रखें उसे सुरक्षित और तनावमुक्त
दिवाली पर पटाखों की तेज आवाज और धुएं से पालतू कुत्ते घबरा सकते हैं।
Diwali 2026: प्रकाश पर्व दीपावली उल्लास, रोशनी और मिलनसारिता का प्रतीक है, किंतु पटाखों की अनवरत गूंज और बारूद का तीखा धुआं मूक पालतू जानवरों, विशेषकर कुत्तों के लिए गहरा शारीरिक और मानसिक आघात लेकर आता है। अचानक होने वाले तेज धमाकों और रोशनी की चमचमाहट से अधिकांश श्वान बुरी तरह सहम जाते हैं। कई बार घबराहट और आतंक के मारे वे असामान्य रूप से भौंकने लगते हैं, घर के अंधेरे कोनों में दुबक जाते हैं या भयभीत होकर बाहर की ओर भागने का प्रयास करते हैं। त्योहार की खुशियां तभी सार्थक मानी जा सकती हैं जब घर के सबसे वफादार और संवेदनशील सदस्य भी पूरी तरह सुरक्षित और सुकून में रहें।
पशु व्यवहार वैज्ञानिकों के अनुसार, कुत्तों की श्रवण क्षमता (Hearing Sensitivity) मानव कान की तुलना में लगभग चार गुना अधिक तीव्र होती है। वे उन अल्ट्रासोनिक आवृत्तियों को भी सुन सकते हैं जो मनुष्य के लिए अगोचर होती हैं। ऐसे में जो धमाका हमारे लिए सामान्य होता है, वह उनके कानों और तंत्रिका तंत्र के लिए अत्यधिक पीड़ादायक सिद्ध होता है। थोड़ी सी सतर्कता और पूर्व योजना अपनाकर आप अपने पेट को इस तनावपूर्ण माहौल से आसानी से सुरक्षित रख सकते हैं।
Diwali 2026: पटाखों की अचानक आवाज से क्यों आतंकित होते हैं कुत्ते?
कुत्तों के लिए पटाखों का शोर अस्वाभाविक और अप्रत्याशित होता है। चूंकि वे प्राकृतिक रूप से गड़गड़ाहट या अज्ञात धमाकों को किसी आसन्न खतरे के रूप में पहचानते हैं, इसलिए उनका ‘फाइट या फ्लाइट’ (Fight or Flight) रेस्पॉन्स तुरंत सक्रिय हो जाता है। वे यह अनुमान नहीं लगा पाते कि तेज आवाज किस दिशा से आ रही है और कब बंद होगी।
गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (GADVASU) के पशु स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक घबराहट की दशा में पालतू जानवरों में निरंतर हांफना, मुंह से अत्यधिक लार टपकना, दिल की धड़कनें तेज होना, भोजन से पूरी तरह मुंह मोड़ लेना और कांपते हुए शरीर को सिकोड़ लेना जैसे स्पष्ट लक्षण देखे जाते हैं। यदि समय रहते उनके तनाव को प्रबंधित न किया जाए, तो यह भय उनके दीर्घकालिक व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
घर के भीतर तैयार करें सुरक्षित और शांत आश्रय स्थल
त्योहार की शाम शुरू होने से पहले ही घर के सबसे भीतरी और शांत हिस्से में अपने डॉग के लिए एक सुरक्षित ‘सेफ जोन’ या पनाहगाह तैयार कर दें। यह स्थान कमरे का वह कोना, सीढ़ियों के नीचे की जगह या मास्टर बेडरूम हो सकता है जहां बाहर की आवाजें सबसे कम पहुंचती हों।
उस स्थान पर उसका परिचित बिस्तर, गद्देदार गद्दी, पुराने उपयोग किए हुए कंबल और पसंदीदा खिलौने रख दें, ताकि उसे अपनी जानी-पहचानी खुशबू और सुरक्षा का अहसास हो। शाम ढलते ही घर की सभी बाहरी खिड़कियां, शीशे और दरवाजे अच्छी तरह बंद कर दें तथा मोटे पर्दे गिरा दें। पर्दों की मौजूदगी बाहर के प्रकाश और तेज आवाजों की तीव्रता को काफी हद तक सोख लेती है। यदि डॉग डरकर अलमारी या सोफे के नीचे शरण ले, तो उसे बलपूर्वक बाहर खींचने की भूल न करें।
सफेद शोर (White Noise) और मधुर संगीत का लें सहारा
बाहर के पटाखों के अचानक होने वाले धमाकों के प्रभाव को दबाने के लिए घर के भीतर पृष्ठभूमि संगीत या टीवी की आवाज को एक समान स्तर पर चालू रखें। संगीत की एक लयबद्ध और निरंतर ध्वनि बाहर से आने वाले तीव्र शोर के अंतर को धुंधला (Dampen) कर देती है।
क्लासिकल म्यूजिक, धीमी बांसुरी की धुन या पेट-फ्रेंडली रिलैक्सेशन ऑडियो ट्रैक इस समय काफी मददगार साबित होते हैं। इसके साथ ही, उसका ध्यान बंटाने के लिए चबाने वाले खिलौने (Chew Toys) या पीनट बटर से भरे ‘कॉन्ग’ (KONG) खिलौने दिए जा सकते हैं। चबाने की प्राकृतिक क्रिया कुत्तों के मस्तिष्क में डोपामाइन और एंडोर्फिन जैसे शांत करने वाले हार्मोन्स को सक्रिय करती है, जिससे उनकी व्यग्रता घटती है।
दिन ढलने से पूर्व ही संपन्न कर लें दैनिक शौच और सैर
दिवाली के दिन अपने डॉग की दिनचर्या में थोड़ा बदलाव करें। शाम के समय जब कॉलोनियों में बच्चे और युवा पटाखे फोड़ना शुरू करते हैं, उससे काफी पहले ही (दोपहर बाद या शाम 4-5 बजे तक) उसे लंबी सैर पर ले जाएं और उसका शौच कार्य पूरा करा लें।
शाम को अंधेरा घिरने के बाद उसे किसी भी परिस्थिति में खुले में न निकालें। यदि किसी कारणवश उसे बाहर ले जाना अपरिहार्य हो, तो हमेशा मजबूत लीश (पट्टा) और हार्नेस का प्रयोग करें। भयभीत होने पर जानवर अप्रत्याशित रूप से छलांग लगाकर भागने का प्रयास करते हैं। सुरक्षा के लिहाज से उसके गले के कॉलर पर आपका मोबाइल नंबर और पता अंकित नेम-टैग अनिवार्य रूप से बंधा होना चाहिए।
पटाखों, बारूद और दीवाली के पकवानों से रखें पूर्ण दूरी
घर में पूजा और सजावट के लिए रखे गए पटाखों के पैकेट, फुलझड़ियां और माचिस को हमेशा ऐसे ऊंचे अलमारियों में रखें जहां डॉग की पहुंच न हो। कई बार जिज्ञासावश या गंध सूंघने के चक्कर में वे बारूद युक्त पटाखों को चबा लेते हैं, जिससे उन्हें जानलेवा रासायनिक विषाक्तता (Toxicity) हो सकती है।
इसी प्रकार जलते हुए मिट्टी के दीये, मोमबत्तियां और बिजली की झालरों की तारों को भी उनकी पहुंच से दूर रखें ताकि पूंछ हिलने या दौड़ने से आग लगने या करंट का खतरा न रहे। इसके अतिरिक्त दिवाली पर बनने वाले तेल-घी के पकवान, मेवे, मिठाइयां और विशेष रूप से चॉकलेट्स उन्हें बिल्कुल न दें। चॉकलेट में मौजूद ‘थियोब्रोमाइन’ और मिठाइयों का अत्यधिक मीठा-मसालेदार अंश कुत्तों के लिवर और पाचन तंत्र के लिए बेहद घातक साबित होता है।
Diwali 2026: अत्यधिक तनाव की स्थिति में पशु चिकित्सक से परामर्श
यदि आपका पालतू कुत्ता प्रतिवर्ष पटाखों के शोर से असामान्य रूप से भयभीत होता है, अत्यधिक कांपता है या अनियंत्रित हो जाता है, तो समय रहते अपने नजदीकी वेटरनरी डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। पशु चिकित्सक स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षित माइल्ड सिडेटिव्स, मेलाटोनिन सप्लीमेंट्स या एंटी-एंजाइटी फेरोमोन स्प्रे (DAP) की संस्तुति कर सकते हैं।
किसी भी स्थिति में इंसानों द्वारा उपयोग की जाने वाली नींद या घबराहट की गोलियां अपनी मर्जी से जानवर को न दें, क्योंकि इंसानी दवाएं उनकी आंतरिक कार्यप्रणाली को गंभीर क्षति पहुंचा सकती हैं। त्योहार के दौरान स्वयं भी शांत और सामान्य व्यवहार बनाए रखें, क्योंकि पालतू जानवर अपने मालिक के हाव-भाव और तनाव को तुरंत भांप लेते हैं।
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