23 साल पुराने जेनी प्रकरण पर देहरादून में प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगी जेनी, सबूतों के साथ रखेंगी अपना पक्ष
उत्तराखंड के चर्चित जेनी प्रकरण को लेकर सियासी बयानबाजी के बीच जेनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की घोषणा की है।
Uttarakhand Jenny Case: उत्तराखंड के सियासी गलियारों में 23 साल पुराना बहुचर्चित ‘जेनी प्रकरण’ एक बार फिर भूचाल लाने की तैयारी में है। पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के बीच डीएनए टेस्ट को लेकर छिड़ी तीखी जुबानी जंग के बाद अब इस पूरे मामले की मुख्य पात्र जेनी ने सीधे मैदान में उतरने की घोषणा कर दी है। जेनी ने देहरादून में एक औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर पूरे प्रकरण से जुड़े प्रामाणिक साक्ष्य और दस्तावेज सार्वजनिक मंच पर रखने का ऐलान किया है। उनके इस फैसले से प्रदेश के राजनीतिक तापमान में भारी उबाल आ गया है और दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं की धड़कनें तेज हो गई हैं।
Uttarakhand Jenny Case: 23 साल बाद चुप्पी तोड़ेगी जेनी, सार्वजनिक मंच पर रखेंगी अपना पक्ष
हाल के दिनों में प्रदेश की राजनीति में इस पुराने मामले को लेकर लगातार की जा रही बयानबाजी के बीच जेनी ने सोशल मीडिया पर वीडियो बयान जारी कर अपनी गहरी पीड़ा और नाराजगी व्यक्त की थी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि दो दशकों से अधिक समय तक किसी भी राजनीतिक दल या नेता ने उनकी और उनके बच्चे की सुध नहीं ली, न ही यह जानने का प्रयास किया कि उन्होंने किन कठिन परिस्थितियों में जीवन व्यतीत किया।
जेनी का कहना है कि अब अचानक चुनावी व राजनीतिक लाभ साधने के लिए उनके और उनके बच्चे के अस्तित्व पर सार्वजनिक रूप से सवाल खड़े किए जा रहे हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों और मीडिया से थोड़ा धैर्य रखने की अपील करते हुए स्पष्ट किया था कि वह किसी के पीछे छिपने वाली नहीं हैं, बल्कि खुद राजधानी देहरादून पहुंचकर संपूर्ण प्रकरण की सच्चाई बयां करेंगी और अपने दावों की पुष्टि के लिए साक्ष्य व दस्तावेज सबके सामने रखेंगी।
क्या था वर्ष 2003 का सनसनीखेज जेनी प्रकरण?
यह विवाद जून 2003 का है, जब उत्तराखंड राज्य गठन के प्रारंभिक दौर में कांग्रेस की एनडी तिवारी सरकार सत्ता में थी। असम मूल की रहने वाली जेनी ने देहरादून के सरकारी दून अस्पताल में एक नवजात शिशु को जन्म दिया था। उस दौरान जेनी ने तत्कालीन राजस्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें उस नवजात का जैविक पिता बताया था।
इस खुलासे के बाद प्रदेश की राजनीति में जबरदस्त भूचाल आ गया था। 18 जून 2003 को विपक्षी दल भाजपा ने विधानसभा के पटल पर इस मुद्दे को लेकर उग्र प्रदर्शन किया और सदन की कार्यवाही ठप कर दी थी। चौतरफा राजनीतिक दबाव और नैतिक संकट के बीच हरक सिंह रावत को तत्कालीन तिवारी मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा था। जनदबाव और विपक्ष की मांग को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को संस्तुति भेजी थी।
सीबीआई जांच और डीएनए परीक्षण का विधिक नतीजा
मामले की जांच अपने हाथ में लेने के बाद सीबीआई ने वैज्ञानिक साक्ष्यों को आधार बनाते हुए बच्चे और तत्कालीन मंत्री हरक सिंह रावत के रक्त के नमूने लेकर फॉरेंसिक डीएनए मिलान कराया था। हैदराबाद स्थित प्रतिष्ठित फॉरेंसिक लैब से आई विस्तृत रिपोर्ट में बच्चे के डीएनए का मिलान हरक सिंह रावत के डीएनए प्रोफाइल से नहीं हुआ था।
वैज्ञानिक रिपोर्ट में डीएनए मैच न होने के उपरांत जांच एजेंसी ने अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसके आधार पर हरक सिंह रावत को इस मामले में क्लीन चिट मिल गई थी। इसके बाद हरक सिंह रावत पुनः मुख्यधारा की राजनीति में सक्रिय हुए और विभिन्न सरकारों में महत्वपूर्ण मंत्रालयों का दायित्व संभाला। हालिया विवाद के दौरान भी हरक सिंह रावत इसी विधिक और फॉरेंसिक निष्कर्ष का हवाला देते हुए अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को सिरे से खारिज करते रहे हैं।
महेंद्र भट्ट के बयान से भड़की सियासी चिंगारी
यह मामला तब पुनः गर्मा गया जब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने एक सार्वजनिक मंच से जेनी प्रकरण का उल्लेख करते हुए सवाल उठा दिया कि यदि बच्चे के पिता हरक सिंह रावत नहीं थे, तो वास्तविक पिता की पहचान प्रदेश की जनता के सामने उजागर होनी चाहिए। महेंद्र भट्ट के इस बयान पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया और हरक सिंह रावत ने इसे अपनी छवि धूमिल करने की सोची-समझी साजिश करार दिया।
हरक सिंह रावत ने पलटवार करते हुए कहा कि जब देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी सीबीआई उनकी डीएनए जांच करा चुकी है और उन्हें क्लीन चिट मिल चुकी है, तो बार-बार यह मुद्दा उठाना राजनीति का निम्नतम स्तर है। इसके साथ ही उन्होंने महेंद्र भट्ट को भी अपनी डीएनए जांच कराने की सीधी चुनौती दे डाली। इस पर महेंद्र भट्ट ने भी पीछे न हटते हुए बयान दिया कि वे किसी भी प्रकार की जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं।
‘मेरे सम्मान और बच्चे पर राजनीति बंद हो’: जेनी की दो टूक
सियासी दलों के बीच चल रहे इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच जेनी ने वीडियो संदेश के माध्यम से कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि उनके व्यक्तिगत जीवन और मातृत्व को राजनीतिक अखाड़े का मोहरा नहीं बनाया जाना चाहिए।
जेनी का दावा है कि उनके साथ 23 वर्ष पूर्व वास्तव में क्या हुआ था और इसके पीछे कौन-कौन से चेहरे शामिल थे, इसका संपूर्ण सत्य वे जानती हैं। उन्होंने दोहराया कि वे हवा-हवाई बयानबाजी करने के बजाय ठोस कानूनी दस्तावेजों, मेडिकल रिकॉर्ड्स और अन्य साक्ष्यों के साथ प्रेस के सामने आएंगी ताकि जनता के सामने सच आ सके।
Uttarakhand Jenny Case: देहरादून प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें
अब देहरादून में प्रस्तावित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर तेज है। राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जेनी 2003 की घटना से जुड़े किन अनसुलझे पहलुओं को उजागर करती हैं और किन नए या पुराने दस्तावेजों को सार्वजनिक करती हैं।
इस प्रेस वार्ता के बाद डॉ. हरक सिंह रावत, महेंद्र भट्ट और दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों का क्या रुख रहता है, यह देखना दिलचस्प होगा। वर्तमान में यह मामला कानूनी रूप से पूर्व में पूरी हो चुकी सीबीआई रिपोर्ट और दोनों पक्षों के सार्वजनिक दावों तक सीमित है, लेकिन जेनी के सीधे हस्तक्षेप से उत्तराखंड की राजनीति में नए समीकरण बनने के आसार नजर आ रहे हैं।
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