Stock Market Today: सेंसेक्स 100 अंक चढ़ा, ONGC टॉप गेनर; निफ्टी संभला
भारी बिकवाली के बाद बाजार में हल्की तेजी, ONGC समेत एनर्जी शेयरों में खरीदारी से मिला सहारा
Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार में पिछले कई कारोबारी सत्रों से जारी भारी बिकवाली और दबाव के बाद गुरुवार को कारोबार की शुरुआत हल्की बढ़त और स्थिरता के साथ हुई। शुरुआती सत्र में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स लगभग 100 अंक ऊपर खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी 50 ने भी हरे निशान के साथ कारोबार की शुरुआत की। हालांकि, शुरुआती खरीदारी के कुछ ही मिनटों बाद दोनों प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों में तेज उतार-चढ़ाव (वोलेटिलिटी) देखने को मिला।
बाजार का व्यापक माहौल अभी भी सतर्कता भरा है क्योंकि निवेशक पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक तनाव, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती और भारतीय रुपये के ऐतिहासिक निचले स्तरों पर नजर बनाए हुए हैं। ऐसे अनिश्चित वैश्विक परिवेश के बीच गुरुवार के शुरुआती सत्र में सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज तेल व गैस उत्पादक कंपनी ओएनजीसी (ONGC) के शेयरों में जोरदार लिवाली दर्ज की गई और वह बाजार का प्रमुख टॉप गेनर बनकर उभरा।
Stock Market Today: शुरुआती कारोबार में सीमित बढ़त, बाद में इंडेक्स में उतार-चढ़ाव
गुरुवार की सुबह शेयर बाजार की शुरुआत पिछले कारोबारी सत्र की भारी गिरावट से जूझ रहे निवेशकों के लिए थोड़ी राहत भरी रही। गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) से मिले सुस्त संकेतों के बावजूद घरेलू बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में निफ्टी 50 लगभग 0.06 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 23,446.60 के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि सेंसेक्स शुरुआती 100 अंकों की बढ़त गंवाकर 74,742.54 के स्तर पर लगभग सपाट होकर संघर्ष करता नजर आया।
सूचकांकों की यह चाल दर्शाती है कि निचले स्तरों पर वैल्यू बाइंग (सस्ते शेयरों की खरीद) तो हो रही है, लेकिन ऊपरी स्तरों पर बिकवाली का दबाव तुरंत हावी हो जाता है। निवेशक किसी भी बड़ी तेजी में मुनाफावसूली को तरजीह दे रहे हैं, जिससे बाजार में एकतरफा मजबूती का अभाव साफ दिखाई दे रहा है।
पिछले सत्र में बाजार को लगा था बड़ा झटका: सेंसेक्स 813 अंक टूटा था
गुरुवार की इस सुस्त और सतर्क चाल के पीछे बुधवार का कारोबारी सत्र है, जब दलाल स्ट्रीट पर भयंकर बिकवाली का दौर देखने को मिला था। बुधवार को सेंसेक्स 813.35 अंक यानी 1.08 प्रतिशत का गोता लगाकर 74,764.23 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी में 203.60 अंक (0.86 प्रतिशत) की गिरावट आई थी और यह 23,431.50 पर बंद हुआ था।
इस तीव्र गिरावट से पहले के पिछले आठ कारोबारी सत्रों में से सात सत्रों में बाजार लाल निशान में बंद हुआ था, जिसके दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में 3 प्रतिशत से अधिक का सामूहिक नुकसान दर्ज किया गया। लगातार बिकवाली के बाद तकनीकी स्तरों पर बाजार ओवरसोल्ड जोन में था, जिसके चलते गुरुवार को यह तकनीकी पुलबैक (हल्का सुधार) देखने को मिला।
ONGC बना बाजार का टॉप गेनर: ब्रेंट क्रूड में उबाल से शेयरों को मिली मजबूती
गुरुवार के शुरुआती कारोबार में एनर्जी और ऑयल सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा चमक देखने को मिली। इनमें ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) का शेयर सबसे आगे रहा और लगभग 2 प्रतिशत तक चढ़कर निफ्टी के शीर्ष लाभ कमाने वाले शेयरों में शामिल हो गया। इसके साथ ही ऑयल इंडिया और गेल जैसे शेयरों में भी सकारात्मक रुझान दर्ज किया गया।
अपस्ट्रीम ऑयल कंपनियों के शेयरों में इस तेजी का सीधा संबंध अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों से है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड महंगा होता है, तो कच्चा तेल निकालने और बेचने वाली कंपनियों की प्रति बैरल आय (रियलाइजेशन) बढ़ जाती है, जिससे उनके लाभ मार्जिन में सुधार की उम्मीद बंधती है।
100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा कच्चा तेल: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा
घरेलू शेयर बाजार के लिए इस समय सबसे बड़ा सिरदर्द अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की अनियंत्रित चाल है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते सैन्य संघर्ष और प्रमुख तेल आपूर्ति मार्गों पर पैदा हुए संकट के कारण ब्रेंट क्रूड वायदा 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर 101 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गया है।
भारत अपनी कुल पेट्रोलियम जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का 100 डॉलर के पार जाना भारत के व्यापार घाटे (ट्रेड डेफिसिट) और चालू खाता घाटे (CAD) को सीधे तौर पर बढ़ाता है। महंगा कच्चा तेल सीधे तौर पर देश में आयातित महंगाई को बढ़ावा देता है, लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ाता है और पेंट, टायर, ऑटोमोबाइल, एविएशन व स्पेशियलिटी केमिकल्स जैसी कंपनियों के इनपुट मार्जिन को बुरी तरह निचोड़ देता है।
रुपया 95 प्रति डॉलर के पार: कमजोर मुद्रा ने बढ़ाई विदेशी निवेशकों की चिंता
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती का दोहरा असर भारतीय रुपये पर देखने को मिला है। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट दर्ज करते हुए 95 के पार फिसलकर 95.10 प्रति डॉलर के सर्वकालिक निचले स्तर के करीब पहुंच गया।
मुद्रा में इस तीव्र गिरावट का असर उन सभी कंपनियों पर पड़ता है जिन पर विदेशी मुद्रा में कर्ज है या जो कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर हैं। दूसरी ओर, जब घरेलू मुद्रा लगातार टूटती है, तो विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के लिए डॉलर टर्म में रिटर्न कम हो जाता है, जिससे वे भारतीय इक्विटी बाजार से अपनी पूंजी निकालने के लिए विवश होते हैं।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली बनाम घरेलू निवेशकों (DII) का सहारा
शेयर बाजार में इस समय विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों के बीच खींचतान की स्थिति बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, बुधवार के सत्र में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध रूप से ₹583 करोड़ के शेयरों की बिकवाली की।
हालांकि, विदेशी पूंजी की इस निकासी के सामने घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs), विशेषकर म्यूचुअल फंड्स और घरेलू वित्तीय संस्थानों ने बाजार को मजबूती से थामा। घरेलू निवेशकों ने बुधवार को कुल ₹1,509 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की। खुदरा निवेशकों द्वारा हर महीने म्यूचुअल फंड्स में डाली जा रही मजबूत एसआईपी (SIP) पूंजी के कारण ही घरेलू फंड्स बाजार में तेज गिरावट के समय सहारा प्रदान कर रहे हैं।
वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेत: फेडरल रिजर्व और बॉन्ड यील्ड पर नजर
अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भी भारतीय बाजार को कोई ठोस और मजबूत सहारा नहीं मिल पा रहा है। गुरुवार को एशियाई बाजारों में निक्केई, हैंग सेंग और कोस्पी में मिला-जुला रुख देखा गया। अमेरिकी वॉल स्ट्रीट पर भी प्रमुख सूचकांक डाउ जोंस, एसएंडपी 500 और नैस्डैक पिछले कारोबारी दिन दबाव में बंद हुए थे।
इसके साथ ही, अमेरिका में 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड में मजबूती बनी हुई है, जो दर्शाती है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की गति धीमी रह सकती है। आने वाले अमेरिकी मुद्रास्फीति और श्रम आंकड़ों से पहले वैश्विक फंड मैनेजर्स सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
आगे कैसी रह सकती है बाजार की दिशा?
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि गुरुवार को दिखी यह शुरुआती 100 अंकों की बढ़त किसी नए तेजी के दौर का संकेत नहीं है, बल्कि यह एक सीमित दायरे में होने वाला कंसॉलिडेशन है। जब तक कच्चा तेल 95 डॉलर से नीचे नहीं आ जाता और भू-राजनीतिक मोर्चे पर शांति के ठोस संकेत नहीं मिलते, तब तक भारतीय बाजारों में उतार-चढ़ाव और ऊपरी स्तरों पर बिकवाली का सिलसिला जारी रह सकता है।
निफ्टी के लिए तात्कालिक रूप से 23,350 से 23,300 का स्तर मजबूत सपोर्ट के रूप में काम कर रहा है, जबकि ऊपर की तरफ 23,600 और 23,750 के स्तर पर कड़ा रेजिस्टेंस (रुकावट) बना हुआ है। जब तक निफ्टी इन स्तरों के ऊपर टिककर बंद नहीं होता, तब तक निवेशकों को किसी आक्रामक खरीदारी से बचना चाहिए।
Stock Market Today: निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
मौजूदा अत्यधिक अस्थिर माहौल में खुदरा निवेशकों को अत्यधिक सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है। बाजार में रोजाना होने वाले 100-200 अंकों के उतार-चढ़ाव को देखकर पैनिक सेलिंग या अंधाधुंध खरीदारी करने से बचना चाहिए।
ऐसे समय में केवल मजबूत बुनियादी ढांचे (फंडामेंटल्स), कम कर्ज और स्पष्ट कैश-फ्लो वाली कंपनियों के शेयरों पर ध्यान देना चाहिए। निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित रणनीति नियमित एसआईपी के जरिए निवेश जारी रखना और लंपसम पूंजी को चरणबद्ध तरीके से गिरावट के मौकों पर चुनिंदा लार्ज-कैप शेयरों में लगाना
Read More Here
TVK-Congress Alliance: विजय ने किया ‘Secular Social Justice Victory Alliance’ का ऐलान
Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष से पहले बुध का कन्या में गोचर, इन 4 राशियों के लिए शुभ योग
BRICS Summit 2026: दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, 11 देश, एजेंडा और ताकत
Period Diet Tips: पीरियड्स में चाय-कॉफी पीना कितना सुरक्षित, जानें सही मात्रा