Stock market today: शेयर बाजार ने मामूली बढ़त के साथ शुरू किया कारोबार, इन स्टॉक्स में तेज उतार-चढ़ाव
शेयर बाजार ने मामूली बढ़त के साथ शुरू किया कारोबार, निफ्टी-सेंसेक्स में तेज उतार-चढ़ाव, इन स्टॉक्स में मुनाफावसूली
Stock market today: भारतीय वित्तीय बाजार और घरेलू शेयर बाजार (Stock Market) ने आज के कारोबारी सत्र की शुरुआत बहुत ही कड़े, नपे-तुले और मामूली बढ़त के संकेतों के साथ की है। सुबह बाजार खुलते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सूचकांक सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का सूचकांक निफ्टी दोनों ही हरे निशान (Green Zone) पर कारोबार करते हुए दिखाई दिए। लेकिन शुरुआती कुछ मिनटों के बाद ही विभिन्न सेक्टर्स के भीतर एक बहुत ही तेज, उतार-चढ़ाव और वोलेटैलिटी (अस्थिरता) का दौर शुरू हो गया, जिसने इंट्राडे ट्रेडर्स और शॉर्ट टर्म निवेशकों को अपनी रणनीतियों में कड़े बदलाव करने पर पूरी तरह मजबूर कर दिया है। वर्तमान समय में वैश्विक बाजारों से मिलने वाले मिले-जुले संकेतों और घरेलू आर्थिक सांख्यिकीय आंकड़ों के बीच बाजार में एक बहुत बड़ा सस्पेंस बना हुआ है; जिसके कारण बड़े कॉर्पोरेट निवेशक और खुदरा (रिटेल) खरीदार बहुत ज्यादा सतर्कता और मुस्तैदी के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
मार्केट एनालिस्ट्स और ब्रोकिंग फर्म्स के वरिष्ठ विश्लेषकों का स्पष्ट मत है कि आज की यह मामूली बढ़त बाजार की किसी स्थाई मजबूती का संकेत नहीं है, बल्कि यह पिछले सत्रों में हुई बिकवाली के बाद की एक तकनीकी रिकवरी (शॉर्ट कवरिंग) मात्र है। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक समीकरण पूरी तरह स्थिर नहीं हो जाते, तब तक बाजार के सूचकांकों में यह कड़ा उतार-चढ़ाव लगातार जारी रहेगा जो निवेशकों की खुशियों में थोड़ा ब्रेक लगा सकता है। आइए आज के इस विस्तृत और बेहद निष्पक्ष शेयर बाजार समाचार बुलेटिन के माध्यम से गहराई से समझने का प्रयास करते हैं कि आज सुबह के शुरुआती ट्रेड में सेंसेक्स-निफ्टी का क्या गणित रहा, किन सेक्टर्स में सबसे कड़क मुनाफावसूली या खरीदारी देखने को मिली, और बाजार के इस उतार-चढ़ाव वाले दौर में निवेशकों को घाटे से बचने के लिए कौन से कड़े नियमों का पालन करना चाहिए।
Stock market today: बाजार की शुरुआती ओपनिंग का कड़ा गणित और निफ्टी का लाइव एक्शन
मंगलवार सुबह जैसे ही बाजार का लाइव ट्रेडिंग बेल बजा, दलाल स्ट्रीट (Dalal Street) पर एक बहुत ही सुंदर और सकारात्मक विजुअल देखने को मिला। बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर से लगभग 100 अंकों की कड़क छलांग लगाकर हरे निशान पर खुला; और इसी के सुर में सुर मिलाते हुए एनएसई का 50 शेयरों वाला मुख्य सूचकांक निफ्टी भी 30 अंकों की हल्की लेकिन कूटनीतिक बढ़त के साथ ओपन होने में पूरी तरह सफल रहा। शुरुआत के पहले 15 मिनटों में लार्ज-कैप स्टॉक्स में अच्छी लिवाली देखी गई, जिससे ऐसा लगा कि आज बुल्स (तेजड़िए) बाजार पर पूरी तरह से हावी रहने वाले हैं और इंडेक्स एक नया रिकॉर्ड स्थापित करेगा।
लेकिन जैसे ही घड़ी की सुइयां आगे बढ़ीं, ऊपरी स्तरों पर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की तरफ से एक बहुत ही कड़क और अचानक मुनाफावसूली (Profit Booking) का दबाव बाजार पर आ गया। इस बिकवाली के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने अपनी शुरुआती पूरी बढ़त को बहुत तेजी से गंवा दिया और सूचकांक लाल और हरे निशान के बीच हिचकोले खाने लगे; निफ्टी के भीतर एडवांस-डिक्लाइन रेशियो (बढ़ने और घटने वाले शेयरों का अनुपात) भी 50-50 के स्तर पर आकर टिक गया, जो यह साफ तौर पर जाहिर करता है कि इस समय बाजार में खरीदारों और कड़े बिकवालों के बीच एक बहुत ही भयानक और कड़ा द्वंद्व चल रहा है, जिसके कारण छोटे ट्रेडर्स को भारी स्टॉप-लॉस हंटिंग का सामना करना पड़ रहा है।
मुनाफा कमाने वाले कड़क स्टॉक्स और ऑटो-फार्मा शेयरों में आई भारी गिरावट
आज के इस वोलेटाइल कारोबारी सत्र में सेक्टोरल इंडेक्स (विशिष्ट क्षेत्रों के सूचकांकों) की बात करें, तो सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और बैंकिंग सेक्टर्स ने बाजार को नीचे गिरने से बचाने में सबसे बड़ी, कूटनीतिक और कड़क भूमिका निभाई है। टीसीएस (TCS), इंफोसिस और विप्रो जैसी दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयरों में 1.5 प्रतिशत तक की शानदार तेजी दर्ज की गई, क्योंकि अमेरिकी टेक बाजारों से भारतीय कंपनियों के लिए बहुत ही कड़े व सकारात्मक आउटसोर्सिंग इनपुट्स मिले हैं; इसके साथ ही, निजी क्षेत्र के बड़े बैंकों जैसे एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक में भी संस्थागत खरीदारों ने निचले स्तरों पर अच्छी वैल्यू बाइंग की, जिससे बैंक निफ्टी को एक बहुत ही मजबूत और कड़ा सपोर्ट प्राप्त हुआ।
इसके बिल्कुल विपरीत, पिछले कई हफ्तों से रिकॉर्ड तोड़ रफ्तार भर रहे ऑटोमोबाइल (ऑटो) और फार्मास्युटिकल्स (फार्मा) सेक्टर्स के स्टॉक्स में आज एक बहुत ही कड़क और बड़ी गिरावट का रुख देखने को मिला है। मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी दिग्गज वाहन निर्माता कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली के कारण 2 प्रतिशत से अधिक की बड़ी मंदी दर्ज की गई; तथा प्रमुख फार्मा कंपनियों के स्टॉक्स भी आज निवेशकों को आकर्षित करने में पूरी तरह असमर्थ रहे क्योंकि इन सेक्टर्स का सांख्यिकीय मूल्यांकन (Valuation) अपनी वास्तविक अर्निंग्स से काफी ज्यादा ऊपर जा चुका था, जिसके चलते बड़े फंड हाउसेज ने इन सेक्टर्स से अपना पैसा निकालकर आईटी और डिफेंस स्टॉक्स में शिफ्ट करना कड़ाई से शुरू कर दिया है, जो स्मार्ट मनी के रोटेशन के कड़े नियमों को दर्शाता है।
अमेरिकी बाजारों के लाइव संकेत और रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति का कड़ा डर
घरेलू बाजार की इस दिशा को तय करने में अंतरराष्ट्रीय और वैश्विक संकेतों (Global Cues) ने भी एक बहुत ही बड़ी और कूटनीतिक पृष्ठभूमि तैयार की है। बीते सत्र में अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक डाउ जोंस और नैस्डैक (Nasdaq) बहुत ही कड़क और सकारात्मक बढ़त के साथ बंद हुए थे, जिससे आज सुबह एशियाई बाजारों जैसे जापान के निक्केई और हांगकांग के हैंगसेंग को एक बहुत अच्छा शुरुआती बूस्ट मिला; लेकिन वैश्विक स्तर पर फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती को लेकर अपनाए जा रहे अत्यधिक कड़े रुख और यूरोपीय देशों में चल रहे राजनीतिक संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय फंड्स भारत जैसे उभरते हुए बाजारों में बड़ा एकमुश्त निवेश करने से लगातार हिचकिचा रहे हैं।
घरेलू मोर्चे पर देखा जाए तो देश के भीतर खुदरा महंगाई (CPI Inflation) के आने वाले नए आंकड़ों और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आगामी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक को लेकर निवेशकों के मन में एक बहुत बड़ा और कड़ा डर बना हुआ है। यदि महंगाई के आंकड़े थोड़े भी चिंताजनक आते हैं, तो आरबीआई ब्याज दरों को कड़ाई से ऊंचा बनाए रखेगा; जिससे कॉर्पोरेट जगत के लिए लोन लेना महंगा हो जाएगा और उनके शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) के ग्राफ में गिरावट आ सकती है। यही कारण है कि बाजार के बड़े ऑपरेटर्स और डीआईआई (DIIs) इस समय कोई भी बड़ा जोखिम लेने के बजाय, पूरी मुस्तैदी से खबरों पर नजर रखते हुए बेहद सीमित और हेज्ड पोजीशंस के साथ ही बाजार में बने हुए हैं।
निष्कर्ष: लंबी अवधि का पैसा वसूल नजरिया, कड़े सुरक्षा नियम और निवेश का अंतिम मार्ग
निष्पक्ष और विस्तृत शेयर बाजार समाचार के आर्थिक विश्लेषण से यह पूरी तरह साफ हो जाता है कि बाजार (Stock market today) की इस मामूली बढ़त और उसके भीतर चल रहे कड़े उतार-चढ़ाव के दौर में केवल वही निवेशक सुरक्षित रह सकते हैं जो शॉर्ट-टर्म की सट्टेबाज़ी और इंट्राडे के कड़े शॉर्ट-कट को छोड़कर, पूरी तरह से ‘लंबी अवधि के निवेश’ (Long Term Investment) का एक बहुत ही सुंदर, व्यावहारिक और धैर्यपूर्ण नजरिया अपनाते हैं। बाजार की यह अस्थिरता वास्तव में उन समझदार और गंभीर खुदरा निवेशकों के लिए एक बहुत ही शानदार व स्वर्णिम अवसर लेकर आती है, जो अच्छे फंडामेंटल्स और मजबूत बैलेंस शीट वाली ब्लू-चिप कंपनियों के शेयरों को हर एक गिरावट में धीरे-धीरे (SIP के माध्यम से) अपने पोर्टफोलियो में जोड़ते रहते हैं, जो उनकी खुशियों और संपत्ति को भविष्य में कई गुना अधिक कड़क बना देता है।
अदालतों के कड़े विधिक कानूनों और सेबी (SEBI) के कड़े सुरक्षा नियमों की तरह ही, हर एक छोटे ट्रेडर को यह कड़ा नियम हमेशा याद रखना चाहिए कि बिना ‘स्टॉप-लॉस’ (Stop-Loss) के बाजार में कोई भी लिवरेज्ड पोजीशन भूलकर भी न बनाएं; और सोशल मीडिया पर मिलने वाली फालतू की ‘टिप-संस्कृति’ या अनधिकृत टेलीग्राम चैनल्स के फर्जी दावों से पूरी कड़ाई के साथ दूर रहें, क्योंकि अपनी गाढ़ी कमाई का निवेश करने से पहले खुद रिसर्च करना या किसी रजिस्टर्ड वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से कूटनीतिक विधिक सलाह लेना ही आपके आर्थिक स्वास्थ्य के लिए सबसे ज्यादा उत्तम व पैसा वसूल कदम साबित होगा। नियमों का यह कड़ा अनुशासन, आपकी यह वित्तीय मुस्तैदी और निवेश की यह शुद्धता ही आपके पूरे पोर्टफोलियो को हमेशा-always के लिए पूरी तरह से सुरक्षित, घाटे से मुक्त, ऋण-मुक्त, ऐश्वर्य से भरपूर और परम खुशहाल बनाए रखने का एकमात्र व सबसे अचूक रास्ता साबित होगी; इसलिए पूरी तरह सतर्क रहें, समझदारी से निवेश करें, और देश के इस महान आर्थिक विकास का आनंद बेहद सहजता के साथ लेते रहें।
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