Stock Market Today: क्रूड ऑयल में तेजी और मिडिल ईस्ट तनाव से शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान पर खुले

मिडिल ईस्ट तनाव और महंगे कच्चे तेल से बाजार दबाव में, निवेशकों की बढ़ी चिंता

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Stock Market Today: शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी देखने को मिली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान पर खुले। कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स करीब 338 अंक टूटकर 78,616 के स्तर पर आ गया जबकि एनएसई निफ्टी 50 भी दबाव में आकर 24,592 के आसपास कारोबार करता नजर आया। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है इसलिए क्रूड में तेजी घरेलू बाजार और महंगाई दोनों के लिए नकारात्मक संकेत है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर संभावित पाबंदी और तनाव बढ़ने की आशंकाओं ने वैश्विक बाजार की चिंता बढ़ा दी है। इन वजहों से शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार कमजोर शुरुआत के साथ खुला।

Stock Market Today: कच्चे तेल की कीमतों में उबाल मुख्य वजह

ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल फ्यूचर्स में लगातार तीसरे दिन तेजी दर्ज की गई। इसका भाव 1.2 प्रतिशत चढ़कर 83.48 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड भी इसी रफ्तार से बढ़ा। मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर पाबंदी लगाने की चर्चा ने तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के कच्चे तेल व्यापार का महत्वपूर्ण मार्ग है। यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। किसी भी तरह की रुकावट या पाबंदी की आशंका तेल की कीमतों को तेजी से ऊपर धकेल देती है। भारत जैसे आयातक देश के लिए यह स्थिति महंगाई बढ़ाने वाली साबित हो सकती है। कच्चे तेल की महंगाई से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का दबाव बनता है जिससे उपभोक्ता खर्च और कॉर्पोरेट मुनाफे दोनों प्रभावित होते हैं।

मिडिल ईस्ट तनाव का असर

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने वैश्विक जोखिम भावना को प्रभावित किया है। निवेशक जोखिम भरी परिसंपत्तियों से दूरी बना रहे हैं। एशियाई बाजार भी मिश्रित रुख के साथ कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजारों में भी सतर्कता का माहौल था। इन वैश्विक संकेतों का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा।

विश्लेषकों का कहना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता तब तक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। भारत की अर्थव्यवस्था ऊर्जा आयात पर निर्भर है इसलिए ऐसे घटनाक्रम घरेलू बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। सेंसेक्स और निफ्टी का लाल निशान पर खुलना इसी दबाव का नतीजा था।

एफआईआई की खरीदारी से उम्मीद

हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से भारतीय बाजारों में लगातार खरीदारी जारी है। इससे बाजार को निचले स्तरों पर सहारा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। एफआईआई की निरंतर खरीदारी घरेलू बाजार की मजबूती का संकेत देती है। जब विदेशी निवेशक लंबी अवधि के नजरिए से खरीदारी करते हैं तो अल्पकालिक दबाव के बावजूद बाजार को सपोर्ट मिलता है।

घरेलू संस्थागत निवेशक भी बाजार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। कच्चे तेल की तेजी के बावजूद कुछ क्षेत्रों में खरीदारी देखने को मिल सकती है। बैंकिंग, आईटी और फार्मा जैसे क्षेत्रों में चयनात्मक खरीदारी की संभावना बनी हुई है। बाजार की दिशा आगे के कारोबार में इन खरीदारों के रुख पर निर्भर करेगी।

बाजार के प्रमुख स्तर और तकनीकी स्थिति

तकनीकी रूप से निफ्टी के लिए 24,500 से 24,480 का क्षेत्र महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। अगर यह स्तर टूटता है तो और गिरावट की संभावना बढ़ सकती है। सेंसेक्स के लिए भी निचले स्तरों पर खरीदारी नजर आने की उम्मीद है। निवेशक कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक संकेतों पर नजर रखे हुए हैं।

शुक्रवार के कारोबार में वोलैटिलिटी बढ़ने की आशंका है। मिडिल ईस्ट से आने वाली खबरें बाजार की दिशा तय करेंगी। अगर तनाव कम होने के संकेत मिलते हैं तो बाजार में रिकवरी दिख सकती है। वहीं तनाव बढ़ने पर दबाव बना रह सकता है।

महंगाई और अर्थव्यवस्था पर संभावित असर

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी महंगाई को बढ़ावा दे सकती है। आरबीआई मौद्रिक नीति तय करते समय ऊर्जा कीमतों पर नजर रखता है। अगर क्रूड लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है तो महंगाई नियंत्रण के प्रयासों पर असर पड़ सकता है। कंपनियों की इनपुट लागत बढ़ने से उनके मुनाफे पर दबाव बन सकता है।

खासकर एयरलाइन, पेंट, लॉजिस्टिक्स और ऑटो जैसे क्षेत्रों पर कच्चे तेल की महंगाई का सीधा असर पड़ता है। उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें भी प्रभावित हो सकती हैं। इन वजहों से निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं।

वैश्विक बाजारों का रुख

एशियाई बाजार शुक्रवार को मिश्रित कारोबार कर रहे थे। जापान और हांगकांग के सूचकांक दबाव में नजर आए। यूरोपीय बाजार खुलने के बाद उनके रुख का असर भारतीय बाजार पर पड़ सकता है। अमेरिकी बाजारों में रात भर का प्रदर्शन भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत है।

वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचाव का रुख बना हुआ है। कच्चे तेल की तेजी ने इस रुख को और मजबूत किया है। भारतीय बाजार भी इसी वैश्विक लहर के साथ चल रहा है।

Stock Market Today: निवेशकों के लिए सलाह

बाजार विशेषज्ञों का सुझाव है कि अल्पकालिक अस्थिरता के बीच लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं। अच्छी कंपनियों के शेयरों में गिरावट पर खरीदारी का अवसर बन सकता है। वहीं ट्रेडर्स को स्टॉप लॉस का ध्यान रखना चाहिए। कच्चे तेल की कीमतों और मिडिल ईस्ट की खबरों पर लगातार नजर रखना जरूरी है।

एफआईआई की खरीदारी जारी रहने से बाजार को निचले स्तरों पर सहारा मिलने की उम्मीद है। अगर वैश्विक संकेत सुधरते हैं तो बाजार में रिकवरी तेज हो सकती है। फिलहाल सतर्क रुख अपनाते हुए चयनात्मक निवेश बेहतर रणनीति मानी जा रही है।

शुक्रवार को कच्चे तेल में उबाल और मिडिल ईस्ट तनाव के कारण भारतीय शेयर बाजार कमजोर शुरुआत के साथ खुला। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान पर आए। ब्रेंट क्रूड का 83.48 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचना सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर आशंकाओं ने वैश्विक बाजार को प्रभावित किया, जबकि एफआईआई की निरंतर खरीदारी से बाजार को निचले स्तरों पर सपोर्ट मिलने की उम्मीद बनी हुई है।

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