Sonipat Power Crisis: बिजली हड़ताल से पानी की किल्लत, जनरेटर का किराया ₹2,000 तक पहुंचा
Sonipat Power Crisis: बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से सोनीपत में बिजली-पानी का संकट गहराया। जानें जनरेटर किराया, उद्योगों पर असर और आंदोलन की वजह।
Sonipat Power Crisis: हरियाणा के सोनीपत जिले में बिजली विभाग के कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल के चलते जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। निजीकरण और समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के विरोध में कर्मचारियों द्वारा 22 से 24 अक्टूबर तक किए गए कार्य बहिष्कार का सीधा असर शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली और पेयजल व्यवस्था पर पड़ा है। शहर के 16 में से 10 फीडरों के ठप होने से कई इलाकों में रातभर ब्लैकआउट की स्थिति बनी रही, जिससे घरों में लगे इन्वर्टर भी जवाब दे गए। ऊर्जा मंत्री अनिल विज के साथ कर्मचारी संगठनों की वार्ता विफल होने के बाद पैदा हुए इस संकट ने आम जनता के साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों की कमर तोड़ दी है।
Sonipat Power Crisis: शहर के 10 फीडर ठप होने से पेयजल आपूर्ति प्रभावित
कर्मचारियों के सामूहिक कार्य बहिष्कार के चलते सोनीपत शहर की विद्युत वितरण प्रणाली चरमरा गई है। प्रमुख फीडरों से बिजली आपूर्ति ठप रहने के कारण नगर निगम और जनस्वास्थ्य विभाग के जलघरों से पानी की सप्लाई पूरी तरह बाधित हो गई। रिहायशी कॉलोनियों में सबमर्सिबल पंप और मोटर न चल पाने की वजह से लोगों को दैनिक उपयोग और पीने के पानी के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि लंबे पावर कट की वजह से न केवल रोजमर्रा के कामकाज ठप हो गए हैं, बल्कि फाल्ट ठीक करने के लिए ग्रिड और सब-स्टेशनों पर कोई तकनीकी कर्मचारी भी मौजूद नहीं है।
किराए के जनरेटरों की लूट, व्यापारियों का फूटा आक्रोश
बिजली संकट का फायदा उठाते हुए बाजार में जनरेटर का किराया आसमान छूने लगा है। आम दिनों में 500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मिलने वाले जनरेटरों का किराया बढ़कर 1,500 से 2,000 रुपये तक पहुंच गया है। छोटे दुकानदारों, क्लीनिकों और जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों को मजबूरी में महंगे दामों पर जनरेटर किराए पर लेने पड़ रहे हैं। बिजली आपूर्ति ठप रहने से नाराज कच्चे क्वार्टर मार्केट के व्यापारियों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। कारोबारियों का कहना है कि त्योहारों और सामान्य कारोबारी दिनों में बिजली गुल रहने से व्यापार ठप हो गया है और शिकायतों के निवारण के लिए कोई आधिकारिक हेल्पलाइन सुचारू रूप से काम नहीं कर रही है।
खरखौदा और फिरोजपुर बांगर औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन पर असर
घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ इस हड़ताल की तगड़ी मार सोनीपत के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों पर पड़ी है। सैदपुर पावर हाउस से जुड़े 11 ग्रामीण फीडरों पर आपूर्ति बाधित रहने के अलावा फिरोजपुर बांगर और आईएमटी खरखौदा के कई हिस्सों में बिजली गुल रही। हालांकि मारुति प्लांट जैसी बड़ी इकाइयों में बैकअप और विशेष व्यवस्थाओं के चलते स्थिति संभली रही, लेकिन मध्यम और लघु उद्योगों (MSME) में मशीनों के पहिए थम गए। अचानक हुए इस ब्लैकआउट से फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रक्रिया रुक गई है, जिससे उद्यमियों को करोड़ों रुपये के नुकसान और लेबर के खाली बैठने की चिंता सताने लगी है।
गन्नौर में 33 केवी लाइन से छेड़छाड़, कील ठोकने पर अज्ञात पर एफआईआर
हड़ताल के बीच गन्नौर सब-डिवीजन में बिजली आपूर्ति बाधित करने के लिए असामाजिक तत्वों द्वारा कथित तौर पर लाइन से छेड़छाड़ करने का गंभीर मामला सामने आया है। बिजली निगम के अधिकारियों के अनुसार, गन्नौर क्षेत्र को जोड़ने वाली 33 केवी मुख्य ट्रांसमिशन लाइन में कील ठोककर शॉर्ट सर्किट कराने और बिजली बाधित करने की साजिश रची गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए बिजली विभाग के एसडीओ अमित की लिखित शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात शरारती तत्वों के खिलाफ सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और आपूर्ति बाधित करने की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
Sonipat Power Crisis: समानांतर लाइसेंस के विरोध में 24 अक्टूबर तक जारी रहेगा आंदोलन
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों के इस व्यापक विरोध की मुख्य वजह हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) द्वारा गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी ‘इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड’ को 25 साल के लिए दिया गया समानांतर वितरण लाइसेंस है। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के विद्युत ढांचे को कमजोर कर निजीकरण को बढ़ावा दे रही है, जिससे कर्मचारियों की नौकरियों और आम उपभोक्ताओं के अधिकारों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। हालांकि, ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने स्पष्ट किया है कि सरकार इस फैसले से पूरी तरह सहमत नहीं है और इसके खिलाफ नियामक अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) में कानूनी चुनौती दी जा रही है। इसके बावजूद कर्मचारी 24 अक्टूबर तक हड़ताल पर अडिग हैं, जिसके चलते शनिवार तक निर्बाध बिजली आपूर्ति बहाल करना जिला प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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