बदलती दुनिया में UN की प्रासंगिकता पर पीएम मोदी का बड़ा बयान, राहुल गांधी और कांग्रेस पर भी साधा तीखा निशाना
NDTV समिट में पीएम मोदी ने UN सुधार, ग्लोबल साउथ और राहुल गांधी-कांग्रेस पर बात रखी।
PM Modi: राजधानी दिल्ली में आयोजित ‘एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026’ के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के मौजूदा स्वरूप और घरेलू राजनीति पर अपनी दो टूक राय रखी। गुरुवार, 22 अक्टूबर को दिए अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि दुनिया बेहद तेजी से बदल रही है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसी प्रमुख वैश्विक संस्थाएं इन नई चुनौतियों के साथ कदमताल करने में नाकाम साबित हो रही हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि जब तक इन संस्थाओं में व्यापक सुधार नहीं होगा, तब तक दुनिया के सामने खड़े जटिल संकटों का समाधान खोजना नामुमकिन बना रहेगा। इसी मंच से उन्होंने देश की राजनीति का जिक्र करते हुए कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर भी तीखा राजनीतिक हमला बोला।
PM Modi: वैश्विक व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार की दरकार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में बदलते वैश्विक परिदृश्य को रेखांकित करते हुए कहा कि आज व्यापार, नई तकनीक और समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय तनाव के नए केंद्र बन चुके हैं। उन्होंने याद दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र की नींव दूसरे विश्व युद्ध के बाद की परिस्थितियों में शांति और सुरक्षा कायम रखने के मकसद से रखी गई थी। हालांकि, पिछले कुछ दशकों में दुनिया का आर्थिक और भू-राजनीतिक ढांचा पूरी तरह बदल चुका है। नए आर्थिक केंद्र और नई महाशक्तियां उभर चुकी हैं, मगर फैसले लेने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रणालियां अब भी दशकों पुरानी ढर्रे पर चल रही हैं। जब वैश्विक वास्तविकताएं बदल जाती हैं और निर्णय लेने की व्यवस्था पुरानी रहती है, तो अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का प्रभाव घटने लगता है। ऐसे में समय की मांग है कि संयुक्त राष्ट्र को अधिक समावेशी, पारदर्शी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाया जाए ताकि वह संकट के समय केवल मूकदर्शक न बनकर प्रभावी समाधान दे सके।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर चाणक्य के मत्स्य न्याय की चेतावनी
वैश्विक शक्ति संतुलन पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने प्राचीन भारतीय कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य के ‘मत्स्य न्याय’ के सिद्धांत का उल्लेख किया। उन्होंने समझाया कि मत्स्य न्याय का आशय उस अराजक स्थिति से है जहां नियम-कायदे कमजोर पड़ने पर बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है। दुनिया को आज एक ऐसे पारदर्शी नियम-आधारित तंत्र की आवश्यकता है जो ताकतवर मुल्कों को कमजोर और विकासशील देशों का अनुचित फायदा उठाने से रोक सके। अगर अंतरराष्ट्रीय कानून और संस्थाएं कमजोर रहीं, तो देशों के बीच शक्ति का यह असंतुलन सीधे तौर पर वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन जाएगा। भारत हमेशा से एक ऐसे संतुलन का पैरोकार रहा है जहां हर संप्रभु राष्ट्र के अधिकारों का समान रूप से सम्मान हो।
संकटमोचक के रूप में उभरा भारत और ग्लोबल साउथ की आवाज
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने संकट के समय भारत की सक्रिय भूमिका को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौर को याद करते हुए कहा कि जब दुनिया का एक बड़ा हिस्सा अपने नागरिकों को बचाने की जद्दोजहद में था, तब भारत ने मानवीय दायित्व निभाते हुए 100 से अधिक जरूरतमंद देशों तक जीवनरक्षक दवाएं और वैक्सीन पहुंचाईं। भारत का यह कदम इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक सहयोग केवल कागजी समझौतों या सामान्य दिनों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि असली परीक्षा संकट के समय ही होती है। इसके साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ‘ग्लोबल साउथ’ यानी विकासशील देशों की प्राथमिकताओं और उनकी आवाज को निर्णय लेने की प्रक्रिया में पूरा स्थान मिलना ही चाहिए।
कांग्रेस पर बरसे प्रधानमंत्री, राहुल गांधी पर बोला सीधा हमला
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से इतर प्रधानमंत्री ने घरेलू राजनीति पर भी कांग्रेस नेतृत्व को आड़े हाथों लिया। उन्होंने विपक्ष के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ जब पूरी दुनिया नए अवसरों और नई व्यवस्था की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है, तब देश के भीतर कुछ राजनीतिक तत्व केवल अव्यवस्था और निराशा फैलाने में जुटे हैं। राहुल गांधी और कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए प्रधानमंत्री ने ‘फेल प्रोडक्ट’ वाली टिप्पणी की और आरोप लगाया कि कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति देश की विकास यात्रा और दूसरे दलों के उभार में लगातार रोड़ा अटकाने का काम करती रही है।
PM Modi: विकसित भारत 2047 का दृष्टिकोण केवल घरेलू लक्ष्य नहीं
प्रधानमंत्री ने देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प पर बोलते हुए स्पष्ट किया कि यह सपना सिर्फ भारत के घरेलू आर्थिक विस्तार तक सीमित नहीं है। भारत जब आर्थिक और तकनीकी रूप से सशक्त होगा, तो वह पूरे विश्व के सतत विकास और शांति में एक मजबूत स्तंभ की भूमिका निभाएगा। भारत की यह प्रगतिशील यात्रा दुनिया के लिए एक संतुलित, भरोसेमंद और मानवीय व्यवस्था का निर्माण करने का आधार बनेगी।
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