SIR Voter List Update: 20 राज्यों में छूटे मतदाताओं के नाम फिर जुड़ेंगे, Form 6 से मिलेगा मौका
BLO घर-घर जाकर करेंगे सत्यापन, ECINet की तकनीकी समीक्षा के साथ दिल्ली-महाराष्ट्र में बढ़ी समयसीमा
SIR Voter List Update: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक दलों के तीखे विरोध, सड़कों पर होते प्रदर्शनों और संसद से सड़क तक मचे घमासान के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। निर्वाचन आयोग ने उन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक विशेष सघन अभियान चलाने का आधिकारिक आदेश जारी किया है जहां एसआईआर की बुनियादी प्रक्रिया संपन्न घोषित की जा चुकी है। इस अभियान के तहत चुनाव तंत्र उन सभी वास्तविक और पात्र नागरिकों को चिन्हित कर उनके नाम मतदाता सूची में पुनः शामिल करेगा जिनके नाम प्रक्रिया के दौरान तकनीकी या सत्यापन संबंधी कारणों से कट गए थे या छूट गए थे।
आयोग का यह सुधारात्मक आदेश ऐसे समय में सामने आया है जब विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों द्वारा एसआईआर के दौरान प्रारूप मतदाता सूची से करोड़ों नाम हटाए जाने पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे थे और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की जा रही थी। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी पात्र नागरिक का मताधिकार केवल किसी प्रशासनिक या तकनीकी जटिलता के चलते छीना नहीं जाएगा। सभी संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO), जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) को निर्देश दिया गया है कि वे छूटे हुए मतदाताओं से फॉर्म 6 भरवाने और उनकी बहाली की प्रक्रिया को युद्धस्तर पर पूरा करें।
SIR Voter List Update: 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलेगा छूटे मतदाताओं की बहाली का विशेष अभियान
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी विस्तृत दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की समयसीमा समाप्त हो चुकी है, वहां चुनावी मशीनरी को तत्काल प्रभाव से सक्रिय कर दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर की अवधि समाप्त होने का अर्थ यह कतई नहीं है कि मतदाता सूची के दरवाजे पात्र नागरिकों के लिए बंद हो चुके हैं। भारतीय चुनावी कानून के अनुसार मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधित करने की प्रक्रिया वर्षभर निरंतर अद्यतन के रूप में संचालित होती रहती है।
इस विशेष अभियान का दोहरा उद्देश्य निर्धारित किया गया है। पहला लक्ष्य उन नागरिकों की पहचान कर उन्हें वापस सूची में लाना है जो पूर्व से मतदाता थे लेकिन एसआईआर के दौरान विसंगतियों के कारण बाहर हो गए। वहीं दूसरा प्रमुख लक्ष्य 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके उन सभी युवाओं और पहली बार मतदान करने योग्य बने नए नागरिकों को जोड़ना है जो अब तक मतदाता सूची का हिस्सा नहीं बन सके हैं। राज्य और जिला स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस अभियान को केवल कागजी औपचारिकताओं तक सीमित न रखकर सक्रिय रूप से प्रत्येक मतदान केंद्र क्षेत्र में संचालित करें।
फॉर्म 6 के जरिए होगी बहाली: निरंतर अद्यतन प्रक्रिया बनी कानूनी आधार
मतदाता सूची से बाहर रह गए किसी भी पात्र नागरिक को पुनः जोड़ने के लिए फॉर्म 6 को केंद्रीय माध्यम बनाया गया है। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी प्रक्रिया निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 (Registration of Electors Rules, 1960) के नियम 26 के अंतर्गत संचालित ‘निरंतर अद्यतन’ व्यवस्था के तहत पूरी की जाएगी। एसआईआर के दौरान उपयोग किए जाने वाले विशेष घोषणा पत्रों और सामान्य अवधि में लागू होने वाले विधिक प्रपत्रों के बीच भ्रम को दूर करते हुए आयोग ने कहा है कि अब सभी आवेदनों का निस्तारण सामान्य कानूनी प्रावधानों के तहत ही किया जाएगा।
जो नागरिक किसी कारणवश अंतिम प्रकाशित सूची में अपना नाम नहीं पा रहे हैं, वे ऑनलाइन माध्यम से अथवा संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) या सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) के कार्यालय में फॉर्म 6 भरकर जमा कर सकते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि फॉर्म 6 के साथ प्रस्तुत किए गए सामान्य पहचान और निवास दस्तावेजों के सत्यापन के आधार पर ईआरओ को समयबद्ध तरीके से नाम जोड़ने का अंतिम निर्णय लेना होगा, जिससे किसी भी वैध नागरिक की चुनावी भागीदारी बाधित न हो।
बीएलओ करेंगे पुराने और नए रिकॉर्ड का मिलान: घर-घर जाकर भरवाएंगे फॉर्म
इस विशेष अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को बनाया गया है। चुनाव आयोग ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे एसआईआर लागू होने से पहले की पुरानी मतदाता सूची और एसआईआर के बाद तैयार की गई नई सूची का आमने-सामने रखकर सूक्ष्म मिलान करें। इस डेटा मिलान के जरिए ऐसे सभी मतदाताओं की सूची तैयार की जाएगी जिनके नाम पिछली सूची में दर्ज थे, किंतु नई सूची में वे न तो किसी अन्य पते पर स्थानांतरित दिखे और न ही उनकी मृत्यु का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध है।
पहचान किए गए ऐसे संदिग्ध मामलों में बीएलओ स्वयं संबंधित मतदाता के घर जाएंगे और वास्तविक स्थिति की पड़ताल करेंगे। यदि नागरिक उसी पते पर सामान्य रूप से निवास करता पाया जाता है और वह मतदान के लिए पूर्णतः पात्र है, तो बीएलओ मौके पर ही उससे फॉर्म 6 भरवाने में सक्रिय सहायता प्रदान करेंगे। इस जमीनी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों और उनके बूथ लेवल एजेंटों (BLA) को भी शामिल करने और उनकी आपत्तियों व दावों का मौके पर संज्ञान लेने का निर्देश दिया गया है।
ड्राफ्ट रोल से 13 करोड़ नाम हटने के विवाद पर आयोग का विस्तृत स्पष्टीकरण
एसआईआर को लेकर छिड़े देशव्यापी विवाद के केंद्र में प्रारूप मतदाता सूचियों से लगभग 13 करोड़ नाम हटाए जाने का विशाल आंकड़ा रहा है, जिसे लेकर विपक्षी दलों ने चुनाव प्रक्रिया की शुचिता पर सवाल खड़े किए थे। चुनाव आयोग ने इस आंकड़े पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि प्रारूप सूची से किसी नाम का हटना सीधे तौर पर किसी पात्र मतदाता के अधिकार का हनन नहीं है। आयोग के अनुसार इन नामों में मृत मतदाताओं, स्थायी रूप से अन्य राज्यों या शहरों में पलायन कर चुके लोगों और एक से अधिक स्थानों पर दर्ज फर्जी या दोहरे प्रविष्टियों वाले नाम शामिल होते हैं।
आयोग का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए मतदाता सूची का वास्तविक और अद्यतन होना अनिवार्य है, अन्यथा फर्जी मतदान का खतरा बढ़ जाता है। चूंकि अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन राज्यों में अलग-अलग चरणों में पूरा हो रहा है, इसलिए हटाए गए सभी नामों को अवैध मानना विधिक रूप से सही नहीं है। नए विशेष अभियान के जरिए आयोग यह सुनिश्चित कर रहा है कि यदि इस बड़े शुद्धिकरण अभियान के दौरान भूलवश किसी वैध नागरिक का नाम कट गया हो, तो उसे बिना किसी प्रशासनिक अड़चन के वापस जोड़ा जा सके।
गोवा के 97 मतदाताओं का मामला: 88 आवेदनों की प्रक्रिया पूरी
एसआईआर की व्यवहार्यता और उसमें आ रही विसंगतियों को लेकर पश्चिमी राज्य गोवा का एक प्रकरण हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना था, जहां एक विशिष्ट क्षेत्र में 97 वैध मतदाताओं के नाम अंतिम सूची से बाहर रह गए थे। इस मामले में तुरंत संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने उपचारात्मक प्रक्रिया लागू की थी। आयोग के अनुसार उन सभी 97 नागरिकों को फॉर्म 6 उपलब्ध कराया गया था ताकि वे पुनः पंजीकरण करा सकें।
गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा प्रस्तुत की गई अद्यतन रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि 97 में से 88 मतदाताओं ने फॉर्म 6 सफलतापूर्वक भर दिया है और उनके आवेदन स्वीकार किए जा चुके हैं। शेष मामलों में से कुछ नागरिकों ने स्वेच्छा से अन्यत्र स्थानांतरण के कारण आवेदन नहीं किया अथवा वे निर्धारित पते पर उपलब्ध नहीं थे। आयोग ने इस उदाहरण को प्रस्तुत करते हुए रेखांकित किया है कि संस्थागत स्तर पर किसी भी शिकायत का समाधान तुरंत फॉर्म 6 की प्रक्रिया द्वारा संभव है।
ECINet पोर्टल की होगी उच्चस्तरीय तकनीकी समीक्षा: आईआईटी विशेषज्ञ होंगे शामिल
मतदाता सूची प्रबंधन और सत्यापन के लिए उपयोग किए जा रहे चुनाव आयोग के केंद्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘ईसीआई-नेट’ (ECINet) की कार्यप्रणाली पर भी कई तरह के तकनीकी सवाल उठाए गए थे। राजनीतिक दलों का आरोप था कि पोर्टल के एल्गोरिदम में कमियों के कारण कई वास्तविक मतदाताओं के नाम स्वतः हट रहे हैं। इस संदेह को दूर करने और प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने ईसीआई-नेट की स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा कराने का निर्णय लिया है।
इसके लिए वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है। इस समिति में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) अथवा भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) के प्रतिष्ठित स्वतंत्र कंप्यूटर साइंस विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। यह समिति यह जांच करेगी कि ईसीआई-नेट का सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर जन प्रतिनिधित्व कानून और निर्वाचक नियमों के पूर्णतः अनुकूल है या नहीं। साथ ही आयोग ने यह अनिवार्य नियम बना दिया है कि भविष्य में किसी भी नए आईटी मॉड्यूल या पोर्टल संशोधन को लागू करने से पहले अधिकारियों और विशेषज्ञों की समिति द्वारा उसकी गहन तकनीकी जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी।
SIR Voter List Update: दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियों की समयसीमा में विस्तार
आगामी विधानसभा चुनावों और राजनीतिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और महाराष्ट्र में एसआईआर से जुड़ी दावे और आपत्तियां (Claims and Objections) दर्ज कराने की समयसीमा में भारी विस्तार किया है। दिल्ली में जहां पहले यह प्रक्रिया समाप्त होने वाली थी, वहीं अब नागरिकों और राजनीतिक दलों की मांग को स्वीकार करते हुए दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 30 अक्टूबर 2026 कर दिया गया है। इन प्राप्त दावों का निस्तारण 30 नवंबर 2026 तक पूरा किया जाएगा।
इसी प्रकार महाराष्ट्र के लिए दावे और आपत्तियां प्रस्तुत करने की अंतिम समयसीमा को 12 अक्टूबर 2026 तक विस्तारित किया गया है, जबकि इन सभी मामलों का अंतिम प्रशासनिक निस्तारण 10 नवंबर 2026 तक सुनिश्चित किया जाएगा। समयसीमा में इस छूट से उन सभी नागरिकों, प्रवासी कामगारों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को पर्याप्त अवसर मिलेगा जो किसी कारणवश निर्धारित अवधि में अपने दस्तावेज जमा नहीं कर सके थे।
Read more here
Gold-Silver Price 2 October 2026: सोना ₹1.50 लाख के पार, चांदी ₹2.26 लाख के करीब