Shastri Bhawan Demolition: कंधार हाईजैक और कारगिल का गवाह रहा भवन अब होगा ध्वस्त, बनेंगे कर्तव्य भवन 4 और 5
Central Vista के तहत पुराने सरकारी भवनों की जगह आधुनिक Common Central Secretariat तैयार किए जा रहे हैं
Shastri Bhawan Demolition: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सत्ता के गलियारों में प्रशासनिक निर्णयों और ऐतिहासिक समाचारों का केंद्र रहा शास्त्री भवन अब हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है। लुटियंस दिल्ली के प्रशासनिक परिदृश्य में दशकों तक केंद्रीय मंत्रालयों, नौकरशाहों और मीडिया कर्मियों की चहल-पहल का गवाह रहा यह परिसर अब पूरी तरह खाली कराया जा रहा है। सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना (Central Vista Redevelopment Project) के अंतर्गत इस विशाल ढांचे को ध्वस्त कर इसके स्थान पर आधुनिक ‘कर्तव्य भवन 4 और 5’ का निर्माण किया जाएगा। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) ने सभी संबंधित मंत्रालयों और विभागों को सितंबर 2026 के अंत तक परिसर खाली करके निर्माण एजेंसी को साइट सौंपने के कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं।
इस ऐतिहासिक इमारत के विदा होने के साथ ही भारतीय राजनीति, शासन व्यवस्था और पत्रकारिता के एक स्वर्णिम युग की स्मृतियां भी ताजा हो गई हैं। शास्त्री भवन केवल ईंट और कंक्रीट का एक ढांचा नहीं था, बल्कि यह वह प्रशासनिक केंद्र था जहां से स्वतंत्र भारत के कई नीतिगत फैसलों की घोषणा हुई और देश को हिला देने वाली कई ऐतिहासिक घटनाओं की आधिकारिक जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए दुनिया तक पहुंची।
Shastri Bhawan Demolition: सितंबर अंत तक खाली होगा परिसर
केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की कार्ययोजना के तहत शास्त्री भवन और उससे सटे कृषि भवन के परिसरों को खाली कराने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। दोनों इमारतों की जमीन को मिलाकर केंद्रीय सचिवालय के नए ब्लॉक ‘कर्तव्य भवन 4 और 5’ तैयार किए जाने हैं। इस बहुमंजिला निर्माण के लिए आवश्यक निविदा प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है और साइट साफ होते ही निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया जाएगा।
शास्त्री भवन में संचालित होने वाले कई प्रमुख मंत्रालय पहले ही अपने नए पते पर स्थानांतरित हो चुके हैं। दशकों तक यहां से संचालित होने वाले सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) को लोदी रोड स्थित आधुनिक सूचना भवन में स्थानांतरित कर दिया गया है। इसके अलावा विदेश मंत्रालय, विधि एवं न्याय मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय के कई अनुभागों को भी नए एकीकृत सचिवालय परिसरों में अस्थायी व स्थायी रूप से भेजा गया है। इस स्थानांतरण का उद्देश्य पुराने और जर्जर हो चुके ढांचों से प्रशासनिक तंत्र को निकालकर आधुनिक कार्य संस्कृति से जोड़ना है।
1950 और 1960 के दशक की स्थापत्य विरासत: लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर पड़ा था नाम
शास्त्री भवन का निर्माण स्वतंत्रता के पश्चात केंद्र सरकार के तेजी से बढ़ते प्रशासनिक दायरों को संभालने के लिए किया गया था। इस सात मंजिला सरकारी इमारत का निर्माण वर्ष 1956 से 1968 के बीच विभिन्न चरणों में संपन्न हुआ था। बाद में देश के दूसरे प्रधानमंत्री और सादगी के प्रतीक स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री की स्मृति में इस परिसर का नामकरण ‘शास्त्री भवन’ किया गया।
आजादी के बाद जब भारत का लोकतांत्रिक और कल्याणकारी ढांचा विस्तृत हो रहा था, तब योजना आयोग और विभिन्न मंत्रालयों के विस्तार के लिए दिल्ली में आधुनिक प्रशासनिक भवनों की सख्त जरूरत महसूस हुई थी। उसी दौर में शास्त्री भवन, कृषि भवन और उद्योग भवन जैसी इमारतों की आधारशिला रखी गई थी। पिछले पांच दशकों से अधिक समय तक इस इमारत ने भारत की केंद्रीय कार्यपालिका की रीढ़ के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
नीति निर्माण का प्रमुख गढ़: दर्जन भर मंत्रालयों का रहा साझा ठिकाना
शास्त्री भवन की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां एक साथ केंद्र सरकार के कई संवेदनशील और विशाल मंत्रालयों के मुख्यालय मौजूद रहे। इसमें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, कोयला मंत्रालय, विधि एवं न्याय मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, जनजातीय कार्य मंत्रालय तथा युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय शामिल रहे हैं।
इस परिसर की भौगोलिक स्थिति भी इसे प्रशासनिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती थी। संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, रेल भवन और उद्योग भवन के केंद्र में स्थित होने के कारण मंत्रालयों के बीच त्वरित संवाद और समन्वय आसान रहता था। ठीक सामने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया और पास में रायसीना हिल्स होने के कारण यह पूरा क्षेत्र राष्ट्रीय समाचारों की धड़कन बना रहता था।
1999 का कंधार संकट: जब शास्त्री भवन बना देश की सबसे बड़ी खबर का केंद्र
शास्त्री भवन के इतिहास से जुड़ी सबसे भावुक और तनावपूर्ण यादों में दिसंबर 1999 का इंडियन एयरलाइंस के अपहृत विमान आईसी-814 (IC-814) का मामला प्रमुखता से दर्ज है। काठमांडू से उड़ान भरने के बाद जब आतंकियों ने विमान का अपहरण कर उसे कंधार में उतारा था, तब तत्कालीन भारत सरकार की संकट प्रबंधन समिति की ब्रीफिंग इसी परिसर में आयोजित होती थी।
तत्कालीन गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री जसवंत सिंह और तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बृजेश मिश्रा ने बंधक संकट को सुलझाने के लिए की जा रही वार्ताओं और रणनीतियों की आधिकारिक जानकारी शास्त्री भवन स्थित प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के राष्ट्रीय मीडिया सेंटर हॉल से ही देश के सामने रखी थी। उस दौर में अपहृत यात्रियों के व्याकुल परिजन अपनी गुहार लगाने और सरकार पर दबाव बनाने के लिए सीधे शास्त्री भवन के प्रेस कॉन्फ्रेंस हॉल में घुस आए थे, जिसके दृश्य आज भी भारत के राजनीतिक इतिहास में दर्ज हैं। कई दिनों तक पूरे देश की सांसें इसी इमारत से आने वाली हर सूचना पर टिकी रही थीं।
कारगिल युद्ध के दौरान सूचना का अग्रिम मोर्चा: सेना की दैनिक ब्रीफिंग
वर्ष 1999 की ही गर्मियों में जब भारत और पाकिस्तान के बीच कारगिल की बर्फीली चोटियों पर भीषण युद्ध छिड़ा था, तब शास्त्री भवन देश और दुनिया के लिए आधिकारिक सूचनाओं का मुख्य स्रोत बना हुआ था। उस समय टेलीविजन पत्रकारिता का विस्तार तेजी से हो रहा था और पूरे देश को युद्धक्षेत्र के पल-पल के घटनाक्रम की प्रतीक्षा रहती थी।
शास्त्री भवन के पीआईबी कॉन्फ्रेंस हॉल से ही भारतीय थल सेना, वायु सेना और विदेश मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग किया करते थे। भारतीय सेना के जांबाज सैनिकों द्वारा तोलोलिंग, टाइगर हिल और अन्य सामरिक चोटियों पर तिरंगा फहराए जाने की विजय गाथाओं का आधिकारिक ऐलान इसी इमारत के पोडियम से किया गया था। इस इमारत ने उन पलों को देखा है जब देश युद्ध के तनाव और फिर शानदार विजय के उल्लास से गुजरा था।
पत्रकारों की कर्मस्थली और अधिकारियों के पेशेवर जीवन की स्मृतियां
देश के वरिष्ठ पत्रकारों के लिए शास्त्री भवन केवल एक प्रशासनिक कार्यालय नहीं बल्कि उनकी पेशेवर यात्रा का जीवंत हिस्सा रहा है। दशकों तक बीट रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के लिए यह रोज का ठिकाना था, जहां अधिकारियों के साथ अनौपचारिक चर्चाएं, एक्सक्लूसिव खबरों की खोज और शाम की मीडिया ब्रीफिंग दिनचर्या का हिस्सा हुआ करती थीं। परिसर में पत्रकारों के लिए बनाई गई लाइब्रेरी, प्रेस रूम और कैंटीन आपसी संवाद और विमर्श का बड़ा केंद्र बने रहे।
इसी प्रकार यहां दशकों तक सेवाएं देने वाले वरिष्ठ नौकरशाहों और कर्मचारियों के लिए भी यह इमारत गहरी व्यक्तिगत भावनाओं से जुड़ी है। कई अधिकारियों ने अपने करियर की शुरुआत इसी भवन के छोटे कमरों से की और यहीं से शीर्ष पदों पर पहुंचे। गलियारों में फाइलों का चलना, संसदीय सत्रों के दौरान देर रात तक जलने वाली बत्तियां और सहयोगियों के साथ बिताए गए वर्षों की स्मृतियां इस इमारत के ढहने के साथ केवल यादों में सिमट जाएंगी।
3,155 करोड़ रुपये की लागत से बनेंगे नए ‘कर्तव्य भवन 4 और 5’
शास्त्री भवन और कृषि भवन की जमीन पर आकार लेने वाले कर्तव्य भवन 4 और 5 पूरी तरह से आधुनिक, ऊर्जा-कुशल और हाई-टेक प्रशासनिक परिसरों के रूप में विकसित किए जाएंगे। परियोजना के संशोधित अनुमानों के अनुसार इन दोनों भवनों के निर्माण की कुल निविदा लागत लगभग 3,155.41 करोड़ रुपये तय की गई है।
नए भवनों को भूकंपरोधी तकनीक, स्वचालित अग्नि सुरक्षा प्रणालियों, हरित ऊर्जा मानकों और आधुनिक आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ तैयार किया जाएगा। इन परिसरों में विशाल अंडरग्राउंड पार्किंग, डिजिटल सम्मेलन कक्ष और सुव्यवस्थित पब्लिक इंटरफेस जोन बनाए जाएंगे ताकि आम नागरिकों और सरकारी अधिकारियों दोनों को आधुनिक सुविधाएं मिल सकें। निर्माण प्रक्रिया को न्यूनतम समय में पूरा करने के लिए प्री-फैब्रिकेटेड और प्री-इंजीनियर्ड निर्माण तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
सेंट्रल विस्टा का व्यापक विजन: 10 कर्तव्य भवनों में समाएगा पूरा सचिवालय
शास्त्री भवन का ध्वस्तीकरण केंद्र सरकार की उस व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत लुटियंस दिल्ली में विभिन्न स्थानों पर बिखरे सरकारी कार्यालयों को एक ही छत के नीचे लाया जा रहा है। सेंट्रल विस्टा मास्टर प्लान के अंतर्गत कुल 10 विशाल ‘कर्तव्य भवन’ (कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट) बनाए जाने की परिकल्पना है।
वर्तमान व्यवस्था में अलग-अलग मंत्रालयों के बीच फाइलों के आवागमन, अधिकारियों की यात्रा और सुरक्षा प्रबंधन में समय व संसाधनों का भारी अपव्यय होता था। सभी मंत्रालयों के एक साथ एक ही परिसर में आने से अंतर-मंत्रालयी समन्वय तेज होगा, प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया में तेजी आएगी और सरकारी कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी व सुगम बन सकेगी।
Shastri Bhawan Demolition: एक ऐतिहासिक अध्याय का समापन और नए भारत की ओर कदम
शास्त्री भवन का विदा होना राष्ट्रीय राजधानी के प्रशासनिक भूगोल में एक युगांतकारी परिवर्तन का प्रतीक है। जिस इमारत ने शीतयुद्ध के दौर से लेकर भारत के परमाणु महाशक्ति बनने, आर्थिक उदारीकरण के फैसलों और कई ऐतिहासिक राष्ट्रीय संकटों का सामना करते हुए देश की सेवा की, वह अब नई आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिकता को स्थान दे रही है। हालांकि कंक्रीट का यह ढांचा जल्द ही जमींदोज हो जाएगा, किंतु भारत के आधुनिक इतिहास, पत्रकारिता की जीवंतता और ऐतिहासिक समाचारों के संदर्भ में शास्त्री भवन का नाम सदैव आदर और सम्मान के साथ याद किया जाता रहेगा।
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