CBFC New Chairman: सेंसर बोर्ड में बड़े बदलाव, शशि शेखर वेम्पति बने CBFC के नए अध्यक्ष, प्रसून जोशी की लेंगे जगह
CBFC New Chairman: सेंसर बोर्ड के नए अध्यक्ष बने शशि शेखर वेम्पति; प्रसून जोशी की लेंगे जगह!
CBFC New Chairman: भारतीय फिल्म जगत और मनोरंजन उद्योग के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने बुधवार को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC), जिसे आम भाषा में सेंसर बोर्ड कहा जाता है, के नए अध्यक्ष की नियुक्ति की घोषणा कर दी है। प्रसार भारती के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) शशि शेखर वेम्पति को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। वेम्पति अब जाने-माने गीतकार और कवि प्रसून जोशी का स्थान लेंगे। यह बदलाव भारतीय सिनेमा के प्रमाणन और नियमन की दिशा में एक नया अध्याय माना जा रहा है, क्योंकि वेम्पति के पास तकनीक और मीडिया प्रबंधन का लंबा अनुभव है।
CBFC New Chairman: प्रसून जोशी का आठ साल का कार्यकाल हुआ समाप्त
प्रसून जोशी पिछले आठ वर्षों से अधिक समय से सीबीएफसी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय सिनेमा ने कई बदलाव देखे और सेंसर बोर्ड की कार्यप्रणाली में भी कई सुधार किए गए। अब प्रसून जोशी को सरकार ने प्रसार भारती का अध्यक्ष नियुक्त किया है, जिसके बाद उनकी जगह वेम्पति को सेंसर बोर्ड की कमान दी गई है। प्रसून जोशी ने अपने कार्यकाल के दौरान फिल्मकारों और बोर्ड के बीच एक संतुलन बनाने की कोशिश की थी, और अब उम्मीद जताई जा रही है कि वेम्पति इसी परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ाएंगे।
CBFC New Chairman: कौन हैं शशि शेखर वेम्पति: तकनीक और मीडिया के दिग्गज
शशि शेखर वेम्पति का नाम भारतीय मीडिया और तकनीकी क्षेत्र में बहुत सम्मान के साथ लिया जाता है। वह प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मुंबई के पूर्व छात्र रहे हैं, जो उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि को दर्शाता है। वेम्पति केवल एक मीडिया पेशेवर ही नहीं, बल्कि एक प्रखर लेखक भी हैं। इसके अलावा, वह ‘एआई4इंडिया’ (AI4India) संगठन के सह-संस्थापक भी हैं। यह संगठन भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीक की पहुंच को आम लोगों तक पहुंचाने और उसे लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में काम कर रहा है। प्रसार भारती के सीईओ के रूप में उनके सफल कार्यकाल को देखते हुए सरकार ने उन्हें फिल्म प्रमाणन जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण पद के लिए चुना है।
क्या है केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) और इसकी भूमिका?

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन काम करने वाला एक वैधानिक निकाय है। इसका मुख्य कार्य सिनेमैटोग्राफ अधिनियम 1952 के प्रावधानों के तहत फिल्मों के सार्वजनिक प्रदर्शन को विनियमित करना है। भारत में कोई भी फिल्म तब तक सिनेमाघरों या सार्वजनिक मंचों पर प्रदर्शित नहीं की जा सकती, जब तक उसे सीबीएफसी द्वारा प्रमाणित न कर दिया जाए। यह बोर्ड सुनिश्चित करता है कि फिल्मों की सामग्री समाज, कानून व्यवस्था और देश की गरिमा के अनुरूप हो। बोर्ड में एक अध्यक्ष और कई गैर-सरकारी सदस्य होते हैं, जिनकी नियुक्ति सीधे केंद्र सरकार द्वारा की जाती है। इसका मुख्य मुख्यालय मुंबई में स्थित है, जो भारतीय फिल्म उद्योग का केंद्र भी है।
देशभर में फैला है सीबीएफसी का नेटवर्क
सेंसर बोर्ड की पहुंच और कार्यक्षमता को बेहतर बनाने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में इसके 9 क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित किए गए हैं। ये कार्यालय मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, तिरुवनंतपुरम, हैदराबाद, नई दिल्ली, कटक और गुवाहाटी में स्थित हैं। इन क्षेत्रीय कार्यालयों में फिल्मों की जांच के लिए विशेष सलाहकार पैनल होते हैं। इन पैनलों में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रबुद्ध लोगों को केंद्र सरकार द्वारा दो साल की अवधि के लिए मनोनीत किया जाता है। प्रमाणन की पूरी प्रक्रिया सिनेमाटोग्राफ अधिनियम, 1952 और सिनेमाटोग्राफ (प्रमाणन) नियम, 1983 के सख्त दिशानिर्देशों के तहत पूरी की जाती है। धारा 5 (बी) के तहत सरकार द्वारा जारी निर्देश इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वेम्पति की नियुक्ति से क्या बदल सकता है सिनेमा का भविष्य?
शशि शेखर वेम्पति की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब सिनेमा और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के बीच की दूरी कम हो रही है और एआई जैसी तकनीकें फिल्म निर्माण का हिस्सा बन रही हैं। एक तकनीकी विशेषज्ञ और एआई के समर्थक होने के नाते, वेम्पति से उम्मीद की जा रही है कि वे फिल्म प्रमाणन की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, डिजिटल और तेज बनाएंगे। उनके नेतृत्व में सेंसर बोर्ड फिल्मों की सामग्री के साथ-साथ तकनीकी पहलुओं और आधुनिक वितरण माध्यमों को समझने में अधिक सक्षम होगा। फिल्म जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि उनका अनुभव बोर्ड को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में मददगार साबित होगा।
CBFC New Chairman: फिल्म उद्योग की नई चुनौतियां और सेंसर बोर्ड
आज के दौर में सेंसर बोर्ड के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं। जहां एक तरफ फिल्मकारों की रचनात्मक स्वतंत्रता का सवाल होता है, वहीं दूसरी तरफ सामाजिक भावनाओं और नैतिक मूल्यों की रक्षा की जिम्मेदारी भी बोर्ड पर होती है। अक्सर फिल्मों के दृश्यों या संवादों को लेकर विवाद सामने आते रहते हैं। ऐसे में शशि शेखर वेम्पति जैसे अनुभवी प्रशासक के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि वे कैसे इन विवादों का निपटारा करते हैं और भारतीय सिनेमा को एक स्वस्थ वातावरण प्रदान करते हैं। सरकार की ओर से लिया गया यह फैसला आने वाले समय में मनोरंजन जगत की नई नीतियों और दिशा-निर्देशों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
शशि शेखर वेम्पति के पदभार संभालते ही फिल्म उद्योग की नजरें अब उन पर टिक गई हैं। वेम्पति का पिछला रिकॉर्ड और उनकी कार्यशैली यह संकेत देती है कि वे नवाचार और नियमों के बीच एक बेहतर तालमेल बैठाने में सफल रहेंगे। फिल्म प्रमाणन बोर्ड को अब एक ऐसा नेतृत्व मिला है जो तकनीक की भाषा समझता है और भारतीय संस्कृति की जड़ों से भी जुड़ा हुआ है। यह नियुक्ति न केवल प्रशासनिक है बल्कि भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहुंच को और अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में एक बड़ा कदम भी हो सकती है।
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