Shardiya Navratri 2026: मां दुर्गा को चढ़ाएं कमल का फूल, जानें पूजा विधि और धार्मिक महत्व
शारदीय नवरात्रि में कमल अर्पित करने की विधि, मंत्र, 108 पुष्पों का विधान और मान्यताएं जानें।
Shardiya Navratri 2026: सनातन धर्म में शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व आदिशक्ति मां भगवती दुर्गा की विशेष कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में भक्त देवी के नौ विभिन्न स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं। माता रानी को लाल चुनरी, रोली, अक्षत, नैवेद्य और सुगंधित पुष्प अर्पित करने की समृद्ध परंपरा है, लेकिन इन सभी पुष्पों में कमल के पुष्प का स्थान सर्वोपरि माना गया है। कमल केवल सुंदरता का प्रतीक नहीं, बल्कि आध्यात्मिकता, निर्मलता और लक्ष्मी-तत्व का जीवंत स्वरूप है। नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा का कमल के पुष्पों से पूजन और कमल अभिषेक करने से जीवन के समस्त अंधकार और दरिद्रता का नाश होता है।
Shardiya Navratri 2026: मां दुर्गा की उपासना में कमल के पुष्प का विशेष महत्व
कमल के पुष्प को वेदों और पुराणों में ‘पद्म’ कहा गया है। यह पुष्प जल और कीचड़ में उत्पन्न होने के बावजूद निर्लिप्त और परम पवित्र रहता है। शास्त्रों के अनुसार, मां दुर्गा स्वयं कमलासन पर विराजमान होती हैं और उनके हाथों में भी कमल पुष्प सुशोभित रहता है। देवी पुराण के अनुसार, नवरात्रि में जब कोई साधक मां जगदंबा को ताजा खिला हुआ कमल अर्पित करता है, तो उसे सैकड़ों अन्य सामान्य पुष्पों के अर्पण से भी अधिक पुण्य फल की प्राप्ति होती है। यह पुष्प साधक के अहंकार को समाप्त कर उसमें वैराग्य और भक्ति का संचार करता है।
कमल पूजन और अभिषेक से जुड़ी प्रमुख धार्मिक मान्यताएं
कमल पुष्प के अर्पण को लेकर सनातन संस्कृति में कई गूढ़ आध्यात्मिक और लौकिक मान्यताएं प्रचलित हैं। पहली मान्यता के अनुसार, कमल को धन, वैभव और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां महालक्ष्मी का साक्षात आसन माना जाता है। शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा को कमल अर्पित करने से घर में स्थाई लक्ष्मी का वास होता है और आर्थिक तंगी दूर होती है। दूसरी मान्यता यह है कि यह पुष्प जीवन की सभी कठिन बाधाओं से लड़ने की आत्मिक शक्ति देता है। जिस प्रकार कमल तमाम प्रतिकूलताओं के बीच खिलता है, उसी प्रकार देवी के साधक को भी हर परिस्थिति में अविचल रहने का वरदान मिलता है।
तीसरी मान्यता मानसिक शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा के विस्तार से जुड़ी है। कमल की सुगंध और दिव्यता व्यक्ति के भीतर मौजूद तामसिक विकारों को नष्ट करती है। चौथी मान्यता के तहत नवरात्रि की महाअष्टमी और महानवमी के दिन मां दुर्गा को कमल अर्पित करने से परिवार में कलह और तनाव समाप्त होता है तथा कुल में वंश वृद्धि और यश की प्राप्ति होती है। पांचवीं मान्यता के अनुसार, यह पुष्प समर्पित करना साधक द्वारा अपने चित्त को निर्मल बनाकर ईश्वर के चरणों में संपूर्ण आत्मसमर्पण करने का प्रतीक है।
मां दुर्गा के कमल अभिषेक और अर्पण की प्रामाणिक विधि
नवरात्रि के किसी भी दिन, विशेषकर अष्टमी या नवमी तिथि पर कमल से विशेष पूजन करने के लिए प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें और पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। सबसे पहले घी का अखंड दीपक और धूप प्रज्वलित करें।
यदि आपके पास धातु की मां दुर्गा की प्रतिमा या श्रीयंत्र उपलब्ध है, तो पहले पंचामृत और शुद्ध जल से उनका विधिवत स्नान कराएं। इसके पश्चात मां दुर्गा को चंदन, कुमकुम, अक्षत और लाल चुनरी अर्पित करें। अब हाथों में कमल का पुष्प लेकर देवी के मूल मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ अथवा ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ का उच्चारण करते हुए मां के चरणों में कमल अर्पित करें। यदि कमल के जल से अभिषेक करना हो, तो तांबे या चांदी के पात्र में गंगाजल और गुलाब जल भरकर उसमें कमल की पंखुड़ियां डालें और उस अभिमंत्रित जल से प्रतिमा का अभिषेक करें। अंत में मां को मखाने की खीर या बताशे का भोग लगाकर दुर्गा चालीसा का पाठ और आरती करें।
Shardiya Navratri 2026: 108 कमल पुष्पों का विधान और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की कथा
धार्मिक ग्रंथों में शारदीय नवरात्रि के अष्टमी और नवमी के संधिकाल (संधि पूजा) में मां दुर्गा को 108 नीलकमल या सामान्य कमल अर्पित करने का अत्यंत दुर्लभ और प्रभावी विधान बताया गया है। इस परंपरा का मूल संदर्भ रामायण के ‘अकाल बोधन’ प्रसंग से जुड़ता है। लंका में रावण के विरुद्ध युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए भगवान श्रीराम ने आश्विन मास में मां चंडी की आराधना की थी और उन्हें 108 दुर्लभ कमल अर्पित करने का संकल्प लिया था।
कथा के अनुसार, देवी ने श्रीराम की परीक्षा लेने के लिए पूजा की थाली से एक कमल गुप्त रूप से छिपा दिया। पूजा खंडित होने के भय से भगवान श्रीराम ने अपने एक नेत्र (राजीवनयन) को तीर से निकालकर माता के चरणों में अर्पित करने का निर्णय लिया। श्रीराम की इस अद्वितीय और अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर मां भगवती तत्काल प्रकट हुईं और उन्हें विजयश्री का आशीर्वाद दिया। यही कारण है कि शारदीय नवरात्रि में कमल पुष्प चढ़ाना मनोकामना सिद्धि का अचूक उपाय माना जाता है। सामान्य गृहस्थ साधक यदि 108 कमल जुटाने में असमर्थ हों, तो वे अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार एक, पांच या ग्यारह कमल चढ़ाकर भी मां भगवती का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
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