CM Yogi: यूपी में नौ लाख से अधिक किसानों को 493 करोड़ की राहत, सीएम योगी बोले- नुकसान की भरपाई होगी
CM Yogi: यूपी में नौ लाख से अधिक किसानों को 493 करोड़ की राहत, सीएम योगी बोले- नुकसान की भरपाई होगी
सीएम योगी ने बताया कि इस वर्ष बरसात के मौसम में अब तक आपदा प्रभावित किसानों और नागरिकों को लगभग एक हजार करोड़ रुपये की सहायता पहले ही दी जा चुकी है। आज की राशि उसी श्रृंखला का हिस्सा है। उन्होंने जोर दिया कि सहायता राशि सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंच रही है ताकि बीच में कोई कटौती या बिचौलिया न हो।
CM Yogi: कितने किसानों को कितनी राशि मिली और यह कैसे पहुंची?
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, डिजिटल क्रॉप सर्वे रिपोर्ट के आधार पर जिन जिलों में फसल क्षति की पुष्टि हुई, वहां के किसानों को तत्काल सहायता दी गई। कुल 9 लाख 18 हजार 91 किसानों के खातों में 493 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर किसी किसान को 25 हजार रुपये की सहायता स्वीकृत हुई है तो पूरी राशि सीधे उसके बैंक खाते में जाएगी।
यह राशि फसल क्षति के लिए कृषि निवेश अनुदान के रूप में दी जा रही है। सरकार का दावा है कि पिछले वर्षों की तुलना में अब सर्वे और भुगतान की प्रक्रिया तेज हो गई है। प्रभावित क्षेत्रों में फील्ड सर्वे के बाद रिपोर्ट मिलते ही डीबीटी शुरू कर दी गई।
फसल के अलावा मकान, पशु और जनहानि पर क्या सहायता दी जा रही है?
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि 493 करोड़ रुपये केवल फसल क्षति के लिए हैं। मकान क्षतिग्रस्त होने पर अलग से सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत अतिरिक्त 1.20 लाख रुपये की मदद उपलब्ध कराई गई है। पूरी तरह नष्ट हुए मकानों के लिए तत्काल आवास उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि आंशिक क्षति पर नियमानुसार मुआवजा दिया जा रहा है।
पशुहानि के मामलों में भी सहायता की व्यवस्था है। जनहानि होने पर संबंधित परिवार को 24 घंटे के अंदर चार लाख रुपये की सहायता देने के निर्देश जारी किए गए हैं। आकाशीय बिजली से होने वाली क्षति पर मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत पांच लाख रुपये तक की मदद का प्रावधान बताया गया।
डीबीटी से सीधे खाते में पैसा पहुंचने का क्या महत्व है?
सीएम योगी ने कहा कि पहले सहायता राशि जमीन पर पहुंचते-पहुंचते काफी कम हो जाती थी। उन्होंने पुरानी व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि अब प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री द्वारा दी जाने वाली मदद सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंचती है। बीच में कोई बिचौलिया पैसा नहीं काट सकता।
उन्होंने डिजिटल क्रॉप सर्वे को महत्वपूर्ण बताया। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद जिन जिलों में नुकसान की पुष्टि हुई, वहां तुरंत भुगतान शुरू कर दिया गया। सरकार का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ी है और किसानों को समय पर राहत मिल रही है।
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों से क्या तुलना की?
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले की व्यवस्था का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय बिजली नहीं आती थी लेकिन बिल आता था, जबकि अब स्थिति बदल गई है। उन्होंने हुदहुद चक्रवात का उदाहरण देते हुए कहा कि 2014 में केंद्र सरकार ने 3,200 करोड़ रुपये भेजे थे, लेकिन किसानों तक केवल 800 करोड़ रुपये ही पहुंच पाए थे।
सीएम योगी ने कहा कि सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार ने लघु और सीमांत किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया, 16 लाख निजी ट्यूबवेल की बिजली मुफ्त की और सिंचाई का विस्तार किया। उन्होंने दावा किया कि अब संकट की घड़ी में सरकार किसानों के साथ खड़ी है।
धान खरीद और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आगे क्या इंतजाम किए जा रहे हैं?
मुख्यमंत्री ने बताया कि जहां बारिश नहीं हुई है वहां धान खरीद के केंद्र शुरू हो रहे हैं। अतिवृष्टि से जलभराव वाले जिलों में 15 अक्टूबर से धान के साथ ज्वार, बाजरा और मक्का जैसे मोटे अनाज के क्रय केंद्र भी खोले जाएंगे। उन्होंने कहा कि खरीद की कोई सीमा नहीं रखी गई है और किसान जितना लाएगा, खरीद की जाएगी। भुगतान डीबीटी से सीधे खाते में जाएगा।
बाढ़ से कटान वाले स्थानों पर राहत और बचाव कार्य शुरू करने, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और आवागमन बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं। अर्ली वार्निंग सिस्टम के जरिए आकाशीय बिजली की चेतावनी भी दी जा रही है। सरकार का कहना है कि आपदा प्रबंधन और किसानों की सहायता के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी।
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