SIR Controversy: पीयूष गोयल ने कांग्रेस को घेरा, चुनाव आयुक्तों को राजनीतिक पद देने का लगाया आरोप
SIR Controversy: पीयूष गोयल ने कांग्रेस को घेरा, चुनाव आयुक्तों को राजनीतिक पद देने का लगाया आरोप
SIR Controversy: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधा है। गोयल ने राहुल गांधी को कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा रेड फ्लैग बताते हुए उनसे 10 सवालों के जवाब देने की चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने शासनकाल में चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों को बाद में राजनीतिक पदों पर नियुक्त करती रही है। गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन, एम.एस. गिल और केरल के पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू. केलकर जैसे मामलों का जिक्र करते हुए जवाब मांगा।
इसके साथ ही उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस को लगातार चुनावी हार का सामना करने वाला बताया और दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान एक गर्भवती महिला पत्रकार के साथ कथित बदसलूकी की भी आलोचना की। गोयल के इन बयानों से SIR और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच टकराव एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
SIR Controversy: पीयूष गोयल ने राहुल गांधी से कौन से मुख्य सवाल उठाए?
पीयूष गोयल ने वोट चोरी के आरोपों पर राहुल गांधी से हलफनामा देने की बात पूछी। उन्होंने कहा कि अगर सबूत हैं तो उन्हें औपचारिक रूप से सामने क्यों नहीं रखा जाता। बिहार में SIR प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस के विरोध न करने पर भी सवाल उठाया गया। गोयल ने तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े दावों का भी उल्लेख किया।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर कांग्रेस के सवालों को लेकर उन्होंने 2023 के कानून का हवाला दिया। इस कानून के तहत चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। गोयल ने कांग्रेस के कुछ नेताओं के कथित बयानों का जिक्र करते हुए पूछा कि SIR की तारीफ करने वाले नेता बाद में विरोध क्यों करते हैं।
चुनाव आयुक्तों को राजनीतिक पद देने के आरोप का क्या आधार है?
गोयल ने केरल के पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी टीकाराम मीणा को राजस्थान कांग्रेस की घोषणापत्र समिति में जगह मिलने का मुद्दा उठाया। मीणा 2023 में राजस्थान कांग्रेस की घोषणापत्र समिति के सह-संयोजक बने थे। इसी तरह रतन यू. केलकर को विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन का सचिव बनाए जाने पर सवाल किया। मई 2026 में हुई इस नियुक्ति को लेकर राजनीतिक विवाद भी हुआ था।
एम.एस. गिल को वर्ष 2000 में पद्म विभूषण मिलने और बाद में राज्यसभा पहुँचने तथा केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने का भी जिक्र किया गया। गिल 1996 से 2001 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे थे। गोयल ने इन घटनाओं को जोड़ते हुए कांग्रेस पर अधिकारियों को राजनीतिक पदों से पुरस्कृत करने का आरोप लगाया।
टी.एन. शेषन और अन्य पूर्व आयुक्तों के मामलों का जिक्र क्यों किया?
पीयूष गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस उनकी ईमानदारी की प्रशंसा करती थी लेकिन 1999 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें गांधीनगर सीट से लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ उम्मीदवार बनाया था। शेषन 1990 से 1996 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे थे और कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़कर हार गए थे।
आर.के. त्रिवेदी को 1986 में गुजरात का राज्यपाल बनाए जाने और नवीन चावला की नियुक्ति तथा उन्हें हटाने की सिफारिश पर कार्रवाई न होने का भी उल्लेख किया गया। गोयल ने इन पुराने मामलों को वर्तमान SIR विवाद से जोड़कर कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठाए।
दिल्ली प्रदर्शन और कांग्रेस के रुख पर गोयल ने क्या कहा?
गोयल ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान एक गर्भवती महिला पत्रकार के साथ कथित बदसलूकी की निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकार को धक्का दिया गया और बाद में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। राहुल गांधी पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया गया।
ममता बनर्जी को लेकर कांग्रेस के रुख पर भी सवाल उठाए गए। गोयल ने कहा कि चुनावी मुकाबले और राजनीतिक आरोपों के बीच चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर अलग-अलग मानदंड अपनाए जाते हैं। कांग्रेस के कुछ नेताओं के बयानों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि पार्टी के भीतर भी SIR को लेकर अलग-अलग राय रही है।
SIR विवाद में आगे क्या स्थिति बन सकती है?
पीयूष गोयल के इन बयानों से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। भाजपा की ओर से कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप लगाए जा रहे हैं जबकि कांग्रेस चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाती रही है। गोयल ने कहा कि कांग्रेस को चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने से पहले अपने पुराने फैसलों पर जवाब देना चाहिए।
इस विवाद का असर आगामी चुनावी तैयारियों पर भी पड़ सकता है। दोनों पक्षों के बयानों से मतदाता सूची की शुद्धता और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। आगे संसद और सार्वजनिक मंचों पर इस मुद्दे पर और तीखी बहस होने की संभावना है।
SIR विवाद में पीयूष गोयल के राहुल गांधी पर हमले ने भाजपा और कांग्रेस के बीच टकराव को नया रूप दिया है। चुनाव आयुक्तों से जुड़े पुराने मामलों को उठाकर गोयल ने कांग्रेस पर राजनीतिक नियुक्तियों का आरोप लगाया है। राहुल गांधी से 10 सवाल पूछकर उन्होंने जवाब देने की चुनौती दी है। दिल्ली प्रदर्शन से जुड़ी घटना और SIR प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। इस राजनीतिक बहस से मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका पर और ध्यान केंद्रित होने की उम्मीद है। दोनों पक्षों के रुख से आगामी दिनों में विवाद और गहरा सकता है।
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