Bandhan Bank Success Story: 2 लाख के उधार से शुरू हुआ बंधन बैंक, अब 27 हजार करोड़ का बैंक कैसे बना

Bandhan Bank Success Story: चंद्रशेखर घोष ने ₹2 लाख उधार और 3 कर्मचारियों से बंधन बैंक शुरू किया। बांग्लादेश से प्रेरित यह मॉडल आज महिलाओं का सबसे बड़ा बैंक बन गया है।

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Bandhan Bank Success Story: बंधन बैंक की शुरुआत पश्चिम बंगाल के बागनान इलाके से हुई थी। संस्थापक चंद्रशेखर घोष के पास 2001 में करीब दो लाख रुपये थे, जिनमें से ज्यादातर रिश्तेदारों से उधार लिए गए थे। उनके साथ सिर्फ तीन कर्मचारी थे। मकसद साफ था- गरीब महिलाओं को साहूकारों के चंगुल से निकालकर छोटे कारोबार के जरिए आत्मनिर्भर बनाना। बांग्लादेश में काम करने के दौरान उन्होंने देखा था कि छोटी आर्थिक मदद भी जिंदगी बदल सकती है। आज वही बैंक करीब 27,261 करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाला संस्थान बन चुका है और इसकी सबसे बड़ी ग्राहक महिलाएं ही हैं।

चंद्रशेखर घोष ने 1985 में ढाका यूनिवर्सिटी से सांख्यिकी में मास्टर डिग्री ली थी। इसके बाद उन्होंने बांग्लादेश की संस्था बीआरएसी में काम किया, जहां महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास के मॉडल को करीब से समझा। भारत लौटने के बाद सामाजिक संस्थाओं के साथ काम करते हुए उन्होंने देखा कि ग्रामीण इलाकों में छोटे कर्ज पर साहूकार 200 से 300 प्रतिशत तक ब्याज वसूल रहे थे। इसी समस्या ने उन्हें अपना मॉडल शुरू करने के लिए प्रेरित किया।

Bandhan Bank Success Story: शुरुआत और नाम का मतलब

2000 में नौकरी छोड़ने के बाद घोष ने 2001 में काम शुरू किया। शुरुआत में महिलाओं को कर्ज लेने के लिए राजी करना आसान नहीं था। उन्हें भरोसा दिलाना पड़ता था कि पैसा कारोबार बढ़ाने और परिवार की आमदनी सुधारने में मदद करेगा। बंधन नाम भी इसी सोच से जुड़ा है। इसका मतलब जुड़ाव या रिश्ता है। घोष चाहते थे कि गरीब महिलाओं को कर्ज देकर उन्हें आर्थिक रूप से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जाए। शुरू में गांव की महिलाएं भरोसा नहीं करती थीं, लेकिन धीरे-धीरे मॉडल आगे बढ़ा।

अप्रैल 2001 में बंधन ने गैर-लाभकारी संस्था के रूप में काम शुरू किया। अप्रैल 2006 में इसे एनबीएफसी बनाया गया। भारतीय रिजर्व बैंक से बैंकिंग लाइसेंस मिलने के बाद 23 अगस्त 2015 को बंधन बैंक ने औपचारिक रूप से काम शुरू किया। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उद्घाटन किया था। पहले ही दिन बैंक ने 501 शाखाओं, 50 एटीएम और 24 राज्यों में मौजूदगी के साथ शुरुआत की। उस समय 1.43 करोड़ खाते और करीब 10,448 करोड़ रुपये के कर्ज थे।

आज का आकार और हिस्सेदारी

आज बंधन बैंक के देशभर में 6400 से ज्यादा आउटलेट्स और 435 से ज्यादा एटीएम हैं। बैंक में करीब 75,000 कर्मचारी काम करते हैं। प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 37.54 प्रतिशत है। फॉरेन इन्वेस्टर्स की हिस्सेदारी 18.64 प्रतिशत, डोमेस्टिक निवेशकों की 27.47 प्रतिशत और सरकार की 0.07 प्रतिशत है। हाल में अबू धाबी की इन्वेस्टमेंट कंपनी प्रमोटर बंधन फाइनेंशियल सर्विसेज में हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में है, जिससे बैंक चर्चा में है।

बैंक की सफलता का बड़ा आधार माइक्रोफाइनेंस रहा है। महिलाओं को छोटे कर्ज देकर उनके छोटे कारोबार को बढ़ावा देने का मॉडल कामयाब रहा। आज भी बैंक की सबसे ज्यादा ग्राहक महिलाएं हैं। यह मॉडल साहूकारों पर निर्भरता कम करने और आर्थिक जुड़ाव बढ़ाने पर केंद्रित रहा है।

सफर और आगे की संभावना

एनजीओ से एनबीएफसी और फिर पूर्ण बैंक बनने तक का सफर दिखाता है कि छोटी शुरुआत भी बड़े परिणाम दे सकती है। बांग्लादेश में देखे गए अनुभव को भारत के ग्रामीण संदर्भ में ढाला गया। महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर फोकस ने बैंक को अलग पहचान दी। अब विदेशी निवेश की संभावना से बैंक के विस्तार और मजबूती की उम्मीद बढ़ी है।

बंधन बैंक की कहानी दो लाख रुपये के उधार और तीन कर्मचारियों से शुरू होकर आज 27 हजार करोड़ रुपये के मार्केट कैप तक पहुंचने की है। चंद्रशेखर घोष ने बांग्लादेश के अनुभव से प्रेरित होकर गरीब महिलाओं को साहूकारों से बचाने और छोटे कर्ज से आत्मनिर्भर बनाने का मॉडल अपनाया। एनजीओ से शुरू होकर एनबीएफसी और फिर 2015 में पूर्ण बैंक बनने तक का सफर महिलाओं को सबसे बड़ी ग्राहक बनाने पर आधारित रहा। आज बैंक के 6400 से ज्यादा आउटलेट्स और करीब 75,000 कर्मचारी हैं। विदेशी निवेश की संभावना से आगे विस्तार की गुंजाइश दिखती है। यह मॉडल दिखाता है कि स्थानीय जरूरतों पर आधारित छोटा कदम भी बड़े संस्थान का रूप ले सकता है।

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