Sharadiya Navratri 2026: घट स्थापना के बाद भूलकर भी न करें ये 3 गलतियां, पूजा के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

कलश स्थापना के बाद घर की स्वच्छता, सात्विक आहार और शांत वातावरण का रखें विशेष ध्यान

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Sharadiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्र 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर से होने जा रही है। नवरात्र के पावन नौ दिनों के दौरान मां दुर्गा के नौ अलग-अलग दिव्य स्वरूपों की आराधना पूरे विधि-विधान और निष्ठा के साथ की जाती है। श्रद्धालु अपने घरों में कलश स्थापना (घटस्थापना) करते हैं, जौ बोते हैं और नौ दिनों तक पूजा स्थल की पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने का प्रयास करते हैं। शास्त्रों और सनातन परंपरा के अनुसार, घटस्थापना के बाद केवल कर्मकांड ही नहीं, बल्कि आचरण, विचार और खान-पान में भी सात्विकता बनाए रखना अनिवार्य माना जाता है। घटस्थापना के उपरांत कुछ विशेष नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है, जिससे घर में सुख, शांति और देवी भगवती की कृपा बनी रहे।

Sharadiya Navratri 2026: घटस्थापना और अखंड ज्योति के बाद घर को अकेला न छोड़ें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस घर में शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित किया जाता है और अखंड दीपक प्रज्वलित किया जाता है, उस घर को पूरी तरह सूना या बंद करके नहीं छोड़ना चाहिए। कलश को साक्षात देवी की उपस्थिति और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, इसलिए पूजा स्थल की निरंतर देखभाल जरूरी होती है। विशेष रूप से यदि आपने अखंड ज्योति का संकल्प लिया है, तो उसमें नियमित रूप से घी या तेल डालना और बत्ती को संतुलित रखना आवश्यक है ताकि वह बुझे नहीं। सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी दीपक को हवा के झोंकों और ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखना चाहिए। घर में किसी न किसी सदस्य की उपस्थिति से पूजा स्थल की पवित्रता और ज्योति की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित रहती हैं।

तामसिक भोजन, नशा और अपवित्र आचरण से दूरी बनाएं

नवरात्र को आत्म-शुद्धि और आंतरिक तपस्या का पर्व माना जाता है। इसलिए घटस्थापना के बाद रसोई और आहार की सात्विकता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। जो लोग नौ दिनों का उपवास रख रहे हैं, वे फलाहार और सात्विक नियमों का पालन करते ही हैं, लेकिन जो लोग व्रत नहीं रख रहे हैं, उन्हें भी इन दिनों मांसाहार, मदिरा, तंबाकू और लहसुन-प्याज जैसे तामसिक भोजन से पूर्णतः दूर रहना चाहिए। खान-पान की सात्विकता सीधे तौर पर मन की शांति और एकाग्रता को प्रभावित करती है। सात्विक आहार ग्रहण करने से चित्त शांत रहता है और साधक का मन देवी की उपासना व मंत्र जप में बेहतर तरीके से केंद्रित हो पाता है।

घर में क्रोध, अपशब्द और कलह-विवाद से बचें

नवरात्र केवल बाह्य आडंबर या उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक और वाणी के अनुशासन का समय है। घटस्थापना के बाद घर के वातावरण को शांत, सकारात्मक और प्रेमपूर्ण बनाए रखना सबसे बड़ा नियम है। परिवार के सदस्यों को कटु वचन बोलने, बेवजह विवाद करने, चीखने-चिल्लाने और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। धार्मिक ग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख है कि जिस स्थान पर क्लेश, अशांति और बड़ों का अनादर होता है, वहां दैवीय ऊर्जा और सकारात्मकता का वास नहीं होता। यदि किसी बात पर वैचारिक मतभेद हो भी जाए, तो उसे संयम और धैर्य के साथ सुलझाना चाहिए ताकि घर का आध्यात्मिक वातावरण प्रभावित न हो।

Sharadiya Navratri 2026: पूजा स्थल की नियमित स्वच्छता और शुद्धता का रखें ध्यान

घटस्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह और शाम पूजा स्थल की विधिवत सफाई करनी चाहिए। कलश, स्थापित नारियल, बोए गए जौ और दीपक के आसपास कभी भी धूल या गंदे फूल एकत्र न होने दें। बासी फूल और पूजा की जली हुई बत्तियां प्रतिदिन हटाकर साफ सामग्री का उपयोग करें। पूजा में प्रयुक्त होने वाले बर्तन, गंगाजल का पात्र और आरती की थाली हमेशा शुद्ध और व्यवस्थित रखें। स्थानीय पंचांग और शुभ मुहूर्तों का ध्यान रखते हुए प्रतिदिन देवी मां को ताजे पुष्प, धूप, नैवेद्य और आरती अर्पित करें।
शारदीय नवरात्र आत्मिक अनुशासन और श्रद्धा का उत्सव है। नियमों का पालन अपनी शारीरिक क्षमता, पारिवारिक रीति-रिवाजों और निष्काम भाव से करना चाहिए। घटस्थापना के बाद घर में स्वच्छता, सात्विक जीवनशैली और सौहार्दपूर्ण व्यवहार बनाए रखना ही नवरात्र की साधना का मूल तत्व है।

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