Stock Market 8 October 2026: सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट के संकेत, RBI के फैसले और कच्चे तेल का दबाव

RBI की रेपो रेट बढ़ोतरी, महंगा कच्चा तेल और FII बिकवाली से बाजार की नजर आज के कारोबार पर

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Stock Market 8 October 2026: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को कारोबारी सत्र की शुरुआत दबाव और भारी सतर्कता के बीच होने के प्रबल संकेत मिल रहे हैं। वैश्विक बाजारों से मिले सुस्त संकेतों, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए तेज उछाल और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में की गई अचानक बढ़ोतरी ने दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। इससे पहले बुधवार के सत्र में भी बाजार का दो दिनों का तेजी का सिलसिला टूट गया था। आज गुरुवार को बाजार की नजर वैश्विक रुझानों के साथ-साथ विदेशी संस्थागत निवेशकों की चाल और चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के पहले बड़े वित्तीय नतीजों पर टिकी रहेगी।

Stock Market 8 October 2026: बुधवार को तेजी पर लगा ब्रेक, लाल निशान में बंद हुए थे प्रमुख सूचकांक

बुधवार, 7 अक्टूबर को घरेलू इक्विटी बाजार में बिकवाली का दबाव हावी रहा, जिससे दोनों बेंचमार्क सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 429.11 अंक यानी 0.59 प्रतिशत फिसलकर 72,638.70 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 सूचकांक 173.05 अंक टूटकर 22,603.05 के स्तर पर आ गया था।
सत्र के दौरान ऑटो, मेटल, रियल एस्टेट, आईटी और एफएमसीजी जैसे अधिकांश प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। हालांकि चुनिंदा सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकिंग शेयरों ने निचले स्तरों पर सहारा देने का प्रयास किया, लेकिन समग्र बाजार धारणा कमजोर बनी रही, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि निवेशक मौजूदा मूल्यांकन पर नया जोखिम उठाने से बच रहे हैं।

GIFT Nifty और एशियाई बाजारों से मिले कमजोर शुरुआत के संकेत

गुरुवार सुबह गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) के शुरुआती कारोबार से घरेलू बाजार के लिए नरमी के रुझान मिले। शुरुआती घंटों में गिफ्ट निफ्टी 22,550 से 22,600 के दायरे में कारोबार करता दिखा, जो पिछले सत्र के निफ्टी क्लोजिंग स्तर से नीचे की स्थिति दर्शाता है।
वैश्विक मोर्चे पर एशियाई बाजारों में निक्केई, हैंग सेंग और कोस्पी में भी मिलाजुला या सुस्त रुख देखने को मिला, जबकि अमेरिकी वॉल स्ट्रीट सूचकांकों में बॉन्ड यील्ड में तेजी के कारण दबाव बना रहा। विश्लेषकों का मानना है कि इन मिले-जुले विदेशी संकेतों के बीच घरेलू बाजार शुरुआती घंटों में तेज उतार-चढ़ाव दिखा सकता है।

RBI का दर वृद्धि फैसला और कैलिब्रेटेड टाइटनिंग का असर

बाजार की हालिया चाल में रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा (MPC) के फैसलों की अहम भूमिका रही है। केंद्रीय बैंक ने मुद्रास्फीति के दबावों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है, जो लंबे अंतराल के बाद हुई दर वृद्धि है। इसके साथ ही नीतिगत रुख को ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ में तब्दील कर दिया गया है।
ब्याज दरों में इस बढ़ोतरी से होम लोन, ऑटो लोन और कॉरपोरेट उधारी लागत में वृद्धि होने की संभावना है, जिससे ऑटो और रियल एस्टेट जैसे ब्याज-संवेदनशील क्षेत्रों की मांग पर तात्कालिक असर पड़ सकता है। हालांकि ऋण दरों में वृद्धि से बैंकों के शुद्ध ब्याज मार्जिन (NIM) में संभावित बदलावों पर बाजार नजर बनाए हुए है।

कच्चा तेल 100 डॉलर के पार और FIIs की लगातार निकासी

भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों के लिए ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर पहुंचना एक बड़ी चुनौती बन गया है। कच्चे तेल के महंगे होने से भारत के चालू खाता घाटे, घरेलू मुद्रा विनिमय दर और कंपनियों के इनपुट लागत मार्जिन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका गहरा जाती है।
इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की अनवरत बिकवाली का सिलसिला भी जारी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बुधवार के सत्र में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय द्वितीयक बाजार से 6,121 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की, जो लगातार नौवें सत्र में शुद्ध निकासी को दर्शाता है। विदेशी पूंजी के इस बहिर्वाह ने सूचकांकों की बढ़त को सीमित कर रखा है।

Stock Market 8 October 2026: TCS के नतीजों से होगी Q2 अर्निंग सीजन की औपचारिक शुरुआत

8 अक्टूबर को बाजार का ध्यान कॉरपोरेट कमाई के सीजन पर भी केंद्रित रहेगा। देश की सबसे बड़ी आईटी सेवा प्रदाता कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) आज बाजार बंद होने के बाद अपने सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजे और अंतरिम लाभांश की घोषणा करने जा रही है।
निवेशक आईटी दिग्गजों के राजस्व वृद्धि, ऑपरेटिंग मार्जिन, क्लाउड व एआई संबंधित नए सौदों (डील विन्स) और प्रबंधन की भविष्योन्मुखी टिप्पणियों को बारीकी से परखेंगे। टीसीएस के वित्तीय नतीजे न केवल पूरे आईटी सेक्टर की दिशा तय करेंगे, बल्कि आगामी कारोबारी सत्रों के लिए बाजार के समग्र सेंटिमेंट को भी प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।

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