SIR Protest: INDIA Bloc का बड़ा प्रदर्शन, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

दिल्ली में विपक्ष का प्रदर्शन, बेंगलुरु में CJP का चप्पल प्रोटेस्ट और पीपुल्स ट्रिब्यूनल

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SIR Protest: देश भर में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर शुरू हुआ सियासी संग्राम अब चरम पर पहुंच चुका है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया की समीक्षा की मांग को लेकर विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक गुरुवार को राजधानी दिल्ली में बड़े विरोध प्रदर्शन की तैयारी में जुटा है। इससे पहले बुधवार को विपक्षी सांसदों को जंतर-मंतर जाने से रोककर पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की घटना ने आंदोलन की आग को और भड़का दिया है। वहीं दूसरी ओर, इस विवाद की गूंज दक्षिण भारत में भी सुनाई दे रही है, जहां बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में नागरिक समाज और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा ‘पीपुल्स ट्रिब्यूनल’ और महिलाओं के समर्थन में ‘चप्पल प्रोटेस्ट’ का आयोजन किया गया है।

SIR Protest: दिल्ली की सड़कों पर फिर उतरेगा INDIA ब्लॉक, जंतर-मंतर पर तनाव

बुधवार को सांसदों की गिरफ्तारी और तीखी पुलिस झड़प के बाद INDIA ब्लॉक के नेताओं ने गुरुवार को अपने आंदोलन को और अधिक आक्रामक बनाने का फैसला किया है। विपक्षी सांसदों का स्पष्ट आरोप है कि एसआईआर की आड़ में देश भर की मतदाता सूचियों से लाखों योग्य मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से हटाए गए हैं। बुधवार को जब विपक्षी सांसद संसद भवन से जंतर-मंतर की ओर बढ़े, तो अशोका रोड पर भारी पुलिस बल ने बैरिकेड्स लगाकर उन्हें रोक लिया था, जिसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने सड़क पर बैठकर धरना दिया था।
विपक्षी दलों ने चेतावनी दी है कि उनका यह विरोध तब तक नहीं थमेगा जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से इस्तीफा नहीं देते या चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की जाती। इस गतिरोध को सुलझाने के लिए विपक्षी दल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय भी मांग रहे हैं, ताकि संवैधानिक स्तर पर अपनी शिकायत दर्ज कराई जा सके। इसके विपरीत, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) विपक्ष के इन आरोपों को निराधार बताते हुए कह रही है कि यह चुनावी हार की हताशा और संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का प्रयास है।

बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में पीपुल्स ट्रिब्यूनल और चप्पल प्रोटेस्ट

दिल्ली में चल रहे सियासी हंगामे के बीच कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु भी विरोध का नया केंद्र बन गई है। शहर के प्रसिद्ध फ्रीडम पार्क में सुबह 10:30 बजे से एक विशेष ‘पीपुल्स ट्रिब्यूनल’ आयोजित किया गया है। इस ट्रिब्यूनल का मुख्य उद्देश्य उन नागरिकों की सीधी गवाही और पीड़ा को सामने लाना है, जिनका दावा है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बिना किसी पूर्व सूचना या जांच के उनका नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया।
इस सुनवाई के तुरंत बाद आयोजकों ने महिलाओं की सुरक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों के समर्थन में एक प्रतीकात्मक ‘चप्पल प्रोटेस्ट’ का आह्वान किया है। इस विरोध प्रदर्शन में सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके, प्रवक्ता सौरव दास और सह-संयोजक आशुतोष रांका के साथ-साथ प्रसिद्ध अभिनेता प्रकाश राज सहित नागरिक समाज के कई प्रमुख चेहरे शामिल हो रहे हैं। प्रकाश राज ने सोशल मीडिया के जरिए आम जनता से लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के लिए फ्रीडम पार्क पहुंचने की अपील की है।

एसआईआर प्रक्रिया को लेकर क्या हैं मुख्य आपत्तियां और मांगें?

इस पूरे जनआंदोलन का मूल कारण चुनाव आयोग द्वारा चलाया जा रहा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम है। प्रदर्शनकारी संगठनों और विपक्षी दलों की प्रमुख मांग है कि एसआईआर के दौरान हटाए गए सभी नामों की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए और जब तक यह जांच पूरी नहीं होती, तब तक जनवरी 2025 की पूर्व-एसआईआर मतदाता सूची को ही बहाल रखा जाए।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में भारी विसंगतियां हुई हैं, जिससे हाशिए पर मौजूद वर्गों और अल्पसंख्यक बस्तियों के मतदाताओं का मताधिकार छिना है। हालांकि चुनाव आयोग ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा है कि एसआईआर एक वैधानिक और नियमित प्रक्रिया है, जिसका एकमात्र उद्देश्य मतदाता सूची से मृत, स्थानांतरित या अपात्र मतदाताओं को हटाकर सूची को त्रुटिरहित बनाना है। आयोग का कहना है कि सभी निर्णय नियमानुसार और संस्थागत सहमति से लिए गए हैं।

SIR Protest: दिल्ली से बेंगलुरु तक बढ़ता राष्ट्रीय राजनीतिक दबाव

मतदाता सूची संशोधन और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे का यह मुद्दा अब किसी एक शहर या दल तक सीमित नहीं रहा है। दिल्ली के सत्ता गलियारों से लेकर मुंबई के शिवाजी पार्क और अब बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क तक इस आंदोलन का विस्तार यह दर्शाता है कि चुनावी निष्पक्षता को लेकर एक व्यापक राष्ट्रीय विमर्श खड़ा हो चुका है। इसके साथ ही 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर किसान संगठनों और छात्र यूनियनों के समर्थन से एक और विशाल प्रदर्शन प्रस्तावित है।
गुरुवार के इन दोहरे प्रदर्शनों—दिल्ली में सांसदों के मार्च और बेंगलुरु में नागरिक ट्रिब्यूनल—पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सड़कों पर बढ़ते इस भारी दबाव के बीच चुनाव आयोग और केंद्र सरकार इस विवाद को शांत करने के लिए क्या औपचारिक कदम उठाते हैं।

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