Satya Niketan Building Collapse: 3 की दर्दनाक मौत, 9 छात्रों को मलबे से सुरक्षित निकाला गया; रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

पांच मंजिला इमारत ढही, 9 छात्रों को बचाया गया; बेसमेंट और निर्माण खामियां जांच के घेरे में

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Satya Niketan Building Collapse: दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक बड़ा और दर्दनाक हादसा पेश आया, जब छात्रों के आवास (पीजी) के रूप में इस्तेमाल की जा रही एक बहुमंजिला इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह भरभराकर ढह गई। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और जिला आपदा प्रबंधन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और युद्धस्तर पर बचाव अभियान शुरू किया गया। देर शाम तक मलबे से 9 छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि हादसे में 3 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
सत्य निकेतन क्षेत्र दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से सटा हुआ इलाका है, जहां देश के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों छात्र और युवा पीजी व किराये के कमरों में रहते हैं। जिस समय यह हादसा हुआ, उस दौरान इमारत के भीतर कई छात्र मौजूद थे। मलबे में दबे घायलों को तुरंत ग्रीन कॉरिडोर और एम्बुलेंस के माध्यम से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के ट्रॉमा सेंटर तथा सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया गया, जहां गंभीर रूप से घायल छात्रों का उपचार जारी है।

Satya Niketan Building Collapse: दोपहर में अचानक गिरी पांच मंजिला इमारत

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा रविवार दोपहर करीब 1:30 से 1:45 बजे के बीच हुआ। इमारत के गिरने से पहले तेज आवाज सुनाई दी और देखते ही देखते बेसमेंट समेत पांच मंजिलों वाला यह ढांचा जमींदोज हो गया। इमारत ढहते ही चारों तरफ भारी धूल का गुबार छा गया और आसपास के भवनों में रहने वाले लोग दहशत में बाहर की ओर भागे।
स्थानीय निवासियों और आसपास मौजूद छात्रों ने तुरंत साहस दिखाते हुए बचाव कार्य शुरू किया और पुलिस व फायर ब्रिगेड को सूचित किया। दमकल विभाग के स्टेशन ऑफिसर करीब 1:50 बजे मौके पर पहुंचे और तत्काल उच्चाधिकारियों को स्थिति की भयावहता से अवगत कराते हुए अतिरिक्त संसाधनों, क्रेन, कटर और स्निफर डॉग्स की मांग की। संकरी गलियां होने के कारण राहत दलों को भारी मशीनरी अंदर लाने में भारी मशक्कत का सामना करना पड़ा।

रेस्क्यू ऑपरेशन में बरती गई अत्यधिक सावधानी: 9 छात्रों को जीवनदान

हादसे के बाद बचाव दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि भारी कंक्रीट स्लैब और गाटरों को हटाते समय अंदर फंसे हुए जीवित व्यक्तियों को कोई अतिरिक्त चोट न पहुंचे। एनडीआरएफ और दमकलकर्मियों ने कटर और हाइड्रोलिक जैक का इस्तेमाल करते हुए मलबे को अत्यंत सावधानी से काटना शुरू किया।
शुरुआती दौर में छह लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला गया था। जैसे-जैसे मलबे की परतों को साफ किया गया, बचाए गए छात्रों की संख्या बढ़कर नौ हो गई। रेस्क्यू टीमों ने मलबे के भीतर आवाज और कंपन की निगरानी के लिए विशेष सेंसर और प्रशिक्षित श्वान दस्ते का सहारा लिया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मलबे के अंतिम कोने में भी कोई व्यक्ति फंसा न रह जाए।

तीन लोगों की मौत, अस्पतालों में मची रही चीख-पुकार

इस भीषण हादसे में तीन लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। एम्स ट्रॉमा सेंटर और सफदरजंग अस्पताल प्रशासन के अनुसार, मलबे से निकाले गए घायलों में से दो को अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया, जबकि एक अन्य घायल ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।
अस्पतालों के आपातकालीन वार्ड के बाहर पहुंचे छात्रों के सहपाठियों और परिजनों में भारी चिंता और व्याकुलता देखी गई। कई परिजन जो दिल्ली से बाहर अन्य शहरों में रहते हैं, वे फोन पर लगातार अपने बच्चों की कुशलता की जानकारी जुटाने का प्रयास करते रहे। दिल्ली पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने अस्पतालों में एक सहायता केंद्र स्थापित किया है, ताकि घायलों की पहचान और उनके परिजनों को वास्तविक स्थिति से तुरंत अवगत कराया जा सके।

मुख्यमंत्री ने लिया स्थिति का जायजा, मामले पर शुरू हुई तीखी सियासत

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सत्य निकेतन हादसे पर गहरा दुख प्रकट किया और वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों से सीधे संपर्क साधकर राहत व बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएं और मलबे में अंतिम व्यक्ति की तलाश पूरी होने तक रेस्क्यू अभियान बिना रुके जारी रखा जाए।
दूसरी ओर, इस हादसे के बाद राजधानी की सियासत भी गरमा गई है। पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए दिल्ली के नगर निगम और प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि रिहायशी और छात्र बहुल इलाकों में नियमों को ताक पर रखकर हो रहे निर्माण कार्यों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने एमसीडी कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और छात्रों की सुरक्षा की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।

इमारत ढहने के पीछे क्या थी मुख्य वजह? बेसमेंट कार्य और संरचनात्मक खामियां जांच के दायरे में

सत्य निकेतन की इमारत किस कारण से गिरी, इसकी तकनीकी और विधिक जांच दिल्ली पुलिस और विशेषज्ञ इंजीनियरों की संयुक्त टीम द्वारा शुरू कर दी गई है। हालांकि प्राथमिक रिपोर्टों में कुछ गंभीर पहलू सामने आए हैं।
बताया जा रहा है कि इमारत के बेसमेंट में मरम्मत, खुदाई या नवीनीकरण का कार्य चल रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि पांच मंजिला इमारत के बेसमेंट में बिना उचित सुरक्षा टेक (शटर्स/पिलर सपोर्ट) लगाए खुदाई करने से पूरी इमारत की नींव कमजोर हो गई होगी। इसके अतिरिक्त, मानसून के कारण हालिया दिनों में बेसमेंट के आसपास सीपेज और पानी के जमाव ने भी संरचनात्मक ढांचे को नुकसान पहुंचाया हो सकता है। यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस इमारत में स्वीकृत नक्शे से अधिक मंजिलें बनाई गई थीं और क्या इसे व्यावसायिक पीजी के रूप में संचालित करने के लिए आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त थे।

Satya Niketan Building Collapse: छात्र बहुल इलाकों में पीजी इमारतों की सुरक्षा पर गहराए गंभीर सवाल

सत्य निकेतन, मुखर्जी नगर, करोल बाग, लक्ष्मी नगर और विजय नगर जैसे दिल्ली के प्रमुख छात्र केंद्र आज घनी आबादी और अवैध बहुमंजिला निर्माण के केंद्र बन चुके हैं। अधिक से अधिक छात्रों को ठहराने और मुनाफा कमाने के चक्कर में मकान मालिक अक्सर संकरी जगहों पर बिना लोड-बेयरिंग जांच के कई मंजिलें खड़ी कर देते हैं और बेसमेंट में खतरनाक गतिविधियां संचालित करते हैं।
सत्य निकेतन की इस त्रासदी ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि यदि छात्र आवासों और पीजी भवनों का नियमित संरचनात्मक ऑडिट (Structural Audit) और सुरक्षा निरीक्षण नहीं किया गया, तो भविष्य में भी ऐसे हादसों का खतरा बना रहेगा। स्थानीय छात्रों का कहना है कि प्रशासन को केवल हादसे के बाद जागने के स्थान पर पहले से ही सभी इमारतों की मजबूती, आपातकालीन निकास और अग्नि सुरक्षा मानकों की कड़ाई से जांच करनी चाहिए

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