Drought Alert India: कम बारिश और सूखे का खतरा, अल-नीनो के असर को लेकर संसद में सरकार ने बताई पूरी तैयारी

आईएमडी ने पहले ही दी थी कम बारिश की चेतावनी, संसद में सरकार ने बताई पूरी तैयारी

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Drought Alert India: केंद्र सरकार ने लोकसभा में अल-नीनो की स्थिति और भारतीय मॉनसून पर उसके संभावित प्रभाव को लेकर विस्तार से जानकारी दी है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी लगातार अल-नीनो की निगरानी कर रहा है और 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के लिए पहले ही सामान्य से कम बारिश का पूर्वानुमान जारी कर चुका था। इस अलर्ट के कारण संबंधित एजेंसियों और राज्य सरकारों को पहले से तैयारी का मौका मिला है।

अल-नीनो प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि की स्थिति है। इसके कारण भारत में मॉनसून कमजोर पड़ने की आशंका रहती है। हालांकि हर अल-नीनो वर्ष में असर एक जैसा नहीं होता। सरकार ने स्पष्ट किया कि मौसम विभाग इस स्थिति पर नियमित नजर रखता है और समय-समय पर अपडेट जारी करता है ताकि कृषि, जल प्रबंधन और आपदा नियंत्रण से जुड़े विभाग सही फैसले ले सकें।

Drought Alert India: आईएमडी ने पहले ही जारी किया था सामान्य से कम बारिश का अनुमान

आईएमडी ने 13 अप्रैल 2026 को जारी अपने पहले दीर्घकालिक पूर्वानुमान में कहा था कि 2026 के मॉनसून सीजन में बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज यानी एलपीए का 92 प्रतिशत रहने की संभावना है। बाद में दूसरे चरण के पूर्वानुमान में इसे घटाकर 90 प्रतिशत एलपीए कर दिया गया। यह अनुमान सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में आता है। विभाग ने अपने पूर्वानुमानों में अल-नीनो की स्थिति विकसित होने की आशंका भी जताई थी।

सरकार ने संसद में बताया कि यह अग्रिम चेतावनी संबंधित हितधारकों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय देती है। मौसम विभाग रोजाना मॉनसून की बारिश की जानकारी जारी करता है और हर महीने अल-नीनो की स्थिति पर अपडेट देता है। जिला और ब्लॉक स्तर तक वर्षा संबंधी आंकड़े उपलब्ध कराए जाते हैं ताकि स्थानीय प्रशासन सही योजना बना सके।

अल-नीनो के ऐतिहासिक प्रभाव और सितंबर का खास असर

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार 1950 के बाद से कुल 16 अल-नीनो वर्ष दर्ज किए गए हैं। इनमें से सात वर्षों में मॉनसून पर स्पष्ट असर पड़ा और बारिश सामान्य से कम रही। अल-नीनो का प्रभाव मॉनसून के आखिरी चरण खासकर सितंबर की बारिश पर ज्यादा देखा जाता है। इस बार भी सितंबर में बारिश की कमी की आशंका बनी हुई है।

सरकार ने कहा कि अल-नीनो की तीव्रता भी मॉनसून पर पड़ने वाले असर को तय करती है। कमजोर अल-नीनो का प्रभाव सीमित हो सकता है जबकि मध्यम या मजबूत स्थिति में बारिश में कमी की संभावना बढ़ जाती है। आईएमडी समुद्र और वायुमंडलीय स्थितियों की लगातार निगरानी करता है और उसी के आधार पर पूर्वानुमान अपडेट करता है।

सरकार और एजेंसियों के बीच नियमित समन्वय

मौसम विभाग प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय और कृषि मंत्रालय के साथ नियमित बैठकें करता है। इन बैठकों में मॉनसून की स्थिति, बारिश के आंकड़े और आगे के पूर्वानुमान साझा किए जाते हैं। कृषि मंत्रालय की फसल-मौसम निगरानी व्यवस्था के तहत आईएमडी हर सप्ताह पिछली बारिश का आकलन और अगले दो सप्ताह के लिए पूर्वानुमान उपलब्ध कराता है। इससे किसानों और कृषि विभाग को फसल योजना बनाने में मदद मिलती है।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत काम करने वाला इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटियोरोलॉजी भी सक्रिय है। यह संस्थान कृषि और बांध प्रबंधन से जुड़े विभागों के साथ मिलकर काम कर रहा है। मौसम पूर्वानुमानों के आधार पर कृषि पर पड़ने वाले असर, जल भंडारण की स्थिति और अल-नीनो व ईएनएसओ के प्रभाव का आकलन कर संबंधित एजेंसियों को जानकारी दी जा रही है।

राज्यों के लिए विशेष गाइडलाइन नहीं लेकिन नियमित चेतावनी जारी

सरकार ने साफ किया कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने 2026 में अल-नीनो के प्रभाव को लेकर राज्यों के लिए कोई जिला-वार जोखिम आकलन अध्ययन या अलग से विशेष गाइडलाइन जारी नहीं की है। हालांकि आईएमडी नियमित रूप से मौसम पूर्वानुमान, मौसमी आउटलुक, बारिश, हीटवेव और अन्य चरम मौसम घटनाओं से जुड़ी शुरुआती चेतावनियां जारी करता है। ये जानकारियां सभी राज्य सरकारों, केंद्रीय मंत्रालयों और संबंधित एजेंसियों को भेजी जाती हैं ताकि वे समय रहते जरूरी तैयारी कर सकें।

यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि स्थानीय स्तर पर भी सही कदम उठाए जा सकें। सूखा प्रभावित क्षेत्रों में जल संरक्षण, वैकल्पिक फसल योजना और राहत उपायों पर पहले से काम शुरू किया जा सकता है।

कृषि और जल प्रबंधन पर फोकस

कम बारिश की स्थिति में कृषि क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। खरीफ फसलों की बुवाई और वृद्धि पर मॉनसून की निर्भरता ज्यादा है। ऐसे में समय पर पूर्वानुमान मिलने से किसान सिंचाई की व्यवस्था, बीज चयन और अन्य उपाय कर सकते हैं। जल संसाधन विभाग बांधों में पानी के स्तर की निगरानी बढ़ा सकते हैं और जरूरत के हिसाब से रिलीज प्लान बना सकते हैं।

सरकार का जोर इस बात पर है कि अग्रिम चेतावनी प्रणाली को और मजबूत बनाया जाए। आईएमडी के पूर्वानुमानों की मदद से केंद्र और राज्य दोनों स्तर पर समन्वय बेहतर हो रहा है। इससे आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों को भी दिशा मिलती है।

आम लोगों तक कैसे पहुंचेगी जानकारी

मौसम विभाग की वेबसाइट, मोबाइल ऐप और मीडिया के माध्यम से आम लोगों तक बारिश और मौसम संबंधी जानकारी पहुंचाई जाती है। जिला स्तर तक के आंकड़े उपलब्ध होने से स्थानीय प्रशासन और किसान दोनों लाभान्वित होते हैं। नियमित अपडेट से अफवाहों और गलत सूचनाओं पर भी लगाम लगती है।

अल-नीनो जैसी वैश्विक घटनाओं का असर भारत जैसे कृषि प्रधान देश पर पड़ता है। इसलिए वैज्ञानिक निगरानी और समय पर चेतावनी जारी करना बेहद जरूरी है। सरकार का कहना है कि आईएमडी इस दिशा में लगातार काम कर रहा है और सभी संबंधित पक्षों को अपडेट उपलब्ध करा रहा है।

Drought Alert India: आगे की चुनौतियां और सतर्कता की जरूरत

मॉनसून का बाकी हिस्सा अभी बाकी है। सितंबर में बारिश की स्थिति पर अल-नीनो का प्रभाव और गहरा हो सकता है। ऐसे में जल संरक्षण, सूखा प्रभावित क्षेत्रों में राहत तैयारी और किसानों को सही सलाह देना महत्वपूर्ण होगा। केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर स्थिति पर नजर रखेगी।

संसद में दी गई जानकारी से साफ है कि सरकार और मौसम विभाग अल-नीनो के संभावित असर को लेकर पहले से सतर्क हैं। अग्रिम पूर्वानुमान और नियमित निगरानी से नुकसान को कम करने की कोशिश की जा रही है। आम नागरिकों और किसानों से भी अपील है कि वे आधिकारिक स्रोतों से जानकारी लें और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

इस साल मॉनसून की चुनौतीपूर्ण स्थिति को देखते हुए सभी स्तर पर समन्वय और तैयारी की जरूरत है। आईएमडी के पूर्वानुमान और सरकारी तंत्र की सक्रियता से उम्मीद है कि कम बारिश के प्रभाव को यथासंभव नियंत्रित रखा जा सकेगा।

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