Ratna Singh CJP: CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह पर बीजेपी की बी-टीम होने का दावा: सोशल मीडिया में चर्चा, लेकिन सबूत कहां?
Ratna Singh CJP: CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह पर बीजेपी की बी-टीम होने का दावा: सोशल मीडिया में चर्चा, लेकिन सबूत कहां?
Ratna Singh CJP: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की लीगल हेड रत्ना सिंह पर सोशल मीडिया पर आरोप लग रहे हैं कि वह भाजपा की ‘बी-टीम’ या अंडरकवर एजेंट हैं। ये दावे एक वेरिफाइड अकाउंट से वायरल पोस्ट के बाद चर्चा में आए। पोस्ट में कहा गया कि रत्ना सिंह ने ऐसे सुझाव दिए जिससे पार्टी के अक्टूबर वाले प्रदर्शन फेल हो गए और कई नेता जेल गए। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। CJP की तरफ से भी कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया।
सोशल मीडिया में क्या दावे किए जा रहे हैं?
17 अक्टूबर को राष्ट्रप्रीति नाम के अकाउंट से एक पोस्ट किया गया जिसमें रत्ना सिंह को भाजपा की बी-टीम बताया गया। दावे में कहा गया कि उन्होंने ध्रुव राठी को भारत बुलाया, सौरव दास और आशुतोष रांका को बिना अनुमति के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए राजी किया और अभिजीत दीपके से भी पीस बॉन्ड भरवाया। पोस्ट के अनुसार, इन कदमों की वजह से CJP का पूरा अभियान कमजोर पड़ा और पार्टी को हमेशा के लिए खत्म करने की कोशिश हो रही है।
ये दावे अभी तक सिर्फ सोशल मीडिया चर्चा तक सीमित हैं। रत्ना सिंह या CJP के अन्य प्रवक्ताओं से संपर्क करने की कोशिशें असफल रहीं। उन्होंने फोन या मैसेज का जवाब नहीं दिया।
जुलाई और अक्टूबर के प्रदर्शनों में क्या फर्क था?
जुलाई में नीट पेपर लीक के खिलाफ CJP का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन काफी चर्चित रहा। छात्रों का गुस्सा साफ दिखा और सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को कड़ी टिप्पणी की। पुलिस की सख्ती पर भी चर्चा हुई। लेकिन अक्टूबर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन वैसा असर नहीं छोड़ पाया।
11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया। 13 अक्टूबर को सौरव दास, आशुतोष रांका और अन्य कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड्स पार कर अंदर घुसने की कोशिश की। उन्हें गिरफ्तार कर ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजा गया। बाद में उन्होंने कोर्ट में अंडरटेकिंग दी कि जब तक जंतर-मंतर को दोबारा नोटिफाई नहीं किया जाता, वहां प्रदर्शन नहीं करेंगे। सरकार की तैयारी भी इस बार मजबूत थी। कई जगहों पर प्रिवेंटिव डिटेंशन हुईं।
रत्ना सिंह की भूमिका क्या रही?
रत्ना सिंह पेशे से वकील हैं और CJP की लीगल टीम संभालती हैं। जुलाई के आंदोलन के दौरान भी वह सक्रिय रहीं। अक्टूबर में भी वह खुद प्रिवेंटिव डिटेंशन का शिकार हुईं। 10 अक्टूबर को घर से निकलते समय पुलिस ने उन्हें रोका। उन्होंने कोर्ट में गलत तरीके से कन्फाइनमेंट का आरोप लगाते हुए FIR की मांग की। बाद में सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत बढ़ने पर उन्होंने अदालती कार्यवाही को ‘मजाक’ जैसी टिप्पणी की, जिसके बाद उन्होंने माफी भी मांगी।
ध्रुव राठी के भारत आने और उन पर शिकायतों का जिक्र पोस्ट में है। राठी के खिलाफ पुराने वीडियो को लेकर शिकायतें और डिफेमेशन केस दर्ज हैं। 10 अक्टूबर को उन्हें भी प्रिवेंटिव डिटेंशन में लिया गया था। लेकिन रत्ना के बुलाने पर उनके आने की कोई पुष्टि नहीं हुई है।
क्या ये आरोप साबित होते हैं?
अभी तक कोई दस्तावेज, ऑडियो, मैसेज या स्वतंत्र सबूत सामने नहीं आया जो रत्ना सिंह को भाजपा से जोड़ता हो। CJP के कई नेता जुलाई से ही सक्रिय रहे हैं और कानूनी लड़ाइयां लड़ रहे हैं। प्रदर्शन फेल होने के पीछे जंतर-मंतर का डीनोटिफिकेशन, पुलिस की तैयारी और बिना अनुमति के प्रदर्शन करने की कीमत जैसे कारण ज्यादा तार्किक लगते हैं। सोशल मीडिया पर राजनीतिक आरोप अक्सर बिना सबूत के फैल जाते हैं।
आगे क्या हो सकता है?
CJP नेताओं ने जेल से बाहर आने के बाद शांति बनाए रखने की बात कही है। कोर्ट ने भी पीस बॉन्ड तोड़ने पर सख्ती दिखाई है। रत्ना सिंह अभी भी लीगल मामलों में सक्रिय बताई जा रही हैं। अगर आरोप सही हैं तो सबूत आना चाहिए। फिलहाल ये दावे सोशल मीडिया चर्चा के स्तर पर हैं और उनकी सच्चाई जांच का इंतजार कर रही है। राजनीतिक आंदोलनों में ऐसे आरोप अक्सर लगते रहते हैं, लेकिन अंततः सबूत और तथ्यों से ही फैसला होता है।
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