Ratan Tata: कभी Tata Docomo सिम का चलता था भारत में सिक्का, फिर कैसे हर घर से गायब हुआ रतन टाटा का ‘युगांतरकारी’ ब्रांड

Ratan Tata: क्या थी टाटा डोकोमो की '1 सेकंड बिलिंग' क्रांति? जानें जापानी पार्टनर का साथ छूटने, जियो की सुनामी और एयरटेल में विलय की पूरी इनसाइड स्टोरी।

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Ratan Tata: एक दौर था जब भारत में मोबाइल फोन पर बात करना आज जितना सस्ता नहीं था। अगर आप फोन पर एक मिनट से सिर्फ 3 सेकंड भी ज्यादा बात कर लेते थे, तो टेलीकॉम कंपनियां आपसे पूरे 2 मिनट का पैसा वसूलती थीं। बचे हुए 57 सेकंड बात न करने के बावजूद आपकी जेब कट जाती थी। कंपनियों की इस ‘प्रति मिनट बिलिंग’ व्यवस्था से आम भारतीय कस्टमर बेहद परेशान था और लोग फोन पर बात करते समय टाइमर लगाकर रखते थे।

लेकिन फिर, टाटा समूह के तत्कालीन दिग्गज चेयरमैन रतन टाटा के नेतृत्व में एक ऐसी कंपनी की एंट्री हुई जिसने इस पूरी व्यवस्था को हिलाकर रख दिया। उस ब्रांड का नाम था टाटा डोकोमो (Tata Docomo)। अपनी अनूठी रणनीतियों से इस ब्रांड ने हर भारतीय के दिल में जगह बनाई, लेकिन जितनी तेजी से यह अर्श पर पहुंचा, उतनी ही तेजी से यह भारतीय बाजार से हमेशा के लिए गायब भी हो गया।

Ratan Tata: टाटा डोकोमो की क्रांति- कैसे बदला पूरा बाजार?

भारतीय टेलीकॉम इतिहास में साल 2008 के दिसंबर महीने को एक बड़े टर्निंग पॉइंट के रूप में याद किया जाता है। इसी दौरान जापान की दिग्गज टेलीकॉम कंपनी एनटीटी डोकोमो (NTT Docomo) ने भारत के टाटा टेलीसर्विसेज में 26.5% हिस्सेदारी खरीदने के लिए ₹12,740 करोड़ का भारी-भरकम निवेश किया था। इस बड़े गठबंधन के बाद दोनों कंपनियों ने मिलकर भारतीय बाजार में ‘टाटा डोकोमो’ ब्रांड को लॉन्च किया। लॉन्चिंग के साथ ही कंपनी ने ‘प्रति सेकंड बिलिंग’ (Pay per Second) का एक ऐसा क्रांतिकारी मॉडल पेश किया, जिसने पूरे देश के मोबाइल यूजर्स को अपना दीवाना बना लिया। रतन टाटा ने खुद इसे भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक ‘युगांतरकारी बदलाव’ करार दिया था। अब ग्राहकों को केवल उतने ही समय का पैसा देना था, जितनी देर उन्होंने असल में बात की थी। इस एक मास्टरस्ट्रोक ने एयरटेल और वोडाफोन जैसी स्थापित कंपनियों की नींद उड़ा दी थी।

जब देश की पहली प्राइवेट 3G कंपनी बनी टाटा डोकोमो

प्रति सेकंड बिलिंग के सुपरहिट फॉर्मूले के बाद टाटा डोकोमो ने देश में तकनीक के मामले में भी बाजी मार ली। साल 2010 आते-आते यह भारत में 3G सेवाएं शुरू करने वाली पहली प्राइवेट टेलीकॉम कंपनी बन गई।

तकनीक पर भारी निवेश:

कंपनी ने देश के 10 प्रमुख सर्किलों में 3G स्पेक्ट्रम हासिल करने के लिए ₹5,864 करोड़ का बड़ा भुगतान किया था। इसके साथ ही अपने नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत और हाई-टेक बनाने के लिए टाटा डोकोमो ने करीब 500 मिलियन डॉलर (लगभग ₹2,250 करोड़) का अतिरिक्त निवेश किया। इस भारी निवेश का नतीजा यह हुआ कि उस दौर में कंपनी अपने ग्राहकों को 21.1 Mbps तक की सुपरफास्ट इंटरनेट स्पीड देने में कामयाब रही। शानदार विज्ञापनों, बेहतरीन ट्यून और किफायती प्लान्स के दम पर मार्च 2017 तक कंपनी के पास लगभग 4.9 करोड़ (49 मिलियन) से ज्यादा एक्टिव सब्सक्राइबर्स का एक विशाल नेटवर्क तैयार हो चुका था।

सब कुछ सही चल रहा था, फिर अचानक पतन की शुरुआत कैसे हुई?

टाटा डोकोमो की यह कामयाबी लंबे समय तक नहीं टिक सकी। कंपनी का पतन कोई एक दिन में नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे कई आंतरिक नीतियां, कानूनी विवाद और आक्रामक प्रतिस्पर्धा जिम्मेदार थीं।

  • 2G स्पेक्ट्रम घोटाला और रेगुलेटरी बाधाएं: साल 2012 के आस-पास देश में हुए 2G स्पेक्ट्रम विवाद और सख्त सरकारी नियमों ने टाटा डोकोमो की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया।
  • जापानी पार्टनर का साथ छूटना: आक्रामक प्रदर्शन लक्ष्यों को पूरा न कर पाने और लगातार होते घाटे के चलते जापानी कंपनी एनटीटी डोकोमो ने 2014 से 2017 के बीच टाटा के साथ अपना नाता तोड़ने का फैसला कर लिया।
  • 1.27 बिलियन डॉलर का भारी जुर्माना: इस पार्टनरशिप के टूटने के बाद दोनों कंपनियों के बीच एक लंबा कानूनी विवाद और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता (Arbitration) शुरू हुई। अंततः टाटा समूह को जापानी कंपनी को सेटलमेंट के रूप में लगभग 1.27 बिलियन डॉलर का भारी-भरकम भुगतान करना पड़ा। इस वित्तीय झटके ने कंपनी की निवेश करने और नेटवर्क विस्तार करने की क्षमता को पूरी तरह से तोड़ दिया।

4G की रेस में पिछड़ना और मुकेश अंबानी के ‘जियो’ की सुनामी

जब भारतीय टेलीकॉम बाजार 3G से आगे बढ़कर 4G तकनीक की तरफ रुख कर रहा था, तब टाटा डोकोमो अपने आंतरिक विवादों और पैसों की तंगी से जूझ रही थी। कंपनी सही समय पर अपने नेटवर्क को 4G पर अपग्रेड करने में पूरी तरह पीछे रह गई। वहीं दूसरी तरफ, इसके मुख्य प्रतिस्पर्धियों जैसे एयरटेल और वोडाफोन ने देश भर में अपनी 4G कवरेज को बेहद मजबूत कर लिया था।

इसी बीच, सितंबर 2016 में भारतीय बिजनेस जगत के सबसे बड़े धमाके यानी मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो (Jio) की कमर्शियल एंट्री हुई। जियो ने आते ही बाजार में मुफ्त वॉयस कॉलिंग और शुरुआती दिनों में पूरी तरह से फ्री हाई-स्पीड 4G डेटा देना शुरू कर दिया। जियो की इस आक्रामक प्राइस-वार (मूल्य प्रतिस्पर्धा) के कारण पूरी टेलीकॉम इंडस्ट्री का प्रति यूजर औसत राजस्व (ARPU) महज कुछ ही महीनों में 50 से 70 फीसदी तक गिर गया। टाटा डोकोमो, जो पहले से ही कर्ज, जापानी पार्टनर के एग्जिट और कमजोर नेटवर्क की मार झेल रही थी, वह जियो की इस सुनामी के आगे टिक नहीं सकी और उसे हर महीने लाखों ग्राहकों और भारी राजस्व का नुकसान होने लगा।

अंत में क्या हुआ टाटा डोकोमो का और कहां गई यह कंपनी?

लगातार बढ़ते घाटे और अरबों रुपये के कर्ज के दलदल में फंसने के बाद टाटा समूह के पास कंज्यूमर मोबाइल बिजनेस से बाहर निकलने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था। यह वह दौर था जब भारत का पूरा टेलीकॉम सेक्टर एक बड़े बदलाव से गुजर रहा था, जहां एयरसेल जैसी कई कंपनियां बंद हो रही थीं और आइडिया-वोडाफोन जैसी कंपनियां आपस में विलय कर रही थीं।

बिना किसी कीमत के एयरटेल में विलय:

अक्टूबर 2017 में टाटा समूह ने एक बड़ा फैसला लेते हुए भारती एयरटेल (Bharti Airtel) के साथ हाथ मिलाया। टाटा ने अपना पूरा उपभोक्ता मोबाइल कारोबार बिना किसी ऋण (Debt-free) और बिना किसी नकद लेनदेन के पूरी तरह से एयरटेल को सौंप दिया। अंततः 1 जुलाई 2019 को टाटा डोकोमो का भारती एयरटेल में पूर्ण रूप से कानूनी विलय हो गया। इसके साथ ही डोकोमो के सभी बचे हुए ग्राहकों और नेटवर्क को एयरटेल पर शिफ्ट कर दिया गया और भारतीय टेलीकॉम बाजार का यह ‘युगांतरकारी’ और पसंदीदा ब्रांड हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। हालांकि, भारत से बाहर आज भी एनटीटी डोकोमो जापान की सबसे बड़ी वायरलेस कैरियर और मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर के रूप में सफलतापूर्वक काम कर रही है।

Ratan Tata: बिजनेस जगत के लिए एक बड़ा सबक

टाटा डोकोमो की कहानी हमें सिखाती है कि बिजनेस की दुनिया में सिर्फ एक बेहतरीन आइडिया या शुरुआत ही काफी नहीं होती। समय के साथ खुद को न बदलना और सही वक्त पर नई तकनीक (जैसे 4G) को न अपनाना किसी भी बड़े ब्रांड के अंत का कारण बन सकता है। भले ही आज टाटा डोकोमो हमारे मोबाइलों में नहीं है, लेकिन भारत में आज जो हम बेहद सस्ती कॉलिंग और इंटरनेट का आनंद ले रहे हैं, उसकी बुनियादी शुरुआत कहीं न कहीं टाटा डोकोमो की उसी ‘1 सेकंड बिलिंग’ क्रांति से ही हुई थी।

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