Rare Stomach Cancer: मुंबई की दो महिलाओं में मिला दुर्लभ पेट का कैंसर, ओवेरियन ट्यूमर जैसे लक्षणों ने डॉक्टरों को भी चौंकाया
ओवेरियन ट्यूमर जैसे लक्षणों के पीछे निकला दुर्लभ गैस्ट्रिक कैंसर, डॉक्टरों ने दी सतर्क रहने की सलाह
Rare Stomach Cancer: मुंबई में हाल ही में सामने आए दो मामलों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। दोनों महिलाओं में शुरुआत में ओवेरियन ट्यूमर का संदेह हुआ, लेकिन विस्तृत जांच के बाद पता चला कि असली बीमारी पेट का एक बहुत ही दुर्लभ और आक्रामक कैंसर था। यह कैंसर चुपचाप फैलकर अंडाशय तक पहुंच गया था और ओवेरियन कैंसर जैसा दिखने लगा था। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मामलों में सही समय पर सही पहचान बहुत जरूरी होती है, क्योंकि इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर की शुरुआत शरीर के किस अंग से हुई है।
Rare Stomach Cancer: दोनों मामलों की पूरी कहानी
पहला मामला 25 वर्षीय एक युवती का है। वह पेट दर्द, अनियमित मासिक धर्म, भूख न लगना और अचानक वजन घटने की शिकायत लेकर मुंबई के अस्पताल पहुंची। जांच में उसकी दाईं ओर की ओवरी में बड़ा ट्यूमर दिखा। शुरू में डॉक्टरों ने ओवेरियन कैंसर की संभावना जताई। लेकिन आगे की जांच में साफ हो गया कि ओवरी का यह ट्यूमर प्राथमिक बीमारी नहीं था। कैंसर की शुरुआत पेट से हुई थी और वहां से कोशिकाएं फैलकर अंडाशय तक पहुंच गई थीं।
दूसरा मामला 37 वर्षीय एक महिला का है, जो दो बच्चों की मां हैं। उन्हें भी पेट दर्द, मासिक धर्म में गड़बड़ी, वजन कम होना और मल त्याग की आदतों में बदलाव जैसी समस्याएं थीं। स्कैनिंग में दोनों ओवरी में बड़े ट्यूमर मिले। विस्तृत जांच के बाद डॉक्टरों ने पुष्टि की कि ये ट्यूमर भी पेट के कैंसर के फैलने से बने थे। दोनों मामलों में पेट में साइनट-रिंग सेल गैस्ट्रिक एडेनोकार्सिनोमा नामक दुर्लभ प्रकार का कैंसर पाया गया, जो ओवरी तक मेटास्टेसाइज हो चुका था।
ये दोनों मामले मुंबई के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और कामा एंड अल्ब्लेस हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने दर्ज किए हैं। उनका अध्ययन इंटरनेशनल जर्नल ऑफ रिप्रोडक्शन, कॉन्ट्रासेप्शन, ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में डॉक्टरों ने जोर दिया है कि हर ओवेरियन मास को प्राथमिक ओवेरियन कैंसर मान लेना खतरनाक हो सकता है। कभी-कभी यह किसी अन्य अंग, खासकर पेट के कैंसर का फैलाव हो सकता है।
क्रूकेनबर्ग ट्यूमर क्या है और क्यों है दुर्लभ
डॉक्टरों के अनुसार इस स्थिति को क्रूकेनबर्ग ट्यूमर कहा जाता है। यह मेटास्टेटिक ओवेरियन कैंसर का एक दुर्लभ और आक्रामक रूप है। इसमें कैंसर की शुरुआत अंडाशय में नहीं होती। सबसे ज्यादा मामलों में इसकी शुरुआत पेट से होती है। वहां से कैंसर कोशिकाएं एक या दोनों ओवरी तक पहुंच जाती हैं। कुछ मामलों में यह बड़ी आंत, अपेंडिक्स, पैंक्रियाज या स्तन से भी शुरू हो सकता है, लेकिन पेट सबसे आम स्रोत है।
यह बीमारी सभी ओवेरियन ट्यूमर के केवल एक से दो प्रतिशत मामलों में ही पाई जाती है। ज्यादातर यह प्रजनन आयु की महिलाओं में देखी जाती है, हालांकि किसी भी उम्र में हो सकती है। जब तक यह ओवरी में पहुंचकर पता चलता है, तब तक कैंसर शरीर में काफी फैल चुका होता है। इसी वजह से इसका इलाज चुनौतीपूर्ण माना जाता है। डॉक्टर बताते हैं कि पेट का कैंसर अक्सर बिना साफ लक्षणों के आगे बढ़ता रहता है और जब ओवरी में ट्यूमर बनता है तब जाकर मरीज डॉक्टर के पास पहुंचते हैं।
किन लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
इस बीमारी के लक्षण ओवेरियन कैंसर और कई सामान्य पेट या गायनेकोलॉजिकल समस्याओं जैसे ही हो सकते हैं। लगातार पेट दर्द, पेट फूलना, मासिक धर्म का अनियमित होना, भूख कम लगना, बिना वजह वजन घटना, थोड़ा खाने पर ही पेट भर जाना और मल त्याग की आदतों में बदलाव प्रमुख लक्षण हैं। अगर किसी महिला में ओवेरियन मास के साथ ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो सिर्फ ओवेरियन कैंसर की जांच पर्याप्त नहीं है। पेट या आंत के कैंसर की भी जांच करानी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि क्रूकेनबर्ग ट्यूमर सबसे ज्यादा 25 से 40 साल की महिलाओं में पाया जाता है। शुरुआती लक्षण किसी सामान्य बीमारी जैसे लगते हैं, इसलिए कई महिलाएं इन्हें नजरअंदाज कर देती हैं या सिर्फ गैस्ट्रिक समस्या समझकर इलाज करवाती रहती हैं। इससे बीमारी और फैल जाती है। अगर पेट दर्द के साथ वजन तेजी से घट रहा हो, भूख लगातार कम लग रही हो या मल त्याग में बदलाव हो तो तुरंत विस्तृत जांच करानी चाहिए।
बीमारी की पहचान कैसे होती है
अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन से ओवरी में ट्यूमर का पता आसानी से चल जाता है। लेकिन इन जांचों से यह तय नहीं हो पाता कि कैंसर की शुरुआत कहां से हुई है। इसके लिए डॉक्टर एंडोस्कोपी, टिश्यू बायोप्सी और विशेष पैथोलॉजी जांच की मदद लेते हैं। पेट की दीवार में गाढ़ापन या अन्य बदलाव दिखने पर एंडोस्कोपी से बायोप्सी ली जाती है। पैथोलॉजी रिपोर्ट से यह साफ हो जाता है कि ट्यूमर प्राथमिक ओवेरियन है या मेटास्टेटिक। सही पहचान के बिना इलाज गलत दिशा में चला जाता है, इसलिए इन जांचों का महत्व बहुत ज्यादा है।
इलाज कैसे किया जाता है
इलाज का मुख्य फोकस उस अंग पर होता है जहां से कैंसर की शुरुआत हुई हो। अगर जरूरत हो तो ओवरी के ट्यूमर को हटाने या मरीज की तकलीफ कम करने के लिए सर्जरी की जा सकती है। लेकिन पेट के कैंसर के मामलों में मरीज को एडवांस गैस्ट्रिक कैंसर के लिए दी जाने वाली कीमोथेरेपी दी जाती है। कुछ मरीजों में ट्यूमर की जांच रिपोर्ट के आधार पर टारगेटेड थेरेपी या इम्यूनोथेरेपी भी दी जा सकती है। एक मरीज को पैक्लिटैक्सेल-कार्बोप्लाटिन कीमोथेरेपी के छह चक्र दिए गए और वह फॉलो-अप में स्थिर पाई गई।
Rare Stomach Cancer: महिलाओं और डॉक्टरों के लिए महत्वपूर्ण संदेश
ये दोनों मामले याद दिलाते हैं कि ओवेरियन ट्यूमर हमेशा प्राथमिक नहीं होते। युवा महिलाओं में भी पेट का कैंसर चुपचाप फैल सकता है और ओवरी तक पहुंच सकता है। महिलाओं को अपने शरीर के संकेतों पर ध्यान देना चाहिए। लगातार पेट दर्द, वजन घटना या मासिक धर्म में बदलाव को हल्के में नहीं लेना चाहिए। डॉक्टरों को भी ओवेरियन मास वाले मामलों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर की संभावना को ध्यान में रखना चाहिए, खासकर जब वजन घटने, भूख न लगने या मल त्याग में बदलाव जैसे लक्षण मौजूद हों।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता बढ़ाने से ऐसे दुर्लभ मामलों की जल्दी पहचान हो सकती है। नियमित जांच, सही लक्षणों पर ध्यान और विस्तृत परीक्षण जीवन बचा सकते हैं। कोई भी नई स्वास्थ्य समस्या आने पर अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। यह जानकारी शोध अध्ययनों और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे चिकित्सा सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी लक्षण पर तुरंत योग्य चिकित्सक से संपर्क करें।
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