Raakh Review 2026: रोंगटे खड़े कर देने वाली सच्ची घटना पर आधारित है ये क्राइम थ्रिलर, अंदर तक झकझोर देगी ये कहानी

Raakh Review 2026: रोंगटे खड़े कर देगी अली फजल की 'राख'

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Raakh Review 2026: ओटीटी की दुनिया में क्राइम थ्रिलर की बाढ़ सी आई है, लेकिन कभी कभी कोई ऐसी कहानी सामने आती है जो महज मनोरंजन बनकर नहीं रहती, बल्कि लंबे समय तक जेहन में टीस बनकर चुभती है। अमेज़न प्राइम वीडियो पर आज रिलीज हुई वेब सीरीज ‘राख’ कुछ ऐसी ही है। ‘पाताल लोक’ जैसी चर्चित और प्रभावशाली सीरीज के निर्देशक प्रोसित रॉय इस बार एक ऐसी सच्ची घटना को पर्दे पर लेकर आए हैं, जिसने दशकों पहले पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। ‘राख’ केवल अपराधियों को पकड़ने वाली कोई आम पुलिसिया कहानी नहीं, बल्कि यह इंसाफ के लिए तड़पते परिवारों का एक भावनात्मक दस्तावेज है।

Raakh Review 2026: दर्द और इंसाफ के बीच की एक लंबी लड़ाई

सीरीज की कहानी दिल्ली के एक खुशहाल परिवार से शुरू होती है। शिक्षिका मोना अरोड़ा जब अपने बच्चों को एक कार्यक्रम में भेजती हैं, तो उन्हें तनिक भी आभास नहीं होता कि यह उनकी आखिरी सामान्य शाम थी। सेना अधिकारी अशोक अरोड़ा और उनकी पत्नी की पूरी दुनिया तब बिखर जाती है, जब उनके बच्चे रहस्यमयी तरीके से लापता हो जाते हैं। बच्चों की खोजबीन का जिम्मा पुलिस अधिकारी जयप्रकाश यानी जेपी के कंधों पर आता है। जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ता है, वैसे-वैसे कहानी उन अंधेरे रास्तों पर ले जाती है जहां इंसानियत का नामो-निशान तक नहीं है। दो ऐसे क्रूर अपराधियों का चेहरा सामने आता है, जिनकी बर्बरता देख किसी भी संवेदनशील व्यक्ति की रूह कांप उठेगी।

एक इन्वेस्टिगेशन ड्रामा जो दिल पर असर करता है

‘राख’ की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह दर्शकों को महज ‘कौन है कातिल’ की पहेली में उलझाकर नहीं रखती। निर्देशक प्रोसित रॉय का फोकस अपराधी की पहचान से कहीं ज्यादा उस दर्द, समाज की उदासीनता और न्याय पाने के लिए की जाने वाली मशक्कत पर है। सीरीज का माहौल 70 और 80 के दशक की याद दिलाता है। दिल्ली की तंग गलियों से लेकर उस दौर की सामाजिक बेचैनी तक, प्रोसित रॉय ने हर फ्रेम में एक गहरा प्रभाव छोड़ा है। यह कहानी आपको किसी रहस्यमयी जंगल की तरह अपनी ओर खींचती है, जहां डर और असुरक्षा का माहौल हर वक्त बना रहता है।

धीमी रफ्तार मगर गहरा प्रभाव

आठ एपिसोड की यह वेब सीरीज अपनी विषय-वस्तु की गंभीरता को देखते हुए बहुत संभलकर आगे बढ़ती है। हो सकता है कि शुरुआत में इसकी रफ्तार कुछ दर्शकों को धीमी लगे, लेकिन यह सुस्ती नहीं, बल्कि कहानी का एक हिस्सा है जो आपको पात्रों के दर्द को महसूस करने के लिए मजबूर करती है। सीरीज के हर एपिसोड के साथ बढ़ता तनाव दर्शकों को बांधे रखता है। यह एक ऐसी सीरीज है जिसे आप केवल अपनी आंखों से नहीं, बल्कि अपने पूरे वजूद से महसूस करते हैं। लेखन का स्तर इतना ऊंचा है कि इसमें पुलिस की कार्यप्रणाली, कानूनी दांव-पेच और पीड़ित परिवार की मानसिक स्थिति को बहुत बारीकी से दर्शाया गया है।

सितारों की दमदार अदाकारी

अली फजल ने पुलिस अधिकारी जेपी के किरदार में अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया है। वे एक ऐसे नायक के रूप में सामने आते हैं जो सुपरहीरो नहीं, बल्कि एक आम इंसान है जो अपनी सीमाओं के भीतर न्याय की लड़ाई लड़ रहा है। सोनाली बेंद्रे की वापसी के लिए इससे बेहतर कोई कहानी नहीं हो सकती थी। एक मां का टूटता हुआ वजूद, लाचारी और अंदर तक बिखर जाने का जो दर्द उन्होंने स्क्रीन पर पेश किया है, वह दर्शकों की आंखों में आंसू लाने के लिए काफी है। वहीं आमिर बशीर ने एक ऐसे पिता की भूमिका निभाई है जो परिवार को बचाने के लिए अपनी ही पीड़ा को दबाकर खड़ा रहता है। राकेश बेदी और दिव्येंदु भट्टाचार्य जैसे मंझे हुए कलाकारों ने भी अपने किरदारों को पूरी ईमानदारी से जिया है।

Raakh Review 2026: तकनीक और सिनेमैटोग्राफी का कमाल

सीरीज के तकनीकी पक्ष पर बात करें तो सिनेमैटोग्राफी इसकी रीढ़ की हड्डी है। जिस तरह से कैमरा उस दौर की दिल्ली और मुंबई को जीवंत करता है, वह प्रशंसनीय है। बैकग्राउंड स्कोर कहानी की गंभीरता को और अधिक घातक बनाता है। हालांकि, कुछ जगहों पर एडिटिंग थोड़ी और कसी हुई हो सकती थी, लेकिन कहानी का भावनात्मक वजन इतना ज्यादा है कि आप इन छोटी-बड़ी कमियों को नजरअंदाज कर देते हैं। अपराधियों की भूमिका निभाने वाले कलाकारों का चयन और उनका खौफनाक अभिनय दर्शकों को पूरी तरह से विचलित करने में सफल रहा है।

Raakh Review 2026: क्या आपको यह सीरीज देखनी चाहिए?

यदि आप डार्क, गंभीर और भावनात्मक रूप से आपको भीतर तक झकझोर देने वाली क्राइम थ्रिलर के शौकीन हैं, तो ‘राख’ आपके लिए एक अनिवार्य विकल्प है। यह महज एक शो नहीं है, बल्कि समाज के उस कड़वे सच का आईना है जिसे अक्सर हम अनदेखा कर देते हैं। अगर आप तेज रफ्तार वाले एक्शन से भरपूर कंटेंट के आदी हैं, तो शायद इसकी धीमी गति आपको परेशान कर सकती है, लेकिन जो लोग कहानियों में गहराई और रूह तक उतरने वाली संवेदना ढूंढते हैं, उनके लिए यह साल की बेहतरीन सीरीज में से एक है। अंत में, ‘राख’ खत्म होने के बाद भी आपके साथ बनी रहती है और सोचने पर मजबूर कर देती है कि क्या न्याय मिलने के बाद भी घाव कभी भर पाते हैं?

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