Prisha Sharma Jaipur: 2 साल की उम्र और याद हैं 30 से ज्यादा संस्कृत मंत्र, इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज करा चुकी जयपुर की प्रिशा

Prisha Sharma Jaipur: जयपुर की 2 साल की प्रिशा ने मंत्रों में बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

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Prisha Sharma Jaipur: आधुनिक दौर में जहां स्मार्टफोन और स्क्रीन एडिक्शन छोटे बच्चों के बचपन को अपनी गिरफ्त में लेता जा रहा है, वहीं राजस्थान की राजधानी जयपुर की एक दो साल की नन्ही परी ने अपनी असाधारण प्रतिभा से पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया है। महज 24 महीने की उम्र में, जब बच्चे ठीक से दो शब्द भी नहीं बोल पाते, जयपुर की प्रिशा शर्मा ने अपनी विलक्षण याददाश्त और सनातन संस्कारों के दम पर ‘इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में अपना नाम दर्ज कराया है। प्रिशा को हाल ही में संस्था की ओर से ‘सुपर टैलेंटेड किड’ के खिताब से नवाजा गया है। सोशल मीडिया से लेकर देश भर के पैरेंटिंग ग्रुप्स में इस असाधारण बच्ची की चर्चा हो रही है, जिसने न केवल प्राचीन मंत्रों को कंठस्थ किया है, बल्कि आज के डिजिटल युग के सबसे बड़े अभिशाप यानी मोबाइल फोन से भी खुद को पूरी तरह दूर रखा है।

जब पहला शब्द मम्मा-पापा नहीं बल्कि गूंजा ‘ॐ’

प्रिशा के परिजनों और पड़ोसियों के बीच उसकी सीखने की ललक को लेकर शुरुआत से ही गहरा कौतूहल रहा है। आम तौर पर बच्चे जब बोलना शुरू करते हैं तो वे मम्मा, पापा या बुआ जैसे आसान शब्दों का उच्चारण करते हैं, लेकिन प्रिशा की मां बताती हैं कि उनकी बेटी के मुख से निकला पहला शब्द साक्षात ब्रह्मांड की ध्वनि यानी “ॐ” था। जयपुर के वैशाली नगर इलाके में रहने वाले इस परिवार में सुबह की शुरुआत ही वैदिक मंत्रों, शंखध्वनि और भजनों के साथ होती है। घर के इसी आध्यात्मिक माहौल को प्रिशा ने अनजाने में ही अपने भीतर आत्मसात करना शुरू कर दिया। माता-पिता का कहना है कि उन्होंने कभी भी बच्ची पर किसी चीज को रटने या याद करने का कोई दबाव नहीं बनाया, बल्कि उसकी अपनी तीव्र जिज्ञासा और सुनने की क्षमता ने उसे इस मुकाम तक पहुंचाया है।

मंत्रोच्चार के साथ योग और शारीरिक हैरतअंगेज कारनामे

प्रिशा शर्मा की प्रतिभा केवल मंत्रों को दोहराने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उसका शारीरिक विकास और एक्टिविटीज भी उसकी उम्र के बच्चों से कहीं आगे हैं। वह न केवल 30 से अधिक जटिल संस्कृत मंत्रों और श्लोकों का बिल्कुल शुद्ध और स्पष्ट उच्चारण करती है, बल्कि अपनी तोतली जुबान में कई श्लोकों का मूल भाव और अर्थ भी समझाने की कोशिश करती है। इसके अलावा, प्रिशा मानव शरीर के 80 से अधिक अंगों (बॉडी पार्ट्स) को बिना किसी गलती के पहचान लेती है। शारीरिक दक्षता की बात करें तो यह दो साल की बच्ची पूरी सटीकता के साथ सूर्य नमस्कार के आसन कर लेती है, अपने दोनों हाथों के बल चल सकती है और अपने कद से तीन गुना ऊंची लोहे की ग्रिल पर आसानी से चढ़ जाती है। घर में आने वाले मेहमान और प्रिशा को जानने वाले लोग उसकी इन हरकतों को देखकर उसे ‘ईश्वरीय वरदान’ मान रहे हैं।

डिजिटल डिटॉक्स की मिसाल: “फोन देखने से आंखें खराब हो जाती हैं”

आज के समय में जब अधिकांश माता-पिता के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बच्चे बिना मोबाइल स्क्रीन देखे खाना तक नहीं खाते, प्रिशा का व्यवहार एक बहुत बड़ा बदलाव दिखाता है। जब घर के लोग या कोई बाहरी व्यक्ति प्रिशा से पूछता है कि वह स्मार्टफोन क्यों नहीं छूती या वीडियो क्यों नहीं देखती, तो उसका मासूम और बेबाक जवाब होता है, “फोन देखने से आंखें खराब हो जाती हैं।” प्रिशा की मां बताती हैं कि वह केवल खुद ही मोबाइल से दूर नहीं रहती, बल्कि अगर घर में माता-पिता या दादा-दादी भी जरूरत से ज्यादा समय तक फोन का इस्तेमाल करते हैं, तो वह उन्हें भी टोक देती है और फोन बंद करने पर मजबूर कर देती है।

Prisha Sharma Jaipur: खिलौनों की जगह बाल गणेश और धार्मिक कथाओं से नाता

जहाँ समकालीन परिवारों में दो साल के बच्चों के कमरों में महंगी प्लास्टिक की कारें, बार्बी डॉल्स या वीडियो गेम्स की भरमार होती है, वहीं प्रिशा के खेलने का कोना पूरी तरह अलग है। उसके पास खेलने के लिए बाल गणेश, हनुमान जी और कृष्ण कन्हाई की सॉफ्ट टॉयज वाली मूर्तियां हैं। इसके अलावा उसके पास रंग-बिरंगी धार्मिक कहानियों की सचित्र किताबें हैं। प्रिशा के दादा-दादी उसे रात को सोते समय काल्पनिक राजा-रानी या परियों की कहानियों के बजाय भारतीय इतिहास, महापुरुषों और पौराणिक देवी-देवताओं की गाथाएं सुनाते हैं। इन कथाओं को प्रिशा न केवल बड़े ध्यान से सुनती है, बल्कि अगली सुबह उनके किरदारों को लेकर अपनी मां से ढेरों सवाल भी पूछती है। यही वजह है कि वह सनातन परंपरा के लगभग सभी प्रमुख देवी-देवताओं और उनके वाहनों को उनके नाम से पहचानती है।

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