Hantavirus Transmission Myth vs Reality: क्या ब्रेस्ट मिल्क और स्पर्म से भी फैल सकता है खतरनाक हंता वायरस, जानें अंतरराष्ट्रीय मेडिकल रिसर्च की पूरी सच्चाई

Hantavirus Transmission Myth vs Reality: हंता वायरस मिथक vs सच, क्या स्पर्म से फैलता है यह?

0

Hantavirus Transmission Myth vs Reality: चूहों और कतरने वाले जीवों से इंसानों में फैलने वाले जानलेवा हंता वायरस को लेकर सोशल मीडिया और कई डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों एक बेहद डरावना दावा तेजी से वायरल हो रहा है। इंटरनेट पर प्रसारित हो रही विभिन्न रिपोर्ट्स में यह आशंका जताई जा रही है कि यह खतरनाक वायरस अब संक्रमित मरीजों के ब्रेस्ट मिल्क (मां के दूध) और स्पर्म (वीर्य) के जरिए भी दूसरे इंसानों में फैल सकता है। इस खबर के सामने आने के बाद नवजात बच्चों के माता-पिता, गर्भवती महिलाओं और आम लोगों में घबराहट का माहौल बन गया है। हालांकि वैश्विक स्तर पर संक्रामक रोगों के शीर्ष डॉक्टरों और महामारी विज्ञानियों ने इस दावे को पूरी तरह से आधा-अधूरा और भ्रामक करार दिया है। चिकित्सा वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रयोगशाला के कुछ चुनिंदा शोधों को गलत तरीके से पेश करके जनता के बीच बेवजह का डर पैदा किया जा रहा है, जबकि हकीकत में ऐसा संक्रमण फैलने का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला है।

Hantavirus Transmission Myth vs Reality: कहां से शुरू हुई इस दावे की कहानी और क्या कहती है स्विट्जरलैंड की रिसर्च

इस पूरे विवाद और सोशल मीडिया पर मचे बवाल की जड़ साल 2023 में अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पत्रिका ‘जर्नल वायरसेस’ में प्रकाशित एक वैज्ञानिक शोध से जुड़ी है। स्विट्जरलैंड की प्रतिष्ठित स्पीएज लैबोरेटरी के शोधकर्ताओं ने चूहों से फैलने वाले हंता वायरस के एक विशेष प्रकार, जिसे ‘एंडीज स्ट्रेन’ कहा जाता है, पर एक विस्तृत अध्ययन किया था। इस प्रयोगशाला अनुसंधान के दौरान वैज्ञानिकों को पता चला कि संक्रमण से पूरी तरह ठीक हो चुके कुछ पुरुषों के स्पर्म में हंता वायरस का जेनेटिक मटेरियल यानी ‘वायरल आरएनए’ बीमारी के कई महीनों या साल बाद तक मौजूद रह सकता है। शोधकर्ताओं ने इस रिपोर्ट में इबोला और जीका वायरस का उदाहरण देते हुए एक सैद्धांतिक आशंका जताई थी कि पुरुषों के रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट में इस वायरस के तत्व लंबे समय तक छिपे रह सकते हैं, जिससे भविष्य में सेक्शुअल ट्रांसमिशन (यौन संचरण) की एक थ्योरिटिकल संभावना बन सकती है। इंटरनेट पर इसी तकनीकी थ्योरी को तोड़-मरोड़ कर इंसानों के लिए बड़ा खतरा घोषित कर दिया गया।

मृत कण और जिंदा वायरस के बीच का अंतर समझना क्यों है जरूरी

इस विषय पर भ्रम को दूर करते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) रिसर्च सेल के पूर्व कन्वीनर डॉ. राजीव जयदेवन ने स्पष्ट किया है कि किसी बीमारी से ठीक होने के बाद भी शरीर के कुछ हिस्सों में वायरस के आरएनए का मिलना कोई असाधारण बात नहीं है। चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में अब तक कम से कम 27 अलग-अलग प्रकार के वायरसों में यह प्रवृत्ति देखी जा चुकी है। इंसानी शरीर में टेस्टिस (वृषण) एक ऐसा संवेदनशील अंग है जिसे हमारा इम्यून सिस्टम एक विशेष सुरक्षा घेरा प्रदान करता है, ताकि वहां की कोशिकाएं नष्ट न हों। इसी सुरक्षात्मक माहौल का फायदा उठाकर कुछ वायरसों के मृत अवशेष वहां लंबे समय तक पड़े रहते हैं। डॉ. जयदेवन के अनुसार, स्विट्जरलैंड की इस रिसर्च में केवल वायरस का आरएनए पाया गया था, कोई जीवित या सक्रिय वायरस नहीं मिला था। आरटी-पीसीआर टेस्ट इतने ज्यादा संवेदनशील होते हैं कि वे वायरस के मर चुके निष्क्रिय कणों को भी पकड़ लेते हैं। इसलिए स्पर्म में मृत आरएनए मिलने का मतलब यह कतई नहीं है कि वह व्यक्ति किसी दूसरे को संक्रमित करने की क्षमता रखता है।

चिली की मेडिकल स्टडी और ब्रेस्ट मिल्क से संक्रमण फैलने की अधूरी सच्चाई

स्पर्म के अलावा नवजात बच्चों की माताओं को डराने के लिए सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के जर्नल ‘इमर्जिंग इन्फेक्शियस डिजीज रिसर्च’ में छपी एक पुरानी केस स्टडी का सहारा लिया जा रहा है। दक्षिण अमेरिकी देश चिली में हंता वायरस से पीड़ित एक प्रसूता महिला के दूध की जांच की गई थी, जिसमें एंडीज वायरस के जीनोम और कुछ प्रोटीन्स के अंश पाए गए थे। उस समय अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया था कि थ्योरिटिकल रूप से मां से बच्चे में वायरस ट्रांसफर हो सकता है। इस विषय पर पुणे के डीवाई पाटिल विद्यापीठ के प्रसिद्ध महामारी विज्ञानी प्रोफेसर डॉ. अमिताव बनर्जी का कहना है कि वैश्विक स्तर पर ऐसे मामले न के बराबर हैं। दुनिया भर में हंता वायरस के लाखों मामलों के इतिहास में ब्रेस्ट मिल्क से किसी बच्चे के संक्रमित होने का कोई भी प्रमाणित या पुख्ता केस दर्ज नहीं है।

आम जनता को इस वायरल दावे से पैनिक होने की जरूरत क्यों नहीं है

सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आम जनता को आश्वस्त करते हुए कहा है कि हंता वायरस की तुलना एचआईवी (HIV) जैसे असाध्य रोगों से करना पूरी तरह मूर्खतापूर्ण है। एचआईवी वायरस मानव शरीर के प्राकृतिक द्रव्यों और फ्लूइड्स में न केवल सक्रिय रहता है बल्कि अपनी संख्या भी बढ़ाता है। इसके विपरीत, हंता वायरस एक तीव्र श्वसन रोग है जो अपनी मियाद पूरी करने के बाद मरीज के शरीर से पूरी तरह साफ हो जाता है। डॉ. अमिताव बनर्जी के मुताबिक, यदि कोई मां हंता वायरस के शुरुआती दौर में है और उसे बहुत तेज बुखार है, तो एहतियात के तौर पर कुछ दिनों के लिए स्तनपान रोका जा सकता है क्योंकि उस विशिष्ट अवधि में शरीर में वायरल लोड अधिक होता है। लेकिन सोशल मीडिया की अफवाहों के डर से शिशुओं का स्तनपान हमेशा के लिए बंद कर देना बच्चों के स्वास्थ्य और उनके पोषण के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ होगा।

Hantavirus Transmission Myth vs Reality: मुख्य रूप से कैसे फैलता है हंता वायरस और क्या हैं इससे बचाव के सही तरीके

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की गाइडलाइंस के अनुसार, हंता वायरस का मुख्य जरिया इंसान नहीं बल्कि कतरने वाले छोटे जानवर जैसे चूहे और गिलहरियां हैं। जब ये जीव किसी बंद कमरे, गोदाम या घर के कोने में मल-मूत्र या लार छोड़ते हैं, तो वह सूखकर हवा के महीन कणों में मिल जाता है। जब कोई इंसान उस दूषित हवा में सांस लेता है, तो यह वायरस सीधे उसके फेफड़ों में प्रवेश कर जाता है जिसे ‘हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम’ कहा जाता है। इसके शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, बदन दर्द, उल्टी और सांस लेने में गंभीर तकलीफ शामिल है। इससे बचने का एकमात्र प्रभावी तरीका यह है कि अपने घरों, अनाज के गोदामों और बेसमेंट में चूहों को न पनपने दें। सफाई करते समय मुंह पर मास्क का प्रयोग करें और धूल मिट्टी को सीधे सांस में जाने से रोकें।

डिजिटल मीडिया के इस दौर में किसी भी वैज्ञानिक रिसर्च की आधी अधूरी लाइनों को सनसनीखेज बनाकर परोसना एक चलन बन चुका है। हंता वायरस के मामले में भी यही हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध अब तक का चिकित्सीय डेटा यही बताता है कि आम लोगों को ब्रेस्ट मिल्क या स्पर्म के जरिए इसके फैलने की खबरों से डरने की रत्ती भर भी आवश्यकता नहीं है। यदि किसी को इस तरह के लक्षण दिखते हैं, तो उसे सोशल मीडिया की बहकावे में आने के बजाय तुरंत किसी योग्य फिजिशियन से संपर्क करना चाहिए।

Read More Here:- 

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.